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MSE-CDP योजना: कॉमन फैसिलिटी सेंटर और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकारी सहायता

September 5, 2026 · Prashant Mankar
MSE-CDP योजना: कॉमन फैसिलिटी सेंटर और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकारी सहायता

माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (MSE-CDP) MSME मंत्रालय की योजना है, जिसका उद्देश्य किसी विशेष क्षेत्र/उत्पाद में केंद्रित MSE समूहों (क्लस्टर) को साझा अवसंरचना उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादकता व प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।

मुख्य घटक व लाभ

पात्रता

आवेदन कैसे करें

क्लस्टर की इकाइयां मिलकर एक SPV बनाती हैं, जो विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के साथ MSME-DI/राज्य सरकार के माध्यम से मंत्रालय को प्रस्ताव भेजती है। मूल्यांकन के बाद परियोजना को चरणबद्ध रूप से मंजूरी व निधि मिलती है।

अधिकृत स्रोत

MSME मंत्रालय, भारत सरकार – dcmsme.gov.in

अधिक जानकारी व सेवाओं के लिए संपर्क करें

इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या संबंधित सेवाओं (जैसे आवेदन प्रक्रिया में सहायता, दस्तावेज तैयार करना, पात्रता जांच आदि) के लिए RINSON COMMERCE AND TRADE PRIVATE LIMITED से संपर्क करें।
फोन/मोबाइल: +91 7798186956
ईमेल: rinsonbusiness@gmail.com
वेबसाइट: rinsonbusiness.com

फंडिंग पैटर्न का विस्तृत विवरण

कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार अधिकतम ₹20 करोड़ की परियोजना लागत का 70% अनुदान देती है; पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों, द्वीप क्षेत्रों, आकांक्षी जिलों/नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तथा जिन क्लस्टरों में 50% से अधिक सूक्ष्म/ग्रामीण, महिला या SC/ST स्वामित्व वाली इकाइयां हैं, वहां यह अनुदान बढ़कर 90% तक हो जाता है (भूमि की लागत अधिकतम 25% तक शामिल की जा सकती है)। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (ID) परियोजनाओं के लिए सामान्यतः 60% अनुदान (औद्योगिक एस्टेट के लिए अधिकतम ₹10 करोड़, फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स के लिए ₹15 करोड़) मिलता है, जो विशेष श्रेणी क्षेत्रों में 80% तक बढ़ जाता है। मार्केटिंग हब/एग्ज़िबिशन सेंटर के लिए गोल्ड-रेटेड प्रोडक्ट-स्पेसिफिक एसोसिएशन को अधिकतम ₹10 करोड़ की परियोजना लागत का 60% अनुदान मिलता है, जबकि महिला उद्यमी एसोसिएशन के लिए यह 80% तक है। पात्र लागतों में भूमि, भवन, मशीनरी, उपकरण, प्रारंभिक खर्च तथा सहायक अवसंरचना शामिल हैं, और मौजूदा क्लस्टरों के उन्नयन प्रस्तावों का मूल्यांकन वास्तविक आवश्यकता के आधार पर किया जाता है।

क्लस्टर बनने की प्रक्रिया

MSE-CDP के तहत क्लस्टर बनाने के लिए पहले किसी विशेष क्षेत्र में समान उत्पाद बनाने वाले न्यूनतम संख्या में इकाइयों की पहचान की जाती है, फिर एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) या इंडस्ट्री एसोसिएशन गठित कर विस्तृत परियोजना प्रस्ताव (DPR) राज्य सरकार व केंद्र सरकार को प्रस्तुत किया जाता है। स्वीकृति मिलने पर परियोजना कई चरणों में लागू होती है – पहले भूमि व भवन, फिर मशीनरी स्थापना, और अंत में परिचालन शुरू होता है। इस योजना से लाभान्वित प्रमुख क्षेत्रों में हथकरघा, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग व टेक्सटाइल क्लस्टर शामिल हैं, जिनमें साझा बुनियादी सुविधाओं के कारण व्यक्तिगत इकाइयों की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।

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