गडचिरोली: चामोर्शी में प्रस्तावित हवाई अड्डा और MIDC के विरोध में सड़क रोको; जिले के सिर्फ 2 तालुके सूखा सूची में
टीवी9 मराठी के 16 अक्टूबर के लाइव ब्लॉग के अनुसार गडचिरोली के चामोर्शी क्षेत्र में प्रस्तावित हवाई अड्डे और MIDC औद्योगिक क्षेत्र के विरोध में स्थानीय लोगों ने सड़क अवरुद्ध की। ग्रामीणों के अनुसार वे इस प्रस्ताव का छह महीने से विरोध कर रहे हैं।
सूखा सूची में गडचिरोली
उसी ब्लॉग में बताया गया कि गडचिरोली जिले के सिर्फ दो तालुके सूखाग्रस्त सूची में हैं। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने मांग की कि केंद्र की मदद का इंतजार किए बिना पूरे जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। 14 अक्टूबर को राज्य सरकार ने 305 तालुकों में सूखा घोषित किया है।
विकास बनाम विस्थापन की बहस
गडचिरोली में खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के साथ-साथ भूमि अधिग्रहण, रोजगार और पर्यावरण पर बहस चलती रहती है। ऐसे प्रस्तावों पर ग्रामीण मुआवजा, पुनर्वास और स्थानीय रोजगार की गारंटी मांगते हैं। प्रशासन को परियोजना की जानकारी पारदर्शी रूप से साझा करनी होगी।
आगे क्या?
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत और सरकार की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।
चामोर्शी में प्रस्तावित परियोजना और ग्रामीणों का विरोध
टीवी9 मराठी के 16 अक्टूबर के लाइव ब्लॉग के अनुसार गडचिरोली के चामोर्शी क्षेत्र में प्रस्तावित हवाई अड्डे और MIDC औद्योगिक क्षेत्र के विरोध में स्थानीय लोगों ने सड़क जाम की। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस प्रस्ताव का पिछले छह महीने से विरोध कर रहे हैं। इससे पहले भी इस तरह की परियोजनाओं पर भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास को लेकर चिंता जताई जाती रही है। रिपोर्ट में परियोजना के विस्तृत ब्योरे, भूमि के क्षेत्रफल और संबंधित गांवों का उल्लेख नहीं है।
गडचिरोली में औद्योगिक विकास की स्थिति
गडचिरोली को राज्य सरकार लौह अयस्क और स्टील उद्योग के केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश करती रही है। सुरजागढ़ जैसे खनन क्षेत्रों और संबंधित उद्योगों से रोजगार और निवेश की उम्मीद जताई जाती है। साथ ही आदिवासी बहुल इलाके में वन अधिकार, ग्राम सभा की सहमति और पर्यावरण पर प्रभाव जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में किसी भी नई परियोजना के लिए पारदर्शी सार्वजनिक सुनवाई जरूरी होती है।
भूमि अधिग्रहण में ग्रामीणों के अधिकार
भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम के तहत प्रभावित परिवारों को मुआवजा, पुनर्वास और सामाजिक प्रभाव आकलन जैसी सुरक्षाएं मिलती हैं। अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार अधिनियम (पेसा) के तहत ग्राम सभा की भूमिका महत्वपूर्ण है। ग्रामीण अपने ग्राम सभा के प्रस्ताव, 7/12 उतारे और भूमि से जुड़े अधिकारों की जानकारी सुरक्षित रखें और आवश्यक होने पर कानूनी सलाह लें।
सूखा सूची में जिले की स्थिति
उसी ब्लॉग में कहा गया कि गडचिरोली जिले के केवल दो तालुके सूखाग्रस्त सूची में हैं। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने केंद्र की मदद का इंतजार किए बिना पूरे जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की। राज्य सरकार ने 14 अक्टूबर को 305 तालुकों में सूखा घोषित किया है। जिले के किसान अपने तालुके की स्थिति तहसील कार्यालय से जानकर फसल नुकसान की सूचना दें।
किसानों पर दोहरी मार
गडचिरोली के चुरचुरा क्षेत्र में जंगली हाथियों ने धान की फसल रौंदी है। इसका मतलब किसानों को सूखे और वन्यजीव दोनों से नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसलिए जिले में राहत की मांग तेज हो सकती है।
प्रशासन से अपेक्षाएं
प्रशासन को परियोजना की जानकारी सरल भाषा में सार्वजनिक करनी चाहिए, ग्राम सभा में चर्चा करानी चाहिए, मुआवजे और रोजगार की स्पष्ट योजना बतानी चाहिए और ग्रामीणों की आपत्तियां दर्ज कर उनका जवाब देना चाहिए। पारदर्शिता से विश्वास बनता है और विवाद कम होते हैं।
सड़क रोकने का आम नागरिकों पर असर
सड़क जाम से यात्रियों, एम्बुलेंस और आवश्यक सेवाओं को परेशानी होती है। ऐसे आंदोलनों में शांतिपूर्ण तरीके अपनाना और आपातकालीन वाहनों को रास्ता देना सभी की जिम्मेदारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कहां का मामला है? गडचिरोली जिले का चामोर्शी क्षेत्र।
विरोध किसका है? प्रस्तावित हवाई अड्डे और MIDC औद्योगिक क्षेत्र का।
सरकार की ओर से क्या कहा गया? रिपोर्ट में आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।
स्रोत: टीवी9 मराठी लाइव ब्लॉग (16 अक्टूबर 2026)।


