MSME इनोवेटिव स्कीम: इनक्यूबेशन के लिए ₹15 लाख, IPR फाइलिंग पर 75% रीइंबर्समेंट
MSME कॉम्पिटिटिव (LEAN) स्कीम, MSME चैंपियंस कार्यक्रम के तहत चलाई जाने वाली योजना है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों को लीन मैन्युफैक्चरिंग तकनीकें (5S, कायज़ेन, वैल्यू स्ट्रीम मैपिंग आदि) अपनाने में मदद कर उनकी उत्पादकता बढ़ाना और अपव्यय (waste) व लागत घटाना है।
मुख्य लाभ
- लीन कंसल्टेंट की सेवा शुल्क का बड़ा हिस्सा (श्रेणी अनुसार लगभग 80% से 90% तक) सरकार द्वारा वहन, शेष अंश MSME को देना होता है
- इकाइयों को 10-15 यूनिट के मिनी-क्लस्टर में शामिल कर सामूहिक रूप से प्रशिक्षण व मार्गदर्शन
- उत्पादन प्रक्रिया में अपव्यय, समय व लागत में कमी लाकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना
- राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) की देखरेख में गुणवत्तापूर्ण कंसल्टेंसी
पात्रता
- Udyam पोर्टल पर पंजीकृत सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यम
- विनिर्माण गतिविधि में संलग्न इकाइयां प्राथमिकता में
आवेदन कैसे करें
इच्छुक MSME champions.msme.gov.in पोर्टल पर पंजीकरण कर लीन स्कीम के लिए आवेदन कर सकती हैं। मिनी-क्लस्टर बनने के बाद संबंधित लीन कंसल्टेंट द्वारा यूनिट का असेसमेंट कर कार्यान्वयन शुरू किया जाता है।
अधिकृत स्रोत
MSME मंत्रालय, भारत सरकार – champions.msme.gov.in
अधिक जानकारी व सेवाओं के लिए संपर्क करें
इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या संबंधित सेवाओं (जैसे आवेदन प्रक्रिया में सहायता, दस्तावेज तैयार करना, पात्रता जांच आदि) के लिए RINSON COMMERCE AND TRADE PRIVATE LIMITED से संपर्क करें।
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तीन घटकों की विस्तृत जानकारी
यह योजना तीन अलग-अलग घटकों में काम करती है – इनक्यूबेशन के तहत प्रत्येक चुने गए नवोन्मेषी विचार को दो वर्षों में कुल ₹15 लाख तक की सहायता मिलती है (₹5 लाख अनुदान + ₹10 लाख परिवर्तनीय ऋण के रूप में)। IPR घटक के अंतर्गत पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट व डिज़ाइन फाइलिंग शुल्क पर 75% तक की प्रतिपूर्ति मिलती है, जिसकी अधिकतम सीमा घरेलू आवेदन के लिए ₹1 लाख और अंतरराष्ट्रीय आवेदन के लिए ₹5 लाख है। डिज़ाइन घटक में NID अहमदाबाद व IIT बॉम्बे IDC जैसे प्रमुख संस्थानों से उत्पाद व पैकेजिंग डिज़ाइन कंसल्टेंसी पर 50-75% तक सब्सिडी उपलब्ध है। आवेदन प्रक्रिया champions.gov.in पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन है – इनक्यूबेशन के लिए देशभर में उपलब्ध 1,400 से अधिक होस्ट इंस्टीट्यूट में से किसी एक से संपर्क करना होता है, जो प्रस्ताव की समीक्षा कर मंत्रालय को संयुक्त आवेदन भेजता है। IPR के लिए पहले पेटेंट ऑफिस में फाइलिंग करनी होती है, फिर उसकी रसीद champions.gov.in पर 60 दिनों के भीतर प्रतिपूर्ति के लिए जमा करनी होती है। छात्र नवोन्मेषकों, महिला उद्यमियों और SC/ST आवेदकों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक 5 लाख नवोन्मेषी विचारों को सहायता देने का है, और इस योजना में कोई आवेदन शुल्क नहीं लिया जाता।
सफलता के आधार पर आगे की सहायता
इनक्यूबेशन घटक के तहत यदि किसी विचार को पहले वर्ष में संतोषजनक प्रगति मिलती है, तो दूसरे वर्ष की सहायता जारी रखने से पहले होस्ट इंस्टीट्यूट व मंत्रालय द्वारा मध्यावधि समीक्षा की जाती है। जो स्टार्टअप बाद में निवेशकों से फंडिंग जुटाते हैं, उनके लिए ₹10 लाख का परिवर्तनीय ऋण घटक इक्विटी में बदला जा सकता है, जिससे शुरुआती चरण में नकद प्रवाह का दबाव कम रहता है। IPR घटक विशेष रूप से उन MSMEs के लिए उपयोगी है जो अपने उत्पाद की नकल रोकना चाहते हैं या निर्यात बाजार में प्रवेश करने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय पेटेंट फाइलिंग की लागत सामान्यतः बहुत अधिक होती है।


