Sensex Nifty Today 5 October 2026: 8 दिन की गिरावट थमी, सेंसेक्स 72,000 के ऊपर लौटा
Sensex Nifty Today 5 October 2026: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने गिरावट के लंबे सिलसिले पर विराम लगाया। एएनआई-आधारित रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 452.84 अंक (0.63%) चढ़कर करीब 72,362.54 पर और निफ्टी 121.10 अंक (0.54%) बढ़कर 22,543.05 के आसपास पहुँच गया। इससे बाजार की आठ दिनों से जारी गिरावट थमती दिखी। बाद की रिपोर्टों में निफ्टी का अंतिम बंद भाव 22,555.75 और सेंसेक्स का 72,382.47 बताया गया।
कहाँ से कितना ऊपर आया बाजार
सेंसेक्स पिछले बंद 71,909.70 से 72,340.95 पर खुला, जबकि निफ्टी पिछले बंद 22,421.95 से 22,532.40 पर खुला। यानी दोनों सूचकांकों ने गैप-अप ओपनिंग दी। सभी व्यापक सूचकांक हरे निशान में रहे। बाजार में यह तेजी निचले स्तरों पर खरीदारी और ओवरसोल्ड स्थिति के कारण आई मानी जा रही है, हालाँकि रिपोर्ट में इसके स्पष्ट कारण नहीं बताए गए।
कौन से सेक्टर और शेयर आगे रहे
निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 1.79% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा। केमिकल, रियल्टी, मेटल, वित्तीय सेवाएँ और तेल-गैस सेक्टर में भी 1% से अधिक की तेजी दिखी। एनएसई पर सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, आईटीसी, एनटीपीसी, कोल इंडिया, ग्रासिम, बजाज फिनसर्व, एसबीआई, पावर ग्रिड, ओएनजीसी, एल एंड टी, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक शामिल रहे।
दूसरी तरफ अपोलो हॉस्पिटल्स, इंफोसिस, सिप्ला, एटरनल, एशियन पेंट्स, बीईएल, टेक महिंद्रा और नेस्ले इंडिया जैसे शेयर दबाव में रहे। बीएसई पर इंफोसिस, एचसीएल टेक, एटरनल, सन फार्मा, एम एंड एम, बीईएल और मारुति नुकसान में रहे। आईटी शेयरों में कमजोरी का एक संभावित कारण टीसीएस के नतीजों से पहले की सतर्कता हो सकती है।
कच्चा तेल और भू-राजनीति
ब्रेंट कच्चा तेल लगभग $101.37 प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। रिपोर्ट के साइडबार में होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की भारत द्वारा निंदा की खबर भी थी, हालाँकि लेख ने इसे बाजार की चाल से सीधे नहीं जोड़ा। तेल का $100 के ऊपर बना रहना भारत जैसे आयातक देश के लिए महँगाई और रुपये के लिहाज से चिंता का विषय है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
बाजार की तेजी के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली चिंता का कारण बनी हुई है। बाद की रिपोर्टों के अनुसार 5 अक्टूबर को FII ने ₹4,699 करोड़ के शेयर बेचे। लगातार विदेशी निकासी रुपये और बाजार दोनों के लिए बोझ है। इसीलिए विश्लेषक इस उछाल को “राहत की रैली” कह रहे हैं, यानी लंबे समय से गिरते बाजार के बाद की तकनीकी वापसी, न कि पक्का रुझान परिवर्तन।
आगे का नजरिया
इस सप्ताह निवेशकों की निगाह 7 अक्टूबर की आरबीआई नीति, टीसीएस के नतीजों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी। अगर रिजर्व बैंक सख्ती का संकेत देता है तो बैंकिंग और रियल्टी में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। निफ्टी के लिए तकनीकी विश्लेषक 22,400 और 22,217 पर समर्थन तथा 22,650, 22,800 और 23,000 पर प्रतिरोध देख रहे हैं।
खुदरा निवेशकों के लिए सलाह यही है कि एक दिन की तेजी के आधार पर जल्दबाजी में बड़े दाँव न लगाएँ। गिरावट के बाद की उछाल अक्सर अस्थिर होती है और अगले दिन पलट भी सकती है। बेहतर होगा कि मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश करें, अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार हिस्सेदारी रखें और आपात निधि को शेयरों में न लगाएँ।
निफ्टी और सेंसेक्स की गिरावट का सिलसिला क्यों अहम था
जब बाजार लगातार आठ सत्रों तक गिरता है, तो इसका मतलब होता है कि बिकवाली का दबाव कई कारकों से बना हुआ था: विदेशी निवेशकों की निकासी, रुपये की कमजोरी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और महँगा कच्चा तेल। ऐसे दौर में निवेशकों का भरोसा डगमगाता है और कई बार अच्छी कंपनियों के शेयर भी बिना किसी खास कारण के सस्ते हो जाते हैं। इसी वजह से लंबी गिरावट के बाद आने वाली कोई भी तेजी बाजार भावना के लिए अहम होती है, भले ही वह अल्पकालिक हो।
तकनीकी विश्लेषक ऐसी स्थिति को “ओवरसोल्ड” कहते हैं, यानी जब शेयर अपने औसत मूल्य से बहुत नीचे चले जाते हैं और खरीदारों को आकर्षक कीमत दिखने लगती है। रिपोर्टों में भी बताया गया कि गिरावट के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी से बाजार को सहारा मिला। पर यह समझना जरूरी है कि केवल तकनीकी वापसी स्थायी तेजी नहीं बनाती; इसके लिए कंपनियों की कमाई, घरेलू मांग और वैश्विक माहौल में सुधार भी चाहिए।
निवेशक किन संकेतों पर नजर रखें
पहला संकेत विदेशी निवेशकों का रुख है। अगर FII लगातार बेचते रहे तो बाजार में स्थायी सुधार मुश्किल होगा। दूसरा संकेत अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स है, जो उभरते बाजारों में पूँजी प्रवाह को प्रभावित करते हैं। तीसरा संकेत कच्चे तेल का भाव है, क्योंकि $100 के ऊपर का ब्रेंट भारत की महँगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ाता है।
चौथा, इंडिया VIX यानी बाजार की अस्थिरता का सूचकांक। जब VIX गिरता है तो इसका अर्थ है कि निवेशकों में डर घट रहा है, और जब बढ़ता है तो उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ जाती है। VIX में कमी को आम तौर पर राहत का संकेत माना जाता है। इन सब संकेतों को एक साथ देखकर ही बाजार की दिशा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अंत में, ध्यान रखें कि बाजार की हर बड़ी चाल के पीछे अनेक कारण होते हैं और कोई भी विश्लेषण निश्चित भविष्यवाणी नहीं होता। अपने निवेश फैसले अपनी वित्तीय स्थिति, लक्ष्य और जोखिम क्षमता के आधार पर लें।
स्रोत: एएनआई-आधारित रिपोर्ट (डीडी इंडिया, 5 अक्टूबर 2026) और बाद की बाजार रिपोर्ट। आँकड़े शुरुआती कारोबार तथा बाद की रिपोर्टों पर आधारित हैं। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।


