Share Market Today 1 October 2026: सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट, रुपया 95.95 पर खुला
Share Market Today 1 October 2026: अक्टूबर की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए सुस्त रही। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हल्की कमजोरी के साथ चल रहे थे और दिन चढ़ते-चढ़ते दबाव बढ़ता गया। कोटक नियो की रिपोर्ट के मुताबिक सुबह करीब 10:30 बजे सेंसेक्स 93.63 अंक (0.13%) गिरकर 72,386.66 पर और निफ्टी 63.55 अंक (0.28%) गिरकर 22,556.90 पर था। 30 सितंबर को सेंसेक्स 72,480.29 और निफ्टी 22,620.45 पर बंद हुए थे।
शुरुआती कारोबार में कौन से सेक्टर चढ़े और कौन गिरे
सेक्टरों की चाल मिली-जुली रही। निफ्टी आईटी इंडेक्स में सबसे ज्यादा 1.74% की तेजी दिखी, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.09%, निफ्टी फार्मा 0.26% और पीएसयू बैंक 0.19% ऊपर रहे। दूसरी तरफ निफ्टी ऑटो 2.60% नीचे रहा और धातु (1.11%), कमोडिटी (1.06%), एफएमसीजी (0.76%) तथा रियल्टी (0.47%) में भी कमजोरी दिखी। बैंक निफ्टी 318.55 अंक (0.58%) चढ़कर 54,951.60 पर पहुँचा, जिससे साफ है कि निजी बैंकों में खरीदारी बाजार को पूरी तरह गिरने से बचाती रही।
निफ्टी के शुरुआती बढ़त वाले शेयरों में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, कोटक महिंद्रा बैंक, सीमेंस एनर्जी इंडिया, सीजी पावर और हिताची एनर्जी शामिल रहे। जबकि बजाज ऑटो, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, आयशर मोटर्स, अल्ट्राटेक सीमेंट और टाटा मोटर्स कमर्शियल वाहन जैसे शेयर दबाव में दिखे। ऑटो सेक्टर की कमजोरी का एक कारण आगे आने वाले वाहन बिक्री के आँकड़ों और ब्याज दर बढ़ने की आशंका को माना जा सकता है, हालाँकि रिपोर्ट में गिरावट की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई गई।
दिन के अंत में बाजार किस स्तर पर बंद हुआ
बाद की रिपोर्टों से पता चलता है कि 1 अक्टूबर के कारोबार के अंत में सेंसेक्स 71,909.70 और निफ्टी 22,421.95 पर बंद हुए, यानी दिन के भीतर बाजार और नीचे फिसल गया। इसका अर्थ है कि सुबह की मामूली कमजोरी दिन के अंत तक करीब 570 अंकों की गिरावट में बदल गई। निफ्टी ने दिन के दौरान 22,217 के आसपास निचला स्तर भी छुआ, जिसे आगे आने वाले दिनों में तकनीकी विश्लेषकों ने महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में देखा। ये बंद स्तर 5 अक्टूबर की एएनआई-आधारित रिपोर्ट में बताए गए पिछले बंद भाव से लिए गए हैं।
रुपया, कच्चा तेल और सोना
रुपया डॉलर के मुकाबले 95.95 पर खुला, जबकि पिछला बंद 95.82 था। यानी रुपये में और कमजोरी आई। वैश्विक मोर्चे पर कच्चा तेल पिछले सत्र की तेज उछाल के बाद लगभग स्थिर रहा, जबकि सोना अमेरिकी रोजगार आँकड़ों के इंतजार में लगभग अपरिवर्तित रहा। अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को ज्यादातर कमजोर बंद हुए थे और निवेशक सतर्क थे। एशियाई बाजारों में ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 लगभग 1.8% नीचे था, जबकि जापान का टॉपिक्स 0.1% ऊपर चल रहा था।
निवेशकों के लिए आगे की राह
इस हफ्ते बाजार की नजर तीन बड़ी घटनाओं पर है: रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति (7 अक्टूबर), टीसीएस के तिमाही नतीजे और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड तथा रोजगार आँकड़े। जब ब्याज दर बढ़ने की आशंका हो तब बैंक, रियल्टी और ऑटो जैसे ब्याज-संवेदी शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है। इसीलिए अक्टूबर की शुरुआत में बाजार का रुख सावधानी भरा दिखा।
खुदरा निवेशकों के लिए सामान्य सिद्धांत यही है कि एक दिन की चाल को रुझान न मान लें। बाजार में गिरावट के दौर में चरणबद्ध निवेश (SIP या किस्तों में खरीद) अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीका माना जाता है, जबकि कर्ज लेकर निवेश करना जोखिम बढ़ाता है। अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और आपातकालीन निधि को ध्यान में रखकर ही फैसला करें और जरूरत हो तो पंजीकृत निवेश सलाहकार से परामर्श लें।
त्योहारी मौसम में उपभोक्ता मांग और कंपनियों की कमाई पर बाजार की निगाह रहेगी। दूसरी तिमाही के नतीजों का सिलसिला आईटी कंपनियों से शुरू होकर बैंकों और अन्य क्षेत्रों तक जाएगा। अगर नतीजे उम्मीद से बेहतर आए तो बाजार को सहारा मिल सकता है, लेकिन अगर कच्चा तेल ऊँचा रहा और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही तो उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
ब्याज दरों और शेयर बाजार का रिश्ता
जब रिजर्व बैंक रेपो दर बढ़ाने के संकेत देता है, तो बैंकों और गैर-बैंकिंग कंपनियों के लिए उधार लेना महँगा हो जाता है और वे ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज की दरें भी बढ़ा सकते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर होम लोन, ऑटो लोन और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों पर पड़ता है, क्योंकि इन क्षेत्रों की मांग कर्ज पर निर्भर करती है। इसी कारण नीति बैठक से पहले इन क्षेत्रों के शेयरों में अक्सर घबराहट की बिकवाली दिखती है। दूसरी ओर, बैंकों के लिए ऊँची दरें कभी-कभी उधारी पर कमाई बढ़ा सकती हैं, लेकिन जमा की लागत बढ़ने से मार्जिन पर दबाव भी आ सकता है।
विदेशी निवेशक, रुपया और बाजार
भारतीय बाजार की दिशा पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री का बड़ा असर रहता है। जब रुपया कमजोर होता है और डॉलर की मजबूती तथा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशकों को डॉलर में रिटर्न घटता दिखता है और वे उभरते बाजारों से पैसा निकाल सकते हैं। रुपये में 95 के पार की कमजोरी इसी दबाव का संकेत मानी जाती है। जब तक कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक यील्ड स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में अनिश्चितता बने रहने की संभावना है।
खुदरा निवेशक इन बातों का ध्यान रखें
पहली बात, घबराहट में बिकवाली से बचें और अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा कुछ महीनों में एक बार करें। दूसरी बात, सारा निवेश एक ही सेक्टर में न रखें, क्योंकि जब ऑटो या बैंकिंग जैसे क्षेत्र दबाव में हों तब आईटी या फार्मा जैसे क्षेत्र संतुलन दे सकते हैं, जैसा आज के कारोबार में आईटी और निजी बैंकों में दिखा। तीसरी बात, लिक्विडिटी यानी आपात स्थिति के लिए छह महीने का खर्च बैंक में सुरक्षित रखें। चौथी बात, अफवाहों और सोशल मीडिया टिप्स की बजाय कंपनी के नतीजों, बैलेंस शीट और आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करें।
स्रोत: कोटक नियो (1 अक्टूबर 2026 का बाजार अपडेट) और 5 अक्टूबर की एएनआई-आधारित रिपोर्ट। आँकड़े सुबह के कारोबार और बाद की रिपोर्टों पर आधारित हैं। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।


