SFURTI योजना: पारंपरिक उद्योगों और कारीगर क्लस्टरों के लिए ₹8 करोड़ तक की सहायता
SFURTI (Scheme of Fund for Regeneration of Traditional Industries) MSME मंत्रालय की योजना है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक उद्योगों (खादी, कॉयर व ग्रामोद्योग जैसे बांस, शहद, हस्तशिल्प आदि) से जुड़े कारीगरों को क्लस्टर के रूप में संगठित कर उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता, उत्पादकता व आय बढ़ाना है।
मुख्य लाभ
- नियमित क्लस्टर (500 तक कारीगर) के लिए अधिकतम ₹2.5 करोड़ तक की सहायता
- प्रमुख/बड़े क्लस्टर (500 से अधिक कारीगर) के लिए अधिकतम ₹8 करोड़ तक की सहायता
- कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC), रॉ मटीरियल बैंक व आधुनिक मशीनरी की स्थापना
- कारीगरों को कौशल विकास प्रशिक्षण, डिजाइन विकास व ब्रांडिंग-पैकेजिंग सहायता
- उत्पादों की मार्केटिंग व ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ाव में सहयोग
पात्रता
- पारंपरिक उद्योग से जुड़े कारीगरों का समूह/क्लस्टर, जिसे किसी कार्यान्वयन एजेंसी (Implementing Agency) के माध्यम से प्रस्तावित किया जाता है
- क्लस्टर में न्यूनतम निर्धारित संख्या में कारीगर परिवार शामिल होने चाहिए
आवेदन कैसे करें
इच्छुक कार्यान्वयन एजेंसी (NGO, उद्योग संगठन, राज्य सरकार की एजेंसी आदि) MSME मंत्रालय या राज्य के नोडल कार्यालय के माध्यम से विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत करती है। स्वीकृति के बाद चरणबद्ध रूप से निधि जारी की जाती है। जानकारी sfurti.msme.gov.in पर उपलब्ध है।
अधिकृत स्रोत
MSME मंत्रालय, भारत सरकार – sfurti.msme.gov.in
अधिक जानकारी व सेवाओं के लिए संपर्क करें
इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या संबंधित सेवाओं (जैसे आवेदन प्रक्रिया में सहायता, दस्तावेज तैयार करना, पात्रता जांच आदि) के लिए RINSON COMMERCE AND TRADE PRIVATE LIMITED से संपर्क करें।
फोन/मोबाइल: +91 7798186956
ईमेल: rinsonbusiness@gmail.com
वेबसाइट: rinsonbusiness.com
क्लस्टर आकार अनुसार अनुदान और आवश्यक कारीगर संख्या
SFURTI के अंतर्गत क्लस्टर के आकार के आधार पर अनुदान तय होता है – मिनी क्लस्टर (500 तक कारीगर) को अधिकतम ₹1.50 करोड़, रेगुलर क्लस्टर को ₹2.50 करोड़, मेजर क्लस्टर (500 से अधिक कारीगर) को ₹5 करोड़ और हेरिटेज क्लस्टर (1,000-2,500 कारीगर) को ₹8 करोड़ तक की सहायता मिल सकती है, जिसमें कार्यान्वयन एजेंसी को परियोजना लागत का 10% (हेरिटेज क्लस्टर में भूमि सहित 25%) योगदान देना होता है। एक मिनी क्लस्टर में सामान्यतः कॉमन फैसिलिटी सेंटर के लिए ₹60-80 लाख, मशीनरी व उपकरण के लिए ₹30-50 लाख, रॉ मैटेरियल बैंक के लिए ₹10-20 लाख तथा प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण के लिए ₹5-10 लाख का आवंटन होता है। मैदानी राज्यों में क्लस्टर बनाने के लिए एक भौगोलिक क्षेत्र में कम से कम 100 कारीगर होना आवश्यक है, जबकि पहाड़ी/पूर्वोत्तर राज्यों व जम्मू-कश्मीर में यह न्यूनतम संख्या 50 है। खादी, ग्रामोद्योग, कॉयर, हथकरघा, हस्तशिल्प, चमड़ा, बांस, मिट्टी के बर्तन, कृषि-प्रसंस्करण, काष्ठकला, कार्पेट वीविंग व शहद प्रसंस्करण जैसे पारंपरिक उद्योग इस योजना के दायरे में आते हैं। 2026 तक देशभर के 18 राज्यों में 513 क्लस्टर स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे लाखों पारंपरिक कारीगरों को संगठित बाजार तक पहुंच मिली है।
चयन प्रक्रिया और निगरानी
SFURTI क्लस्टर के चयन के लिए राज्य सरकार या कार्यान्वयन एजेंसी को पहले संभावित क्षेत्र में कारीगरों की संख्या, उत्पाद विशेषता व बाजार संभावनाओं का सर्वे करना होता है, इसके बाद विस्तृत डायग्नॉस्टिक स्टडी रिपोर्ट (DSR) मंत्रालय को भेजी जाती है। स्वीकृति के बाद परियोजना का क्रियान्वयन सामान्यतः तीन वर्षों में पूरा किया जाता है, जिसमें पहले वर्ष में बुनियादी अवसंरचना, दूसरे वर्ष में मशीनरी व प्रशिक्षण तथा तीसरे वर्ष में बाजार संपर्क व ब्रांडिंग पर जोर दिया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर एक नोडल एजेंसी नियमित रूप से क्लस्टरों की प्रगति की निगरानी करती है और आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त सहायता की सिफारिश करती है।


