कोराडी महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर में शारदीय नवरात्र शुरू: 7,500 दीप प्रज्वलित, भक्तों की भारी भीड़
नागपुर के पास कोराडी स्थित श्री महालक्ष्मी जगदंबा माता मंदिर में 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र उत्सव की शुरुआत हुई। पहले ही दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे और मंदिर परिसर में 7,500 पवित्र दीप प्रज्वलित किए गए।
कोराडी मंदिर का महत्व
कोराडी का यह मंदिर विदर्भ के प्रमुख देवी स्थानों में गिना जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में यहां नागपुर, आसपास के जिलों और राज्य के अन्य हिस्सों से भी श्रद्धालु आते हैं। उत्सव के दौरान मंदिर में विशेष पूजा, आरती और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था
त्योहार के दिनों में भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन आमतौर पर दर्शन कतार, पार्किंग और सुरक्षा की व्यवस्था करते हैं। भक्तों से अपील है कि वे प्रबंधन के निर्देशों का पालन करें और कतार में धैर्य रखें।
दशहरा की तैयारी
इस वर्ष विजयादशमी 20 अक्टूबर को है। नागपुर में इसी दिन रेशिमबाग मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव भी होना है, इसलिए शहर में नवरात्र से दशहरा तक धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का माहौल रहेगा।
कोराडी देवी मंदिर: परिचय और परंपरा
नागपुर शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर कोराडी में स्थित श्री महालक्ष्मी जगदंबा माता मंदिर विदर्भ के प्रमुख शक्तिपीठ जैसे श्रद्धा स्थलों में गिना जाता है। हर वर्ष शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। नवरात्र की शुरुआत में घटस्थापना होती है और रोज अलग-अलग पूजा, आरती और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
नागपुर टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष उत्सव की शुरुआत 11 अक्टूबर को हुई और मंदिर परिसर में 7,500 पवित्र दीप प्रज्वलित किए गए। दीप प्रज्वलन नवरात्र की सबसे आकर्षक परंपराओं में से एक है, क्योंकि शाम को जब हजारों दीप एक साथ जलते हैं तो पूरा परिसर रोशनी से भर जाता है और श्रद्धालु इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में जुटते हैं।
नवरात्र के नौ दिन: मान्यताएं
नवरात्र में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि पहले तीन दिन शक्ति, अगले तीन दिन धन और ऐश्वर्य की देवी और अंतिम तीन दिन ज्ञान की देवी की आराधना के होते हैं। कई श्रद्धालु इन दिनों व्रत रखते हैं, सात्विक भोजन करते हैं और रोज मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं। महाराष्ट्र में घटस्थापना, अखंड दीप और दशहरे पर सीमोल्लंघन की परंपराएं विशेष रूप से प्रचलित हैं।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुझाव
नवरात्र के पहले दिन, अष्टमी और नवमी को भीड़ सबसे ज्यादा रहती है। इसलिए दर्शन के लिए सुबह जल्दी या सप्ताह के बीच के दिनों का समय चुनना बेहतर रहता है। बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को साथ ले जाते समय कतार, पीने के पानी और बैठने की जगह की जानकारी पहले से कर लें। कीमती सामान और नकदी भीड़ में सुरक्षित रखें और अनजान लोगों पर भरोसा न करें। पार्किंग के लिए तय स्थानों का ही उपयोग करें और मंदिर प्रबंधन, पुलिस व स्वयंसेवकों के निर्देश मानें।
यातायात की दृष्टि से नागपुर-कोराडी मार्ग पर त्योहारों में वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। अगर संभव हो तो निजी वाहन के बजाय सार्वजनिक परिवहन या साझा वाहन का उपयोग करें। शाम की आरती के समय सबसे अधिक भीड़ होती है, इसलिए उस समय पहुंचने से पहले पर्याप्त समय रखें।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
त्योहारों के दिनों में मंदिर के आसपास फूल, पूजन सामग्री, प्रसाद, खिलौने और खाने-पीने की अस्थायी दुकानों से सैकड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी होती है। नवरात्र का सीजन छोटे व्यवसायियों के लिए अच्छी कमाई का मौका होता है। इस साल सूखे के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आय पर दबाव है, फिर भी त्योहार की खरीदारी से बाजार में कुछ रौनक की उम्मीद रहती है। छोटे विक्रेता कचरा प्रबंधन और स्वच्छता का भी ध्यान रखें, ताकि मेला क्षेत्र साफ रहे।
आगे के कार्यक्रम
नवरात्र का समापन विजयादशमी, यानी 20 अक्टूबर को होगा। उसी दिन नागपुर में रेशिमबाग मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव भी है। इसलिए 20 अक्टूबर को शहर में कई जगह भीड़ और यातायात परिवर्तन हो सकते हैं। श्रद्धालु आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान रखें और किसी अफवाह पर विश्वास न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मंदिर में विशेष व्यवस्था रहती है? नवरात्र में दर्शन की कतार, सुरक्षा और स्वच्छता की व्यवस्था की जाती है। विस्तृत जानकारी मंदिर प्रबंधन से ही लें।
दीप प्रज्वलन में कौन शामिल हो सकता है? यह कार्यक्रम मंदिर प्रबंधन की ओर से तय प्रक्रिया से होता है। भाग लेने की इच्छा हो तो प्रबंधन से पूछताछ करें।
सबसे अच्छा समय कौन सा है? सुबह का समय अपेक्षाकृत शांत रहता है। अष्टमी, नवमी और शाम की आरती के समय भीड़ अधिक होती है।
स्रोत: नागपुर टुडे (12 अक्टूबर 2026)।


