Home Loan EMI Increase After RBI Hike: ₹30 लाख के कर्ज पर ₹460 महीना महँगा, कई बैंकों ने बढ़ाईं दरें
Home Loan EMI Increase After RBI Rate Hike: रिजर्व बैंक के रेपो दर को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% करने के बाद सबसे बड़ा सवाल आम कर्जदारों का यही है कि उनकी ईएमआई कितनी बढ़ेगी। फ्री प्रेस जर्नल की गणना के अनुसार अगर बैंक पूरी 25 आधार अंकों की वृद्धि ग्राहकों पर डाल दें, तो 20 साल के होम लोन पर ईएमआई में कई सौ रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।
₹20 लाख, ₹30 लाख और ₹50 लाख के होम लोन पर असर
गणना इस धारणा पर है कि वर्तमान ब्याज दर 7.50% है, बाकी अवधि 20 साल (240 किस्तें) है और दर बढ़कर 7.75% हो जाती है। इस स्थिति में ₹20 लाख के कर्ज की ईएमआई लगभग ₹16,112 से बढ़कर ₹16,419 होगी, यानी हर महीने करीब ₹307 अधिक। ₹30 लाख के कर्ज की ईएमआई लगभग ₹24,168 से ₹24,628 होगी, यानी करीब ₹460 की वृद्धि। जबकि ₹50 लाख के कर्ज पर ईएमआई लगभग ₹40,280 से ₹41,047 हो जाएगी, यानी करीब ₹767 अधिक।
यानी हर ₹10 लाख के कर्ज पर मोटे तौर पर ₹150 से ₹155 की मासिक वृद्धि बैठती है। यह सरल गणना है और असली असर बैंक की नीति, आपके कर्ज के बेंचमार्क, मार्जिन और बची हुई अवधि पर निर्भर करेगा। कई बार बैंक ईएमआई स्थिर रखकर कर्ज की अवधि बढ़ा देते हैं, जिससे कुल ब्याज बोझ बढ़ता है।
किन बैंकों ने दरें बढ़ाईं
फ्री प्रेस जर्नल की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार कई सरकारी बैंकों ने 8 अक्टूबर से अपनी रेपो-आधारित ऋण दरें बढ़ाई हैं। पंजाब नेशनल बैंक की रेपो लिंक्ड ऋण दर (RLLR, 0.35% बीएसपी सहित) 8.10% से बढ़कर 8.35% हो गई। इंडियन बैंक की RBLR 7.95% से 8.20%, बैंक ऑफ बड़ौदा की रेपो आधारित ऋण दर 7.90% से 8.15% हुई। बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक की RBLR 8.35% बताई गई है, जबकि तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक की RLLR 8.25% से 8.5% हुई।
यानी बैंकों ने पूरी 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी ग्राहकों तक पहुँचा दी। रिपोर्ट के अनुसार पीएनबी के मामले में MCLR और बेस रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए जो ऋण रेपो-लिंक्ड दर पर हैं, उनकी दर पहले बढ़ेगी, जबकि MCLR आधारित ऋणों में बदलाव उनके रीसेट के समय दिखेगा।
रेपो-लिंक्ड बनाम MCLR ऋण: फर्क समझें
2019 के बाद नए फ्लोटिंग रेट ऋण बाहरी बेंचमार्क, जैसे रेपो दर, से जुड़े होते हैं, इसलिए नीति दर बदलते ही उनकी ब्याज दर में बदलाव जल्दी दिखता है। पुराने ऋण, जो MCLR या बेस रेट से जुड़े हैं, में बदलाव बैंक के रीसेट चक्र (आमतौर पर छह महीने या साल में एक बार) के अनुसार होता है। अपने ऋण का बेंचमार्क और रीसेट तारीख जानने के लिए बैंक का स्वीकृति पत्र या ऋण खाता विवरण देखें।
ईएमआई का बोझ कम करने के उपाय
पहला उपाय है कर्ज का आंशिक पूर्व-भुगतान, यानी बोनस, बचत या अन्य अतिरिक्त आय से मूलधन का एक हिस्सा चुका देना। इससे बाकी कर्ज पर ब्याज घटता है। दूसरा, ईएमआई की रकम बढ़ाकर अवधि बनाए रखना या घटाना, क्योंकि अवधि बढ़ने से कुल ब्याज काफी बढ़ जाता है। तीसरा, अपने बैंक से ब्याज दर कम करने की बातचीत करना, खासकर अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है।
चौथा, किसी दूसरे बैंक में कर्ज स्थानांतरित (बैलेंस ट्रांसफर) करने पर विचार करना, लेकिन उससे पहले प्रोसेसिंग शुल्क, कानूनी खर्च और दर के अंतर की तुलना जरूर करें। पाँचवाँ, ब्याज दरों की अगली दिशा को देखते हुए आपातकालीन निधि बनाए रखना ताकि ईएमआई चूकने की नौबत न आए। क्रेडिट स्कोर की सुरक्षा के लिए समय पर भुगतान सबसे जरूरी है।
नए कर्ज लेने वालों के लिए
जो लोग घर या वाहन के लिए नया कर्ज लेने की योजना बना रहे हैं, वे फिक्स्ड और फ्लोटिंग दर के विकल्प की तुलना करें। चूँकि रिजर्व बैंक का रुख अब सख्ती की ओर है, इसलिए भविष्य में और दर वृद्धि की संभावना को ध्यान में रखकर बजट बनाएँ। कर्ज की राशि इतनी रखें कि ईएमआई आपकी मासिक आय के एक सुरक्षित हिस्से (आम तौर पर 40% से कम) के भीतर रहे।
ईएमआई का बोझ कैसे संभालें
होम लोन की दर बढ़ने पर कर्जदार के पास कई विकल्प होते हैं: ईएमआई बढ़ाना, कर्ज की अवधि बढ़ाना या आंशिक पूर्व-भुगतान करके मूलधन घटाना। अवधि बढ़ाने से मासिक बोझ कम रहता है, लेकिन कुल ब्याज अधिक चुकाना पड़ता है। इसलिए जब भी संभव हो, बोनस या अतिरिक्त आय का कुछ हिस्सा पूर्व-भुगतान में लगाना फायदेमंद माना जाता है।
बेहतर दर के लिए क्या करें
अपने बैंक से दर में कमी या बैलेंस ट्रांसफर के विकल्प के बारे में पूछें और अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना करें। अच्छा क्रेडिट स्कोर बेहतर शर्तें दिला सकता है। ट्रांसफर से पहले प्रोसेसिंग शुल्क और अन्य खर्चों का हिसाब जरूर लगाएं ताकि वास्तविक बचत का अंदाजा मिल सके।
स्रोत: फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्टें (7-8 अक्टूबर 2026)। ईएमआई के आँकड़े उदाहरण-आधारित गणना हैं; वास्तविक आँकड़े आपके बैंक और ऋण की शर्तों पर निर्भर करेंगे। यह लेख वित्तीय सलाह नहीं है।


