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Gold Silver Rate Today 2 October 2026: सोना ₹1,50,540 और चांदी ₹2,26,570 पर स्थिर, जानें कारण

October 2, 2026 · Prashant Mankar
Gold Silver Rate Today 2 October 2026: सोना ₹1,50,540 और चांदी ₹2,26,570 पर स्थिर, जानें कारण

Gold Silver Rate Today 2 October 2026: गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को शेयर बाजार में अवकाश रहा, लेकिन सोने-चांदी की कीमतों पर निवेशकों और खरीदारों की नजर बनी रही। स्टार्टअपटॉल्की के आँकड़ों के अनुसार 2 अक्टूबर को 24 कैरेट सोना लगभग ₹1,50,540 प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2,26,570 प्रति किलो के भाव पर लगभग स्थिर रही। एक दिन पहले, 1 अक्टूबर को सोना ₹1,50,350 और चांदी ₹2,25,940 पर थी।

सोने-चांदी की कीमतें: हाल का रुझान

आँकड़ों को लंबी अवधि में देखें तो तस्वीर दिलचस्प है। 8 अक्टूबर के आँकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोना एक साल पहले (8 अक्टूबर 2025) के ₹1,23,430 की तुलना में करीब 21.11% महँगा है, जबकि चांदी ₹1,50,100 प्रति किलो से बढ़कर लगभग ₹2,21,100 पर पहुँच चुकी है, यानी करीब 47.30% की बढ़त। लेकिन एक महीने पहले (8 सितंबर) के भाव की तुलना में सोना लगभग 2.40% और चांदी करीब 7.54% सस्ती हुई है। यानी सालाना तेजी के बीच पिछले एक महीने में थोड़ा सुधार दिखा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स सोना लगभग $4,156 प्रति औंस और चांदी करीब $59 प्रति औंस के आसपास कारोबार करती दिखी। घरेलू बाजार में भाव अंतरराष्ट्रीय कीमत, रुपये की विनिमय दर और आयात शुल्क जैसे कारकों से तय होते हैं। चूँकि रुपया लगभग 96 प्रति डॉलर के आसपास है, इसलिए वैश्विक कीमत स्थिर रहने पर भी भारत में सोना महँगा बना रहता है।

कीमतें किन वजहों से घटती-बढ़ती हैं

सोने की कीमत पर सबसे बड़ा असर अमेरिकी ब्याज दर और डॉलर का पड़ता है। जब अमेरिका में ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड बढ़ती हैं तो सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्ति कम आकर्षक हो जाती है और कीमतों पर दबाव आता है। इसके उलट, भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध या तेल आपूर्ति में बाधा की स्थिति में निवेशक सुरक्षित ठिकाने के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और ऊँचा कच्चा तेल फिलहाल इसी तरह के कारक हैं।

चांदी की चाल इसके दोहरे स्वभाव की वजह से ज्यादा तेज होती है। यह निवेश की धातु भी है और सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे औद्योगिक इस्तेमाल में भी काम आती है। इसलिए औद्योगिक मांग, वैश्विक वृद्धि की उम्मीद और डॉलर की मजबूती से चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखता है। यही वजह है कि एक साल में चांदी की बढ़त सोने से कहीं ज्यादा रही, पर हाल के हफ्तों में उसमें गिरावट भी ज्यादा तेज दिखी।

खरीदारी से पहले ध्यान रखने योग्य बातें

आभूषण खरीदते समय सिर्फ भाव नहीं, बल्कि शुद्धता भी जाँचें। 24 कैरेट सोना लगभग 99.9% शुद्ध माना जाता है, जबकि गहनों में आम तौर पर 22 कैरेट सोने का उपयोग होता है, जिसका भाव 24 कैरेट से कम होता है। 8 अक्टूबर के आँकड़ों के अनुसार 22 कैरेट सोना करीब ₹1,37,023 प्रति 10 ग्राम था। हमेशा BIS हॉलमार्क वाले आभूषण लें और बिल में सोने का वजन, शुद्धता, दर, मेकिंग चार्ज और जीएसटी अलग-अलग लिखवाएँ।

सोने पर जीएसटी की दर लागू होती है और मेकिंग चार्ज आभूषण की बनावट के अनुसार अलग-अलग होता है, इसलिए एक ही वजन के दो आभूषणों की अंतिम कीमत में काफी अंतर हो सकता है। अलग-अलग ज्वेलर्स से दाम की तुलना करें और पुराने सोने के आदान-प्रदान की शर्तें पहले स्पष्ट कर लें। शहरों के बीच भी स्थानीय करों, परिवहन और ज्वेलर्स के मार्जिन के कारण थोड़ा अंतर रह सकता है।

निवेश की दृष्टि से क्या विकल्प हैं

जो लोग भौतिक सोना नहीं रखना चाहते, उनके लिए गोल्ड ईटीएफ और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें भंडारण और शुद्धता की चिंता नहीं रहती। निवेश से पहले शुल्क, कर नियम और तरलता की जाँच जरूरी है। विशेषज्ञ आम तौर पर सलाह देते हैं कि कुल पोर्टफोलियो का एक सीमित हिस्सा, अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार, सोने में रखें और एक साथ बड़ी राशि लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करें। मिराए एसेट ने 4,030-4,225 डॉलर की निकट अवधि की सीमा का अनुमान जताया है, पर ऐसे अनुमान बदल सकते हैं।

त्योहारी और शादी के मौसम से ठीक पहले मांग बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में प्रीमियम और छूट की स्थिति भी बदल सकती है। इसलिए जिन परिवारों को निकट भविष्य में गहने खरीदने हैं, वे अग्रिम बुकिंग या गोल्ड सेविंग स्कीम जैसी सुविधाओं की शर्तें ध्यान से पढ़ें और केवल विश्वसनीय एवं पंजीकृत ज्वेलर्स से ही लेन-देन करें।

रुपये की कमजोरी का सोने की कीमत पर असर

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना आयात करता है, इसलिए रुपये की हर गिरावट सीधे घरेलू कीमतों में दिखती है। मान लीजिए अंतरराष्ट्रीय भाव स्थिर रहे, तब भी रुपया 95 से 96 पर जाने से हर औंस सोने का रुपये में मूल्य बढ़ जाता है। इसी वजह से पिछले एक साल में सोने की 21% से अधिक बढ़त में डॉलर के भाव के साथ-साथ रुपये की कमजोरी का भी योगदान माना जाता है। जिन परिवारों की बचत रुपये में है, उनके लिए सोना कुछ हद तक मुद्रा-जोखिम से बचाव का काम करता है।

दूसरी ओर, ऊँची कीमत पर मांग घटने की भी संभावना रहती है। जब भाव ऐतिहासिक स्तर के आसपास हों तो कई खरीदार हल्के वजन के आभूषण या सिक्कों की ओर मुड़ जाते हैं। इसलिए अगर आप शादी या त्योहार के लिए खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो पूरे बजट को एक ही बार में खर्च करने के बजाय चरणों में खरीदना और भाव में उतार-चढ़ाव पर नजर रखना व्यावहारिक रणनीति हो सकती है।

अंत में यह भी याद रखें कि यहाँ दिए गए भाव मार्गदर्शक हैं। अंतिम कीमत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और स्थानीय ज्वेलर की नीति के अनुसार बदलती है, इसलिए खरीद से ठीक पहले ताजा दर जरूर पूछ लें।

स्रोत: स्टार्टअपटॉल्की के 1, 2 और 8 अक्टूबर 2026 के सोना-चांदी आँकड़े। भाव समय के साथ बदलते रहते हैं और शहर तथा ज्वेलर के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। यह निवेश सलाह नहीं है।

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