फरवरी-मार्च 2027 तक देशभर में बैरियर-फ्री टोलिंग: गडकरी का बड़ा ऐलान
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऐलान किया है कि देश भर के नेशनल हाईवे पर फरवरी-मार्च 2027 तक पूरी तरह बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम लागू कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रुकना नहीं पड़ेगा और टोल अपने आप कट जाएगा।
क्या है बैरियर-फ्री (MLFF) टोलिंग
इसे टेक्निकल भाषा में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग कहा जाता है। इस सिस्टम में फिजिकल टोल प्लाजा और बैरियर पूरी तरह हटा दिए जाते हैं। इसकी जगह डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर, मुख्य रूप से FASTag, का इस्तेमाल करके गाड़ियों से हाईवे की सामान्य स्पीड पर चलते हुए ही टोल अपने आप वसूला जाता है। गडकरी के मुताबिक यह व्यवस्था “पारदर्शी, सहज और लीक-प्रूफ” होगी।
लागू होने का टाइमलाइन
सरकार की योजना के मुताबिक दिसंबर 2026 तक देश के 60-70% टोल प्लाजा पर MLFF सिस्टम लागू कर दिया जाएगा, और फरवरी-मार्च 2027 तक बैरियर-फ्री नेशनल हाईवे नेटवर्क का पूरे देश में रोलआउट पूरा कर लिया जाएगा।
कितना फायदा होगा
सरकार का अनुमान है कि टोल चोरी और लीकेज कम होने से सालाना टोल कलेक्शन में करीब 10,000 करोड़ रुपये का इजाफा होगा। इसके अलावा टोल प्लाजा के रखरखाव पर होने वाला खर्च मौजूदा 12-15% से घटकर सिर्फ 2-3% रह जाएगा, जिससे 6,000-7,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम की वजह से जो ईंधन बर्बाद होता है, उसमें भी हर साल करीब 5,250 करोड़ रुपये की बचत का अनुमान है।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा
FASTag लगी गाड़ियां टोल जोन से बिना रुके सामान्य स्पीड पर गुजर सकेंगी, और सिस्टम अपने आप गाड़ी की जानकारी कैप्चर करके लिंक्ड अकाउंट से टोल काट लेगा। इसके साथ ही एक नया फीचर “OneTag” भी लाया जा रहा है, जिसकी मदद से यूजर्स राजमार्ग यात्रा ऐप और डिजिटल KYC के जरिए बिना टैग बदले अलग-अलग बैंकों के बीच स्विच कर सकेंगे। इस बदलाव से टोल प्लाजा पर इंतजार का समय मौजूदा 12-30 मिनट से घटकर करीब 10 सेकंड या उससे भी कम रह जाने की उम्मीद है।
व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर असर
ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री के लिए यह बदलाव खासतौर पर फायदेमंद माना जा रहा है, क्योंकि ट्रकों और कमर्शियल वाहनों का ज्यादातर समय टोल प्लाजा पर लगने वाली कतारों में बर्बाद होता है। बैरियर-फ्री टोलिंग लागू होने के बाद माल ढुलाई तेज होगी, डीजल की खपत घटेगी और सप्लाई चेन की लागत कम होने की उम्मीद है। हालांकि इस पूरे सिस्टम की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि सभी गाड़ियों पर सही ढंग से काम करने वाला FASTag लगा हो और नेटवर्क कनेक्टिविटी व नंबर-प्लेट रीडिंग टेक्नोलॉजी बिना रुकावट के काम करे।


