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भारत की GDP वृद्धि दर घटकर 7.8% पर आई, लगातार चौथी तिमाही में सुस्ती

September 2, 2026 · Prashant Mankar
भारत की GDP वृद्धि दर घटकर 7.8% पर आई, लगातार चौथी तिमाही में सुस्ती

भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की है। हालांकि यह आंकड़ा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के 8 प्रतिशत के अनुमान से कम रहा, लेकिन ज्यादातर विश्लेषकों के 7 से 7.5 प्रतिशत के अनुमान से बेहतर है। नाममात्र (नॉमिनल) GDP वृद्धि दर 10.3 प्रतिशत रही।

चार तिमाहियों से लगातार धीमी हो रही ग्रोथ

गौरतलब है कि यह लगातार चौथी तिमाही है जब भारत की आर्थिक वृद्धि दर में सुस्ती देखी गई है। इससे पहले की तीन तिमाहियों में क्रमशः 8.2, 8 और 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जिससे विशेषज्ञों में चिंता बढ़ी है कि मजबूत नाममात्र आंकड़ों के बावजूद वास्तविक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ रही है।

किस सेक्टर ने कैसा प्रदर्शन किया

सेक्टर के हिसाब से देखें तो कृषि क्षेत्र ने 3.6 प्रतिशत, औद्योगिक (सेकेंडरी) क्षेत्र ने 8.6 प्रतिशत और सेवा (टर्शियरी) क्षेत्र ने 10 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई। खास बात यह रही कि IT और प्रोफेशनल सेवाओं ने 12.1 प्रतिशत की शानदार बढ़त हासिल की, जो पूरे आंकड़े को संभालने में अहम रही।

सरकार और RBI की राय

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था ने अपनी वृद्धि की रफ्तार बनाए रखी है। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू तिमाही के लिए वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो आगे और सुस्ती का संकेत देता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा जताया है कि वित्त वर्ष के दौरान भारत 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर बनाए रखेगा, हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि आने वाली तिमाहियां इस दिशा में अहम साबित होंगी।

वृद्धि दर में गिरावट के कारण

लगातार चौथी तिमाही में GDP वृद्धि दर में आई सुस्ती के पीछे वैश्विक मांग में कमी, निर्यात क्षेत्र पर दबाव, निजी निवेश की धीमी रफ्तार और उच्च ब्याज दरों का असर जैसे कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। हालांकि 7.8 प्रतिशत की दर अभी भी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ है, लेकिन पिछली तिमाहियों की तुलना में इसमें क्रमिक गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है।

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ग्रामीण मांग में सुधार, सरकारी पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी और आगामी त्योहारी सीजन में उपभोक्ता खर्च बढ़ने से आने वाली तिमाहियों में वृद्धि दर में सुधार हो सकता है। साथ ही, हाल ही में मिली अंतरराष्ट्रीय पतमानांकन एजेंसियों (जैसे JCR) से रेटिंग अपग्रेड जैसी सकारात्मक खबरें भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक मजबूती को दर्शाती हैं।

आगे की राह

सरकार और रिजर्व बैंक की नीतियों पर अब सभी की नजर है, क्योंकि वृद्धि दर को फिर से गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती, बुनियादी ढांचे में निवेश और निर्यात प्रोत्साहन जैसे कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, अगली दो-तीन तिमाहियों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि यह सुस्ती अस्थायी है या दीर्घकालिक रुझान का संकेत।

तुलनात्मक अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य

अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की वृद्धि दर अभी भी काफी बेहतर स्थिति में है। वैश्विक मंदी के इस दौर में भारत का प्रदर्शन निवेशकों को आकर्षित करने में मददगार साबित हो रहा है, भले ही घरेलू स्तर पर वृद्धि दर में क्रमिक गिरावट चिंता का विषय बनी हुई हो।

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