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Small Savings Interest Rates Oct-Dec 2026: PPF 7.1%, NSC 7.7%, सुकन्या 8.2% पर कायम

October 3, 2026 · Prashant Mankar
Small Savings Interest Rates Oct-Dec 2026: PPF 7.1%, NSC 7.7%, सुकन्या 8.2% पर कायम

Small Savings Interest Rates October-December 2026: वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए सभी लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरें अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार यह लगातार नौवीं तिमाही है जब इन योजनाओं की दरों में कोई व्यापक बदलाव नहीं किया गया। नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से लागू हैं।

किस योजना पर कितना ब्याज मिलेगा

सुकन्या समृद्धि योजना और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) पर 8.2% की सबसे ऊँची दर बरकरार है। राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) पर 7.7%, किसान विकास पत्र (KVP) पर 7.5% और पाँच साल की पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट पर 7.5% ब्याज मिलेगा। मासिक आय योजना (MIS) पर 7.4%, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) पर 7.1% और तीन साल की टाइम डिपॉजिट पर 7.1% की दर है।

दो साल की टाइम डिपॉजिट पर 7%, एक साल की टाइम डिपॉजिट पर 6.9%, पाँच साल की आवर्ती जमा (RD) पर 6.7% और पोस्ट ऑफिस बचत खाते पर 4% ब्याज मिलता रहेगा। इन दरों की समीक्षा हर तिमाही सरकारी बॉन्ड यील्ड, प्रचलित ब्याज दरों और बाजार व भू-राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए की जाती है।

दरें नहीं बदलने का मतलब

पिछली बार दरों में बदलाव अप्रैल 2024 में हुआ था, जब तीन साल की टाइम डिपॉजिट 7% से 7.1% और सुकन्या समृद्धि योजना 8% से 8.2% की गई थी। उसके बाद से दरें स्थिर हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि बचतकर्ताओं को अगले तीन महीनों तक वर्तमान दरों पर निश्चित रिटर्न मिलता रहेगा, चाहे बैंक जमा दरों में या बाजार में कुछ भी बदले।

दिलचस्प बात यह है कि रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो दर बढ़ाकर नीतिगत माहौल बदला है। आमतौर पर रेपो दर बढ़ने पर बैंक जमा दरें भी बढ़ाते हैं। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में लघु बचत दरें बैंक एफडी के मुकाबले कम आकर्षक भी हो सकती हैं, या फिर सरकार अगली तिमाही की समीक्षा में बदलाव का फैसला ले सकती है। यह केवल अनुमान है; वास्तविक फैसला सरकार की घोषणा पर निर्भर रहेगा।

आपके लिए कौन-सी योजना बेहतर

बेटी की पढ़ाई और विवाह के लिए बचत करने वाले माता-पिता के लिए सुकन्या समृद्धि योजना सबसे आकर्षक है, क्योंकि 8.2% की दर के साथ इसमें लंबी अवधि और कर लाभ का प्रावधान है। बुजुर्गों को नियमित त्रैमासिक ब्याज चाहिए तो वरिष्ठ नागरिक बचत योजना उपयुक्त है। दीर्घकालिक कर-मुक्त निवेश के लिए PPF का 15 साल का लॉक-इन उपयोगी है, जबकि पाँच साल की टाइम डिपॉजिट और NSC मध्यम अवधि के लक्ष्यों के लिए विकल्प हैं।

निवेश करते समय अपनी जरूरत की अवधि, तरलता, कर नियम और जोखिम सहनशीलता को ध्यान में रखें। लघु बचत योजनाओं में सरकारी गारंटी का भरोसा रहता है, पर समय से पहले निकासी पर शर्तें और जुर्माने लागू हो सकते हैं। इसलिए निवेश से पहले योजना के नियम डाकघर या अधिकृत बैंक से जरूर समझ लें।

ग्रामीण और छोटे निवेशकों के लिए सुझाव

ग्रामीण क्षेत्रों में डाकघर आज भी बचत का सबसे सुलभ माध्यम है। छोटे किसान, मजदूर और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ आवर्ती जमा और टाइम डिपॉजिट के जरिये अनुशासित बचत की आदत डाल सकती हैं। हर महीने तय छोटी राशि जमा करने से भविष्य के लिए अच्छी निधि बन जाती है। खाते में नामांकन (नॉमिनी) जरूर दर्ज कराएँ और पासबुक को अपडेट रखें ताकि भविष्य में किसी दावे या निकासी में परेशानी न आए।

यह भी जरूरी है कि अपनी सारी बचत एक ही योजना में न रखें। आपातकालीन खर्च के लिए तरल बचत, मध्यम अवधि के लिए एफडी या टाइम डिपॉजिट और दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए PPF व अन्य उपयुक्त निवेश का मिश्रण बेहतर संतुलन देता है। किसी एजेंट के भरोसे या अनधिकृत स्रोत से निवेश करने से बचें और केवल अधिकृत डाकघर या बैंक शाखा के माध्यम से ही खाता खोलें।

अगली तिमाही में क्या हो सकता है

जनवरी से मार्च 2027 की तिमाही की दरों की घोषणा दिसंबर के अंत में होगी। तब तक सरकारी बॉन्ड यील्ड, महँगाई और रिजर्व बैंक की नीतिगत दिशा से संकेत मिलेंगे कि दरें बढ़ेंगी, घटेंगी या वही रहेंगी। निवेशक जो अभी लॉक-इन करना चाहते हैं, उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि अधिकांश लघु बचत योजनाओं की दर खाता खोलने के समय की दर पर तय होती है या तिमाही आधार पर बदलती है, जो योजना के नियमों पर निर्भर करता है।

टाइम डिपॉजिट बनाम बैंक एफडी: तुलना कैसे करें

बैंक एफडी और पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट की तुलना करते समय केवल ब्याज दर नहीं, बल्कि ब्याज चक्रवृद्धि की आवृत्ति, कर नियम और सुरक्षा भी देखें। पोस्ट ऑफिस की योजनाओं में केंद्र सरकार का समर्थन होता है, जबकि बैंक जमा पर बीमा सीमा लागू होती है। कई निजी और छोटे वित्त बैंक कभी-कभी अधिक दर देते हैं, पर उनमें जमा की सुरक्षा सीमा और बैंक की वित्तीय स्थिति देखना जरूरी है।

रेपो दर बढ़ने के बाद बैंक जमा दरें बढ़ाने लगें तो पाँच साल की एफडी और लघु बचत योजना का अंतर बदल सकता है। इसलिए बड़ी रकम लगाने से पहले कम से कम दो-तीन विकल्पों की दरें जाँचें। यदि आपको कर बचत चाहिए तो PPF, NSC और पाँच साल की कर-बचत टाइम डिपॉजिट पर लागू आयकर प्रावधानों की जानकारी भी देख लें, क्योंकि लाभ आपके कर स्लैब और चुनी गई कर व्यवस्था पर निर्भर करते हैं।

स्रोत: बिजनेस टुडे (30 सितंबर 2026), वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की घोषणा पर आधारित। यह लेख वित्तीय सलाह नहीं है; निवेश से पहले आधिकारिक अधिसूचना देखें।

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