Rupee Dollar Today: RBI के उपायों से रुपया 1% मजबूत होकर 95.78 पर, शुक्रवार को 96.73 पर था
Rupee Dollar RBI Measures October 2026: कमजोर होते रुपये को सोमवार को बड़ा सहारा मिला। रिजर्व बैंक द्वारा स्पॉट और डेरिवेटिव बाजार में डॉलर की मांग घटाने के उपाय लाने के बाद रुपया करीब 1% मजबूत हुआ। कोटक नियो की रिपोर्ट के अनुसार रुपया 95.77 प्रति डॉलर तक पहुँचा, जबकि इंडियाआईपीओ की रिपोर्ट में 12 अक्टूबर को रुपये का बंद भाव 95.78 बताया गया है। शुक्रवार (9 अक्टूबर) को रुपया 96.73 पर बंद हुआ था, यानी एक ही कारोबारी दिन में लगभग 95 पैसे की रिकवरी हुई।
अक्टूबर में रुपये का सफर
अक्टूबर की शुरुआत में रुपया दबाव में था। 1 अक्टूबर को यह 95.82 के पिछले बंद के मुकाबले 95.95 पर खुला। उसके बाद रिजर्व बैंक की दर वृद्धि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ऊँचे कच्चे तेल के बीच रुपया 96 के पार चला गया और 9 अक्टूबर को 96.73 पर बंद हुआ। सोमवार को रिजर्व बैंक के नए उपायों की खबर के बाद रुपया 95.75 के आसपास खुला और दिन के अंत में 95.78 के स्तर पर रहा।
रिजर्व बैंक ने क्या किया
रिपोर्टों में बताया गया है कि रिजर्व बैंक ने स्पॉट और डेरिवेटिव दोनों बाजारों में डॉलर की मांग पर अंकुश लगाने के उपाय किए। इनका उद्देश्य अटकलबाजी आधारित डॉलर खरीदारी को घटाना और रुपये में अचानक उतार-चढ़ाव को सीमित करना है। विस्तृत शर्तें और नियम रिजर्व बैंक की अधिसूचना में देखे जा सकते हैं; उपलब्ध रिपोर्टों में केवल सामान्य जानकारी दी गई है, इसलिए हम यहाँ किसी विशिष्ट सीमा या आँकड़े का दावा नहीं कर रहे हैं।
केंद्रीय बैंक आम तौर पर विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर, डेरिवेटिव पोजीशन पर शर्तें लगाकर या विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने वाली योजनाओं के जरिये रुपये को संभालने की कोशिश करता है। ऐसे कदमों का असर अक्सर तुरंत दिखता है, लेकिन स्थायी सुधार के लिए तेल की कीमतों, विदेशी निवेश और व्यापार संतुलन में सुधार भी जरूरी होता है।
रुपया क्यों कमजोर हुआ
पहला कारण कच्चा तेल है। ब्रेंट $100 से ऊपर, यहाँ तक कि 13 अक्टूबर को $106 के पार चल रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महँगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ती है। दूसरा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली है, जो शेयर बेचकर डॉलर में पैसा बाहर ले जाते हैं। तीसरा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊँचा स्तर है, जो पूँजी को अमेरिका की ओर खींचता है। चौथा कारण पश्चिम एशिया का तनाव है, जिसने जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ाई है।
विशेषज्ञों की राय
सितंबर की महँगाई के आँकड़ों पर आई एक रिपोर्ट में आईएसबी के प्रोफेसर प्रसन्ना तांत्री का हवाला दिया गया है, जिन्होंने रिजर्व बैंक की दर वृद्धि का स्वागत किया पर कहा कि केंद्रीय बैंक ने देर से कदम उठाया। उनके अनुसार व्यापक मुद्रा आपूर्ति जीडीपी के लगभग 90% तक पहुँच गई है, जो कोविड के समय जैसा स्तर है, और शून्य वास्तविक ब्याज दर टिकाऊ नहीं है। यह एक विशेषज्ञ की निजी राय है और अन्य विश्लेषक अलग दृष्टिकोण रख सकते हैं।
किसे नुकसान और किसे फायदा
रुपये की कमजोरी से आयातकों, तेल कंपनियों, विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों, विदेश यात्रा करने वालों और विदेशी कर्ज वाली कंपनियों का खर्च बढ़ता है। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य तेल और सोना जैसे आयातित सामान महँगे होते हैं। दूसरी ओर निर्यातकों, आईटी सेवा कंपनियों और विदेश से पैसा भेजने वाले अनिवासी भारतीयों को ज्यादा रुपये मिलते हैं। टीसीएस और एचसीएलटेक जैसी कंपनियों को डॉलर आय में रुपये के लाभ का फायदा मिलता है।
रुपये में एक दिन की 1% मजबूती से आम उपभोक्ता को तुरंत कीमतों में राहत नहीं मिलती, क्योंकि आयात के सौदे पहले से तय दरों पर होते हैं। असली असर तभी दिखेगा जब मजबूती कुछ हफ्तों तक टिकी रहे।
आम लोग और कारोबारी क्या करें
जिन्हें निकट भविष्य में विदेश यात्रा या विदेश में फीस भेजनी है, वे एक साथ पूरी राशि बदलने के बजाय चरणों में विदेशी मुद्रा खरीदने पर विचार कर सकते हैं। आयात-निर्यात करने वाले कारोबारी बैंक से हेजिंग (फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट) के विकल्पों पर सलाह लें ताकि विनिमय दर के जोखिम को सीमित किया जा सके। निवेशक ध्यान रखें कि रुपये की कमजोरी विदेशी निवेशकों की धारणा पर भी असर डालती है।
रुपये की कमजोरी के व्यापक असर
रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा होता है, खासकर कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोना। इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। निर्यातकों को लाभ मिल सकता है, पर कच्चे माल की लागत बढ़ने से उनकी बचत घट भी सकती है। विदेश पढ़ाई और यात्रा का खर्च भी बढ़ता है।
स्थिरता के उपाय
केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार, बाजार हस्तक्षेप और नीतिगत कदमों से अस्थिरता घटाने की कोशिश करता है। आम लोग विदेशी भुगतान की योजना बनाते समय दरों पर नजर रखें और जरूरत हो तो विशेषज्ञ से सलाह लें।
स्रोत: कोटक नियो और इंडियाआईपीओ (13 अक्टूबर 2026), बिजनेस टुडे की सीपीआई रिपोर्ट। रिजर्व बैंक के उपायों का विवरण आधिकारिक अधिसूचना में देखें। यह लेख वित्तीय सलाह नहीं है।


