RBI रेपो रेट बढ़कर 5.50%: PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई बैंकों ने महंगे किए रेपो-लिंक्ड लोन; EMI कितनी बढ़ेगी?
रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25% से 5.50% कर दिया और नीति रुख को “न्यूट्रल” से “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” में बदला। इसके बाद कई बैंकों ने अपनी रेपो-लिंक्ड उधारी दरें बढ़ा दी हैं, जिसका असर होम लोन, पर्सनल लोन और MSME लोन लेने वालों पर पड़ेगा।
किस बैंक ने कितना बढ़ाया?
बिजनेस स्टैंडर्ड और इनशॉर्ट्स की रिपोर्ट के अनुसार: पंजाब नेशनल बैंक की दर 8.10% से 8.35%, बैंक ऑफ इंडिया की 8.10% से 8.35%, बैंक ऑफ बड़ौदा की 7.90% से 8.15%, इंडियन बैंक की 7.95% से 8.20%, इंडियन ओवरसीज बैंक की 8.10% से 8.35%, यूको बैंक की 8.05% से 8.30%, तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक की 8.25% से 8.50% और करूर वैश्य बैंक की 8.55% से 8.80% हुई है। ज्यादातर बैंकों में नई दरें 7-8 अक्टूबर से लागू हैं।
EMI पर कितना असर?
रिपोर्ट के उदाहरण में 20 साल बाकी वाले ₹40 लाख के होम लोन पर ब्याज 8.5% से 8.75% होने पर EMI करीब ₹34,710 से बढ़कर ₹35,340 हो जाती है। यानी लगभग ₹630 प्रति माह या ₹7,560 सालाना अतिरिक्त बोझ। असल असर बैंक के स्प्रेड, रीसेट शेड्यूल और इस पर निर्भर करता है कि बैंक EMI बढ़ाता है या अवधि।
कर्जदारों के लिए सुझाव
फ्लोटिंग रेट वाले मौजूदा कर्जदार अपने बैंक से रीसेट की तारीख और नई दर की जानकारी लें। जरूरत हो तो आंशिक प्री-पेमेंट या बैलेंस ट्रांसफर के विकल्पों की तुलना करें, लेकिन पहले बचने वाले ब्याज और अन्य शुल्क का हिसाब लगा लें। फिक्स्ड रेट वाले कर्जदारों पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा।
यह सामान्य जानकारी है, वित्तीय सलाह नहीं। निर्णय से पहले अपने बैंक या सलाहकार से पुष्टि करें।
रेपो रेट क्या है और यह लोन को कैसे प्रभावित करता है
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ती है और वे इसका बोझ आमतौर पर कर्जदारों पर डालते हैं। जिन लोन की ब्याज दर रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी होती है, उनमें बदलाव अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई देता है। इसी कारण होम लोन, कई पर्सनल लोन और MSME के कुछ कर्ज तत्काल महंगे होते हैं।
7 अक्टूबर 2026 को RBI ने रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.25% से 5.50% किया और नीति रुख को “न्यूट्रल” से “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” किया। इसका अर्थ है कि केंद्रीय बैंक अभी सख्ती के मोड में है और आगे भी दरें बढ़ाने का विकल्प खुला रखता है, पर यह भविष्य के आंकड़ों पर निर्भर रहेगा।
बैंकों की ओर से बदलाव: एक नजर में तालिका
रिपोर्ट के अनुसार पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक की रेपो-लिंक्ड दरें 8.10% से बढ़कर 8.35% हुईं। बैंक ऑफ बड़ौदा की दर 7.90% से 8.15%, इंडियन बैंक की 7.95% से 8.20%, यूको बैंक की 8.05% से 8.30%, तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक की 8.25% से 8.50% और करूर वैश्य बैंक की 8.55% से 8.80% हुई। प्रत्येक बैंक में प्रभावी तारीख अलग है, अधिकतर में 7 से 8 अक्टूबर, जबकि इंडियन बैंक में 1 अक्टूबर बताई गई है। यह बेंचमार्क दर है। ग्राहक को लगने वाली अंतिम दर बैंक के स्प्रेड, क्रेडिट स्कोर और लोन की शर्तों पर निर्भर करती है।
EMI बढ़ेगी या अवधि?
रीसेट होने पर बैंक दो तरीके अपनाते हैं। एक, EMI की रकम बढ़ा देना और दूसरा, EMI वही रखकर कर्ज की अवधि बढ़ा देना। अवधि बढ़ने पर आप कुल ब्याज ज्यादा चुकाते हैं, भले ही मासिक किस्त न बदली हो। रिपोर्ट में दिए उदाहरण के अनुसार 20 साल बाकी वाले ₹40 लाख के कर्ज पर ब्याज 8.5% से 8.75% होने पर EMI करीब ₹34,710 से ₹35,340 हो सकती है, यानी लगभग ₹630 प्रति माह अधिक। यह एक उदाहरण है, आपका वास्तविक असर अलग हो सकता है।
MSME और छोटे कारोबारियों पर असर
जिन व्यापारियों ने कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट या टर्म लोन लिया है और उसकी दर रेपो-लिंक्ड है, उनकी ब्याज लागत बढ़ सकती है। कार्यशील पूंजी पर निर्भर छोटे व्यवसायों में यह अतिरिक्त खर्च मुनाफे के मार्जिन पर असर डालता है। ऐसे में कारोबारी अपने सीए के साथ नकदी प्रवाह की योजना बनाएं और जहां संभव हो, महंगे कर्ज की जगह अपेक्षाकृत सस्ते विकल्प या पुनर्गठन पर बैंक से बात करें।
बचत और जमा पर क्या असर
सामान्यतः रेपो रेट बढ़ने पर बैंक आगे चलकर फिक्स्ड डिपॉजिट की दरें भी बढ़ा सकते हैं। यह तुरंत नहीं होता और हर बैंक का निर्णय अलग होता है। जमाकर्ता अपनी बैंक की नई घोषणाओं पर नजर रखें, पर किसी भी निवेश का निर्णय अपनी जरूरतों और जोखिम के अनुसार लें।
कर्जदारों के लिए व्यावहारिक सुझाव
अपनी लोन स्टेटमेंट मंगाकर वर्तमान ब्याज दर, स्प्रेड और रीसेट की तारीख देखें। यदि बैंक का स्प्रेड बहुत अधिक है तो स्प्रेड घटवाने या बैलेंस ट्रांसफर के लिए दूसरे बैंकों से तुलना करें। जब भी आपके पास अतिरिक्त राशि हो, मूलधन के आंशिक प्री-पेमेंट पर विचार करें, क्योंकि इससे ब्याज में सीधी बचत होती है। सुनिश्चित करें कि क्रेडिट स्कोर अच्छा रहे और EMI समय पर चुकाई जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सभी लोन की ब्याज दर बढ़ेगी? नहीं। केवल फ्लोटिंग रेट वाले और रेपो-लिंक्ड ऋण तुरंत प्रभावित होते हैं। फिक्स्ड रेट वाले ऋणों पर असर नहीं पड़ता।
क्या बैंक बिना बताए दर बदल सकता है? बैंक को ग्राहक को सूचना देनी होती है। अपने मेल और SMS पर आई सूचनाएं ध्यान से पढ़ें।
आगे और बढ़ोतरी होगी? RBI का रुख सख्ती का है, पर आगे का निर्णय महंगाई और विकास के आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
यह जानकारी सामान्य है और वित्तीय सलाह नहीं है। निर्णय से पहले अपने बैंक या प्रमाणित सलाहकार से सलाह लें।
स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड, इनशॉर्ट्स, पैसाबाजार (अक्टूबर 2026)।


