गोबरधन योजना 2026: पूरी जानकारी, पात्रता, सब्सिडी और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
गोबरधन योजना क्या है?
गोबरधन योजना (GOBARdhan Yojana) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य गाय-भैंस के गोबर, कृषि अवशेष (पराली), प्रेस मड और गीले नगरीय कचरे जैसे जैविक कचरे को बायोगैस, कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद में बदलना है। “गोबरधन” शब्द का पूरा अर्थ है — Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan, यानी जैविक कचरे को धन (संसाधन) में बदलना।
इस योजना की शुरुआत अप्रैल 2018 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के “सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट” घटक के तहत हुई थी। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त 2026 को गोबरधन योजना को एक बड़े और विस्तारित रूप में मंजूरी दी है, जिसे अब “नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी स्कीम” के रूप में वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक, यानी अगले 10 वर्षों के लिए लागू किया जाएगा।
योजना का उद्देश्य
गोबरधन योजना के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
- गांवों में स्वच्छता बनाए रखते हुए पशुधन और जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन करना।
- गोबर व अन्य जैविक कचरे से बायोगैस और जैविक खाद का उत्पादन बढ़ाना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार के नए अवसर पैदा करना।
- पराली जलाने की समस्या को कम कर वायु प्रदूषण घटाना।
- एलपीजी और रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाकर घरेलू खर्च कम करना।
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाकर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना।
संबंधित मंत्रालय
यह योजना संयुक्त रूप से दो मंत्रालयों द्वारा संचालित की जाती है:
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय — कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) से जुड़े घटक के लिए।
- जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) — ग्रामीण बायोगैस संयंत्रों के लिए।
योजना के चार मॉडल
गोबरधन योजना के अंतर्गत लाभार्थियों की जरूरत के अनुसार चार अलग-अलग मॉडल तय किए गए हैं:
- व्यक्तिगत घरेलू मॉडल (Individual Household Model) — ग्राम पंचायत द्वारा मान्यता प्राप्त एकल परिवार।
- क्लस्टर मॉडल (Cluster Model) — 3-4 पशुओं वाले परिवारों के समूह, सहकारी समितियां, FPO, दूध संघ या स्वयं सहायता समूह (SHG)।
- कम्युनिटी मॉडल (Community Model) — ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित सामुदायिक संयंत्र।
- कमर्शियल मॉडल (Commercial Model) — सहकारी संस्थाएं, उद्यमी, डेयरी और गौशालाएं।
पात्रता (Eligibility)
निम्नलिखित व्यक्ति और संस्थाएं गोबरधन योजना के लिए आवेदन कर सकती हैं:
- ग्रामीण परिवार और किसान (अधिक पशुधन वाले किसानों को प्राथमिकता)
- ग्राम पंचायतें
- सहकारी समितियां और स्वयं सहायता समूह
- गौशालाएं और डेयरी संस्थान
- MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) — इनके लिए PMEGP योजना भी उपयोगी हो सकती है
- निजी कंपनियां और उद्यमी
वित्तीय सहायता और सब्सिडी
सरकार ने योजना को आकर्षक बनाने के लिए कई तरह की वित्तीय सहायता तय की है:
- कुल बजट परिव्यय: अगले 10 वर्षों (वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36) के लिए ₹23,731 करोड़।
- पूंजीगत सहायता (Capital Support): नए CBG प्रोजेक्ट्स को प्रति टन प्रतिदिन क्षमता पर ₹2 करोड़ तक की सहायता।
- मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस: फर्मेंटेड जैविक खाद (FOM) पर ₹1,500 प्रति टन की सहायता।
- ब्याज सब्सिडी: कृषि अवसंरचना निधि (Agriculture Infrastructure Fund) के तहत ₹2 करोड़ तक के ऋण पर 3% ब्याज सब्सिडी।
- निश्चित CBG मूल्य: कम्प्रेस्ड बायोगैस के लिए ₹2,110 प्रति MMBTU का मूल्य कम से कम 10 वर्षों के लिए तय किया गया है।
- क्रेडिट गारंटी: MSME द्वारा संचालित प्रोजेक्ट्स के लिए अलग से क्रेडिट गारंटी कवरेज।
- आवेदन के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता और सब्सिडी राशि पर कोई पुनर्भुगतान (repayment) नहीं करना होता।
योजना के प्रमुख लाभ
- बायो-स्लरी से मुफ्त जैविक खाद मिलने से खेती की उत्पादकता बढ़ती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता घटती है।
- बायोगैस के उपयोग से एलपीजी की खपत और घरेलू ईंधन खर्च कम होता है।
- गांवों में स्वच्छता बेहतर होती है और मच्छर व कीटजनित बीमारियों का खतरा घटता है।
- स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर बनते हैं।
- पराली जलाने का विकल्प मिलने से वायु प्रदूषण कम होता है।
- विदेशी मुद्रा में होने वाले गैस आयात खर्च में कमी आती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन होता है।
रजिस्ट्रेशन कैसे करें? (Online Registration Process)
गोबरधन योजना के तहत पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन और नि:शुल्क है। इसके लिए दो अलग-अलग पोर्टल तय किए गए हैं:
- बायोगैस संयंत्रों के लिए: gobardhan.sbm.gov.in
- CBG प्रोजेक्ट्स के लिए: gobardhan.eil.co.in
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया इस प्रकार है:
- संबंधित पोर्टल पर जाएं और न्यूनतम प्लांट साइज़ (बायोगैस के लिए 10 क्यूबिक मीटर/दिन) की जानकारी देखें।
- प्लांट की जानकारी भरें — स्थान, क्षमता और कच्चे माल (feedstock) का प्रकार।
- पहचान और व्यावसायिक जानकारी दें — व्यक्तिगत आवेदकों के लिए आधार, संस्थाओं के लिए CIN/PAN/GST।
- आवेदन सबमिट करें और भविष्य के दावों (claims) के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर सुरक्षित रखें।
आवश्यक दस्तावेज़
व्यक्तिगत आवेदकों के लिए:
- आधार कार्ड
- भूमि/स्थान के स्वामित्व का प्रमाण
- बैंक पासबुक
कंपनियों/सहकारी संस्थाओं के लिए:
- CIN या रजिस्ट्रेशन नंबर
- PAN और GST नंबर
- प्लांट/प्रोजेक्ट का विवरण
- वित्तीय विवरण (Financial Statements)
वर्तमान स्थिति (Current Status)
- देशभर में अब तक 1,750 बायोगैस संयंत्र पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें से 1,286 चालू हैं।
- 1,215 CBG प्लांट पंजीकृत हैं, जिनमें से 163 वर्तमान में परिचालन में हैं।
- बायोगैस योजना 570 जिलों में और CBG योजना 220 जिलों में लागू है।
- छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्य बायोगैस संयंत्रों की संख्या में सबसे आगे हैं।
निष्कर्ष
गोबरधन योजना ग्रामीण भारत के लिए एक “वेस्ट टू वेल्थ” (कचरे से कमाई) मॉडल है, जो न केवल स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि किसानों, गौशालाओं, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया भी बनती है। जो किसान, ग्राम पंचायत या संस्था अपनी जमीन पर बायोगैस या CBG प्लांट लगाना चाहती है, वह ऊपर बताए गए पोर्टल पर जाकर नि:शुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकती है और सरकार से पूंजीगत सहायता व अन्य लाभ प्राप्त कर सकती है।
नोट: योजना से जुड़ी शर्तें, सब्सिडी दरें और पोर्टल की जानकारी समय-समय पर अपडेट होती रहती है। नवीनतम जानकारी के लिए संबंधित सरकारी पोर्टल जरूर देखें।


