शेयर बाजार अपडेट: सेंसेक्स-निफ्टी नरम बंद, सऊदी ऑयल पाइपलाइन ठप होने से कच्चे तेल में उछाल
घरेलू शेयर बाजार में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। बड़ी कंपनियों के शेयरों पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर पड़ा है, जिससे विदेशी निवेशकों का प्रवाह प्रभावित हुआ है। हालांकि दिन के कारोबार के दौरान बाजार ने अपने सबसे निचले स्तर से अच्छी रिकवरी भी दिखाई।
बाजार का हाल
हालिया कारोबारी सत्र में सेंसेक्स करीब 120 अंक और निफ्टी करीब 80 अंक गिरकर बंद हुआ, निफ्टी 23,400 के स्तर से थोड़ा नीचे टिक गया। बाजार पर दबाव मुख्यतः बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ऊंची क्रूड ऑयल कीमतों की वजह से रहा, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों का प्रवाह सुस्त पड़ा। हालांकि दिन के निचले स्तर से बाजार ने काफी हद तक रिकवरी की, जो निवेशकों के लिए राहत की बात रही।
सऊदी अरब की अहम ऑयल पाइपलाइन ठप
तेल की कीमतों में उछाल की सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब की 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का अचानक बंद होना है, जो रोजाना 4-5 करोड़ बैरल तेल की ढुलाई करती है — यानी वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 4-5%। यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करने वाला इकलौता प्रमुख रास्ता है। गुरुवार सुबह रियाद और मदीना क्षेत्रों में ड्रोन हमलों के बाद इसे बंद करना पड़ा। बगदाद और रियाद दोनों ने इन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है।
होर्मुज पर भी दबाव
इसी दौरान हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के मुहाने पर स्थित रणनीतिक रूप से अहम पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया, जो एक महत्वपूर्ण शिपिंग चोकपॉइंट है। पाइपलाइन बंद होने और होर्मुज के पास बढ़ते तनाव, दोनों मिलाकर अरब प्रायद्वीप के दोनों छोर पर तेल आपूर्ति पर दबाव बना है, जिससे कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
भारत पर क्या असर होगा
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर देश के आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है। ऊंची तेल कीमतों का असर पेट्रोल-डीजल के दाम, ट्रांसपोर्ट लागत और कंपनियों के मुनाफे पर भी पड़ सकता है। बाजार जानकारों का कहना है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव लंबा खिंचता है, तो आने वाले हफ्तों में भारतीय बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, और निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में ऑयल-सेंसिटिव सेक्टर्स पर नजर बनाए रखनी चाहिए।


