MSE पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी: सरकारी खरीद में MSE के लिए 25% अनिवार्य हिस्सेदारी
सार्वजनिक खरीद नीति (MSE Public Procurement Policy) के तहत केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों व केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSE) के लिए अपनी कुल सालाना खरीद का कम से कम 25% सूक्ष्म व लघु उद्यमों (MSE) से करना अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य MSE को सरकारी बाजार तक बेहतर पहुंच देना है।
सब-टारगेट व मुख्य प्रावधान
- कुल 25% खरीद लक्ष्य में से 4% विशेष रूप से SC/ST स्वामित्व वाली MSE से तथा 3% महिला स्वामित्व वाली MSE से खरीदा जाना अनिवार्य
- अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) व परफॉर्मेंस सिक्योरिटी से छूट
- निःशुल्क टेंडर डॉक्यूमेंट
- L1 दर से मूल्य मैच करने पर परचेज प्रेफरेंस (टाई-ब्रेक में प्राथमिकता)
- कुछ निर्धारित वस्तुएं व सेवाएं केवल MSE से ही खरीदने के लिए आरक्षित
पात्रता
- Udyam पोर्टल पर पंजीकृत सूक्ष्म व लघु उद्यम (मीडियम उद्यम इस नीति के तहत पात्र नहीं)
- Government e-Marketplace (GeM) पर विक्रेता के रूप में पंजीकरण अनुशंसित
- PAN, GST व Udyam रजिस्ट्रेशन में जानकारी एक समान होनी चाहिए
आवश्यक दस्तावेज
- Udyam रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र
- GST पंजीकरण व PAN
- GeM सेलर प्रोफाइल व बैंक खाता विवरण
आवेदन कैसे करें
MSE को sambandh.msme.gov.in पोर्टल पर विभिन्न मंत्रालयों/CPSE द्वारा की गई खरीद की प्रगति देखने की सुविधा मिलती है, जबकि वास्तविक भागीदारी के लिए gem.gov.in पर विक्रेता पंजीकरण कर टेंडर व निविदाओं में भाग लिया जा सकता है।
अधिकृत स्रोत
MSME मंत्रालय, भारत सरकार – sambandh.msme.gov.in, gem.gov.in
अधिक जानकारी व सेवाओं के लिए संपर्क करें
इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या संबंधित सेवाओं (जैसे आवेदन प्रक्रिया में सहायता, दस्तावेज तैयार करना, पात्रता जांच आदि) के लिए RINSON COMMERCE AND TRADE PRIVATE LIMITED से संपर्क करें।
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25% लक्ष्य के भीतर उप-लक्ष्य और छूट
25% के समग्र लक्ष्य के भीतर ही केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों व CPSEs को SC/ST-स्वामित्व वाले सूक्ष्म व लघु उद्यमों से कम से कम 4% तथा महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों से कम से कम 3% खरीद करना अनिवार्य है – ये अतिरिक्त आवंटन नहीं बल्कि 25% के भीतर ही निर्धारित उप-लक्ष्य हैं। पात्र सूक्ष्म व लघु उद्यमों को अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) में छूट, टेंडर दस्तावेज शुल्क माफी, L1 बोली के बराबर कीमत वरीयता (प्राइस प्रेफरेंस) तथा कुछ निर्दिष्ट वस्तुओं के लिए विशेष आरक्षण जैसे लाभ मिल सकते हैं – हालांकि ये लाभ हर टेंडर में स्वतः लागू नहीं होते, कुछ टेंडर इन्हें केवल निर्माताओं या सेवा प्रदाताओं तक सीमित भी रख सकते हैं। इन लाभों का दावा करने के लिए वैध उद्यम रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है, जो उस उत्पाद/सेवा श्रेणी से मेल खाता हो जिसके लिए बोली लगाई जा रही है। ध्यान देने योग्य है कि यह नीति केवल सूक्ष्म व लघु उद्यमों पर लागू है, मध्यम उद्यम इसके दायरे से बाहर हैं – इसलिए विस्तार से पहले उद्यम अपनी श्रेणी की पुष्टि जरूर कर लें।
अनुपालन न करने पर परिणाम
यदि कोई केंद्रीय मंत्रालय, विभाग या CPSE वार्षिक 25% खरीद लक्ष्य पूरा नहीं करता, तो उसे अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इसका स्पष्टीकरण देना होता है और अगले वर्ष के लिए सुधार योजना प्रस्तुत करनी होती है। MSMEs को अपने दावे मजबूत बनाने के लिए GeM पोर्टल पर सक्रिय रूप से पंजीकृत रहना, समय पर बोली प्रस्तुत करना तथा उद्यम रजिस्ट्रेशन को अद्यतन रखना सलाह दी जाती है, क्योंकि नीति का लाभ स्वचालित रूप से नहीं मिलता बल्कि उद्यम को स्वयं सक्रिय रहना पड़ता है।


