लघु जल विद्युत विकास योजना 2026-31: ₹2,584 करोड़ से 1,500 मेगावाट नई क्षमता का लक्ष्य
11 सितंबर 2026 | केंद्र सरकार ने पहाड़ी और दूरदराज़ राज्यों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए Small Hydro Power Development Scheme (2026-31) को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में देश में करीब 1,500 मेगावाट नई लघु जल विद्युत क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना का बजट और लक्ष्य
इस योजना के लिए ₹2,584.60 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसके तहत लगभग 200 डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स (DPRs) तैयार करने में सहायता दी जाएगी, ताकि नए प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग तेज़ी से हो सके। योजना का फोकस रन-ऑफ-रिवर प्रोजेक्ट्स पर है, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग करते हैं और जिनमें भूमि जलमग्न होने की समस्या न्यूनतम रहती है।
किन राज्यों को होगा सबसे ज़्यादा फायदा
भारत में लघु जल विद्युत की कुल क्षमता करीब 21 गीगावाट (GW) आंकी गई है, जिसमें से अभी तक केवल 5.2 GW ही विकसित हो पाई है। नई योजना में खासतौर पर अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों को प्राथमिकता दी गई है, क्योंकि इन राज्यों में देश की कुल लघु जल विद्युत क्षमता का लगभग आधा हिस्सा मौजूद है।
व्यापार और निवेश के लिए क्या मायने रखता है
यह योजना स्थानीय बिजली आपूर्ति सुधारने के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी। जो उद्यमी और डेवलपर्स हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स में रुचि रखते हैं, उनके लिए DPR सपोर्ट और सब्सिडी योजनाओं का लाभ उठाने का यह अच्छा मौका हो सकता है।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), भारत सरकार
योजना का उद्देश्य और लक्ष्य
केंद्र सरकार द्वारा मंजूर की गई इस लघु जल विद्युत विकास योजना (2026-27 से 2030-31) के तहत ₹2,584 करोड़ के परिव्यय से 1,500 मेगावाट की नई स्वच्छ ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। भारत में लघु जल विद्युत की कुल संभावित क्षमता लगभग 21 गीगावाट आंकी गई है, जिसमें से अभी तक एक छोटा हिस्सा ही उपयोग में लाया गया है, इसलिए यह योजना इस क्षेत्र की अप्रयुक्त क्षमता को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
दूरदराज़ और पहाड़ी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
लघु जल विद्युत परियोजनाएं मुख्यतः पहाड़ी और दूरदराज़ राज्यों (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्य) में स्थापित की जाती हैं, जहां बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं की तुलना में पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है और स्थानीय ग्रिड को सीधा लाभ मिलता है। इन क्षेत्रों में बिजली की पहुंच सीमित होने के कारण, स्थानीय स्तर पर उत्पन्न स्वच्छ ऊर्जा से ग्रामीण विद्युतीकरण और ऊर्जा सुरक्षा को बल मिलेगा।
निवेश और रोजगार पर प्रभाव
इस योजना के क्रियान्वयन से निर्माण चरण में इंजीनियरिंग, सिविल कार्य और उपकरण आपूर्ति से जुड़े हजारों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, वहीं परियोजनाएं पूर्ण होने के बाद स्थानीय स्तर पर संचालन-रखरखाव में भी दीर्घकालिक रोजगार के अवसर बनेंगे। यह योजना भारत के 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 500 गीगावाट स्थापित क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी सहयोग देगी।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा नीति में योगदान
यह योजना भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य का एक अहम हिस्सा है। लघु जल विद्युत परियोजनाएं सौर और पवन ऊर्जा की तुलना में अधिक स्थिर (constant) बिजली उत्पादन करती हैं, क्योंकि ये मौसम पर उतनी निर्भर नहीं होतीं। इससे ग्रिड को संतुलित करने और बिजली आपूर्ति में स्थिरता लाने में भी मदद मिलती है, जो बड़े पैमाने पर सौर व पवन ऊर्जा अपनाने वाले क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।


