Home / Business News
Business News

ITR Audit Due Date 31 अक्टूबर 2026: किन करदाताओं पर लागू, अभी से क्या तैयारी करें

October 4, 2026 · Prashant Mankar
ITR Audit Due Date 31 अक्टूबर 2026: किन करदाताओं पर लागू, अभी से क्या तैयारी करें

ITR Audit Due Date 31 October 2026: जिन करदाताओं के खातों का ऑडिट आयकर कानून के तहत जरूरी है, उनके लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। अपस्टॉक्स की सूची में स्पष्ट किया गया है कि यह तारीख हर उस करदाता पर लागू नहीं होती जिसकी आय व्यवसाय या पेशे से है। इसलिए पहले यह जाँचना जरूरी है कि आपका मामला ऑडिट की श्रेणी में आता है या नहीं।

31 अक्टूबर की समय-सीमा किन पर लागू होती है

आम वेतनभोगी करदाताओं और बिना ऑडिट वाले व्यवसायियों के लिए रिटर्न की सामान्य अंतिम तारीख अलग होती है। 31 अक्टूबर की तारीख उन करदाताओं के लिए है जिनके खाते कानून के अनुसार कर ऑडिट के दायरे में आते हैं, यानी जिनका कारोबार या पेशा निर्धारित सीमा से ऊपर है या जिन्होंने विशेष योजनाओं में तय शर्तों का पालन नहीं किया है। कौन-सी सीमा लागू होती है, यह आपके कारोबार के प्रकार, कारोबार की राशि और नकद लेन-देन के अनुपात जैसी बातों पर निर्भर करता है, इसलिए अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से पुष्टि कर लें।

ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं को केवल रिटर्न ही नहीं, बल्कि ऑडिट रिपोर्ट भी निर्धारित तारीख तक ऑनलाइन दाखिल करनी होती है। अगर समय पर ऑडिट रिपोर्ट अपलोड नहीं होती तो रिटर्न भी विलंबित माना जा सकता है और जुर्माने तथा ब्याज की स्थिति बन सकती है। इसलिए कारोबारियों को अपनी बही-खाता और खातों का बंद होना समय रहते पूरा करना चाहिए।

अभी से शुरू करें ये तैयारियाँ

पहला कदम है सभी बैंक खातों के स्टेटमेंट, बिक्री और खरीद के बिल, खर्चों की रसीदें, ऋण के दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागज एक जगह इकट्ठा करना। दूसरा, GST रिटर्न में दर्शाए गए आँकड़ों और बही-खाते की बिक्री का मिलान करना, क्योंकि अंतर होने पर नोटिस आ सकता है। तीसरा, TDS काटे गए और जमा किए गए कर का मिलान फॉर्म 26AS और वार्षिक सूचना विवरण (AIS) से करना ताकि कोई क्रेडिट छूट न जाए।

चौथा, मूल्यह्रास (डेप्रिसिएशन), अग्रिम कर और स्व-मूल्यांकन कर की गणना जाँच लें। पाँचवाँ, पिछले साल की रिटर्न की प्रतिलिपि रखें और यदि कोई आय का नया स्रोत है, जैसे किराया, ब्याज या शेयर बाजार से लाभ, तो उसका भी पूरा ब्यौरा तैयार रखें। यह तैयारी जितनी जल्दी होगी, अंतिम दिनों की भागदौड़ और पोर्टल की धीमी गति से उतनी ही राहत मिलेगी।

देरी करने के नुकसान

समय सीमा के बाद रिटर्न भरने पर विलंब शुल्क, कर बकाया पर ब्याज और कुछ कटौतियों तथा हानि को आगे ले जाने की सुविधा का नुकसान हो सकता है। हर मामले में नियम अलग हैं, इसलिए सटीक राशि और शर्तें आयकर विभाग की वेबसाइट या अपने सलाहकार से जाँचें। यह भी ध्यान रखें कि गलत जानकारी देने या आय छिपाने पर कड़े दंड का प्रावधान है।

अंतिम दिनों में आयकर पोर्टल पर भारी ट्रैफिक होता है, जिससे लॉगिन, अपलोड और सत्यापन में दिक्कत आ सकती है। इसलिए अक्टूबर के पहले-दूसरे सप्ताह में ही सारा काम पूरा करने का लक्ष्य रखें। ई-सत्यापन (आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या डिमैट खाते से) रिटर्न दाखिल करने के बाद निर्धारित समय में पूरा करना भी जरूरी है, वरना रिटर्न अमान्य माना जा सकता है।

डिजिटल रिकॉर्ड और अनुपालन के सुझाव

छोटे और मध्यम कारोबारी रोजाना की बिक्री और खर्च को किसी अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर या कम से कम एक्सेल शीट में दर्ज करने की आदत डालें। इससे वर्ष के अंत में खाते बंद करने का काम आसान हो जाता है। नकद लेन-देन को सीमित रखना और भुगतान डिजिटल माध्यम से करना भी भविष्य के कर निर्धारण में सहायक होता है, क्योंकि बैंक रिकॉर्ड प्रमाण के रूप में काम करते हैं।

यदि आप अपना पहला रिटर्न दाखिल कर रहे हैं या कारोबार नया है, तो पंजीकृत चार्टर्ड अकाउंटेंट या कर पेशेवर की मदद लें। सही सलाह से अनजाने में होने वाली गलतियाँ और भविष्य के नोटिस टाले जा सकते हैं। कर बचत के लिए केवल कानूनी रास्ते अपनाएँ और अधिकृत निवेश व कटौतियों का ही उपयोग करें।

वेतनभोगियों और अन्य करदाताओं के लिए

जिन करदाताओं का ऑडिट नहीं होता, उन्हें भी रिटर्न की तारीख और आवश्यक दस्तावेज (फॉर्म 16, बैंक ब्याज प्रमाणपत्र, निवेश प्रमाण) की जानकारी रखनी चाहिए। अपने AIS और 26AS में दर्ज आय का मिलान कर लेना हमेशा बेहतर रहता है ताकि विभाग की सूचना से आपके दावे का अंतर न रहे। पुरानी या नई कर व्यवस्था में से अपने लिए लाभकारी विकल्प का चयन अपनी आय और कटौतियों के आधार पर करें।

आम गलतियाँ जिनसे बचना चाहिए

सबसे आम गलती यह है कि करदाता केवल बैंक खाते की जमा राशि को आय मान लेते हैं या फिर कुछ आय, जैसे बैंक ब्याज, किराया या शेयर बाजार का लाभ, घोषित करना भूल जाते हैं। इसके अलावा TDS क्रेडिट का मिलान न करना, मूल्यह्रास की गलत गणना, और अग्रिम कर समय पर जमा न करना भी आम समस्याएँ हैं। इन सभी से बचने के लिए खाते बंद करने के बाद एक बार स्वतंत्र समीक्षा करवा लेना उपयोगी रहता है।

एक और महत्वपूर्ण बिंदु है बैंक खाते और मोबाइल नंबर का अपडेट रहना। रिफंड तभी जल्दी आता है जब बैंक खाता पूर्व-सत्यापित हो और PAN-आधार लिंक हो। अगर आपका PAN निष्क्रिय है तो रिटर्न और रिफंड में बाधा आ सकती है, इसलिए यह जाँच अभी कर लें। यदि आपने पिछले वर्ष के किसी नोटिस का जवाब देना है, तो उसे भी इसी समय निपटा लें ताकि नए रिटर्न के साथ विवाद न जुड़े।

अंत में, अपने सभी दस्तावेज कम से कम छह से सात साल तक सुरक्षित रखें, क्योंकि आयकर विभाग पुराने वर्षों के मामलों की भी जाँच कर सकता है। डिजिटल प्रतियाँ क्लाउड या सुरक्षित ड्राइव में रखना सबसे सुविधाजनक तरीका है।

स्रोत: अपस्टॉक्स की अक्टूबर 2026 वित्तीय बदलाव रिपोर्ट। तारीख और शर्तें आयकर विभाग की अधिसूचना पर निर्भर करती हैं। यह लेख कर सलाह नहीं है; अपने कर सलाहकार से परामर्श लें।

📲
रोजच्या सरकारी योजना व बिझनेस अपडेट्स मोफत मिळवा!
आमच्या "उद्योग मार्गदर्शन" WhatsApp चॅनेलला जॉईन करा
चॅनेल जॉईन करा
MIDC Industrial Plot Complete Guide E-Book Mahilansathi Pramukh Sarkari Yojana E-Book