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MSME ODR पोर्टल: 45 दिन में भुगतान न होने पर ऐसे करें ऑनलाइन शिकायत

September 5, 2026 · Prashant Mankar
MSME ODR पोर्टल: 45 दिन में भुगतान न होने पर ऐसे करें ऑनलाइन शिकायत

MSME समाधान (MSME Samadhaan) पोर्टल, MSMED अधिनियम 2006 की धारा 15-24 के तहत सूक्ष्म व लघु उद्यमों (MSE) को समय पर भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए बनाया गया दिल्ली भुगतान निगरानी एवं शिकायत निवारण मंच है। कानून के अनुसार किसी भी खरीदार को माल/सेवा स्वीकार करने के 45 दिन के भीतर MSE आपूर्तिकर्ता को भुगतान करना अनिवार्य है।

मुख्य प्रावधान

पात्रता

आवश्यक दस्तावेज

शिकायत कैसे दर्ज करें

samadhaan.msme.gov.in पोर्टल पर Udyam नंबर से लॉगिन कर खरीदार, चालान राशि व देय तिथि की जानकारी भरकर ऑनलाइन रेफरेंस दर्ज किया जा सकता है। दर्ज होते ही शिकायत संबंधित राज्य के MSEFC के डैशबोर्ड पर दिखने लगती है।

अधिकृत स्रोत

MSME मंत्रालय, भारत सरकार – samadhaan.msme.gov.in

अधिक जानकारी व सेवाओं के लिए संपर्क करें

इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या संबंधित सेवाओं (जैसे आवेदन प्रक्रिया में सहायता, दस्तावेज तैयार करना, पात्रता जांच आदि) के लिए RINSON COMMERCE AND TRADE PRIVATE LIMITED से संपर्क करें।
फोन/मोबाइल: +91 7798186956
ईमेल: rinsonbusiness@gmail.com
वेबसाइट: rinsonbusiness.com

MSME ODR पोर्टल क्या है?

MSME समाधान (Delayed Payment Monitoring System) के तहत MSME ODR (Online Dispute Resolution) पोर्टल छोटे व्यापारियों को उनके खरीदारों से समय पर भुगतान न मिलने की स्थिति में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। MSME विकास अधिनियम, 2006 के अनुसार, किसी भी खरीदार को माल या सेवा प्राप्त करने के 45 दिनों के भीतर पंजीकृत MSME को भुगतान करना अनिवार्य है।

शिकायत कैसे दर्ज करें?

यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं मिलता है, तो पंजीकृत MSME उद्यमी samadhaan.msme.gov.in पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकता है। इसके लिए Udyam पंजीकरण संख्या, खरीदार का विवरण, चालान की प्रति और अन्य संबंधित दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित राज्य के सूक्ष्म व लघु उद्यम सुविधा परिषद (MSEFC) मामले की सुनवाई करती है।

विलंबित भुगतान पर ब्याज का प्रावधान

कानून के अनुसार, यदि खरीदार समय पर भुगतान नहीं करता है, तो उसे बैंक दर से तीन गुना अधिक दर पर चक्रवृद्धि ब्याज (compound interest) सहित भुगतान करना पड़ सकता है। यह प्रावधान छोटे उद्यमियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और उनकी कार्यशील पूंजी (working capital) की समस्या को कम करने के लिए बनाया गया है। हालांकि, कई छोटे व्यापारी बड़े खरीदारों के साथ भविष्य के व्यावसायिक संबंधों के डर से शिकायत दर्ज करने से हिचकिचाते हैं, जो इस व्यवस्था की एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती मानी जाती है।

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