DDU-GKY 2.0: ग्रामीण युवाओं के लिए बड़ी स्किल ट्रेनिंग योजना, अक्टूबर से 14 राज्यों में शुरुआत
DDU-GKY 2.0 क्या है?
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ऐलान किया है कि दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के नए और अपग्रेडेड वर्जन — DDU-GKY 2.0 — के तहत अक्टूबर 2026 से देश के ज्यादातर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए ट्रेनिंग बैच शुरू होने जा रहे हैं। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका मकसद गरीब ग्रामीण परिवारों के युवाओं को प्लेसमेंट-लिंक्ड स्किल ट्रेनिंग देना है, ताकि उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। ट्रेनिंग की अवधि उम्मीदवार के चुने गए कोर्स के आधार पर 3 महीने से लेकर 12 महीने तक हो सकती है।
पहले चरण में किन राज्यों से होगी शुरुआत?
मंत्रालय की योजना के मुताबिक, पहले चरण में 14 राज्यों/जिलों में नए बैच शुरू किए जाएंगे, जिनमें ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पुडुचेरी, कर्नाटक, तेलंगाना और बिहार शामिल हैं। हालांकि योजना का दायरा इससे कहीं बड़ा है — कुल 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अलग-अलग टारगेट आवंटित किए गए हैं, यानी आने वाले महीनों में लगभग पूरा देश इस योजना के दायरे में आ जाएगा।
कितने युवाओं को मिलेगा फायदा?
आंकड़ों के हिसाब से देखें तो अक्टूबर 2026 में शुरू होने वाले पहले राउंड में 1,164 ट्रेनिंग बैचेज के जरिए करीब 34,920 ग्रामीण युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी। लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है — मंत्रालय ने 2026 से 2028 के बीच इन्हीं 14 राज्यों में कुल 3,57,112 ग्रामीण युवाओं को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है। पूरे देश के स्तर पर देखा जाए तो अब तक 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 1,200 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स को 5.6 लाख से अधिक ट्रेनिंग टारगेट पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं।
टाइमलाइन और डेडलाइन
योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए मंत्रालय ने सख्त समयसीमा तय की है। सभी राज्यों को 31 अक्टूबर 2026 तक अपने-अपने हिस्से के टारगेट प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटिंग एजेंसियों (PIAs) को आवंटित करने होंगे, तभी अक्टूबर में तय समय पर ट्रेनिंग बैच शुरू हो पाएंगे। पूरे कार्यक्रम को 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी अगले करीब सवा साल में इस योजना के तहत लाखों ग्रामीण युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर रोजगार से जोड़ने की कोशिश होगी।
प्लेसमेंट-लिंक्ड मॉडल क्यों है खास?
DDU-GKY योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका “प्लेसमेंट-लिंक्ड” मॉडल है। इसका मतलब है कि यह सिर्फ एक स्किल ट्रेनिंग कोर्स नहीं है, बल्कि ट्रेनिंग देने वाली एजेंसियों (PIAs) की जवाबदेही तय की गई है कि वे ट्रेनिंग पूरी करने वाले युवाओं को वास्तविक नौकरी दिलाने में मदद करें। इससे यह योजना सिर्फ “सर्टिफिकेट बांटने” वाली स्कीम न होकर, असल रोजगार पैदा करने वाला कार्यक्रम बनती है। यह मॉडल खासतौर पर उन जिलों के लिए डिज़ाइन किया गया है जहां रोजगार के स्थानीय अवसर सीमित हैं और युवाओं को शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और MSME सेक्टर पर असर
रिन्सन बिजनेस न्यूज़ के नजरिए से देखें तो DDU-GKY 2.0 सिर्फ एक सामाजिक कल्याण योजना भर नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों में मौजूद छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) की स्किल्ड मैनपावर की जरूरत पर भी पड़ेगा। जिन क्षेत्रों में मैनपावर सप्लाई और लेबर कॉन्ट्रैक्टिंग का काम होता है, वहां ट्रेंड और सर्टिफाइड युवाओं की उपलब्धता बढ़ने से रिक्रूटमेंट और स्टाफिंग एजेंसियों को भी फायदा मिल सकता है। इसके अलावा, जिन राज्यों में नए बैच शुरू हो रहे हैं, वहां लोकल ट्रेनिंग पार्टनर्स और वोकेशनल इंस्टीट्यूट्स के लिए भी नए बिजनेस अवसर खुलेंगे।
आवेदन कैसे करें?
इच्छुक ग्रामीण युवा अपने नजदीकी ब्लॉक या जिला ग्रामीण विकास कार्यालय, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), या DDU-GKY की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए इस योजना के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। चूंकि टारगेट आवंटन की प्रक्रिया राज्य स्तर पर चल रही है, इसलिए अपने राज्य में योजना कब और किस जिले में शुरू हो रही है, इसकी सटीक जानकारी के लिए स्थानीय ग्रामीण विकास विभाग से संपर्क करना बेहतर रहेगा। पात्रता की सामान्य शर्तों में ग्रामीण क्षेत्र का निवासी होना और तय आयु सीमा के भीतर होना शामिल है।
किन सेक्टरों में मिलती है ट्रेनिंग?
DDU-GKY के तहत आमतौर पर रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, IT-ITeS, ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंस्ट्रक्शन और ऑटोमोटिव जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टरों से जुड़े कोर्स कराए जाते हैं। सेक्टर स्किल काउंसिल्स के तय मानकों के आधार पर सिलेबस डिजाइन किया जाता है, ताकि ट्रेनिंग पूरी करने वाले युवाओं को इंडस्ट्री की असल जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा सके। इसके अलावा कम्युनिकेशन स्किल्स, बेसिक कंप्यूटर नॉलेज और सॉफ्ट स्किल्स पर भी खास ध्यान दिया जाता है, ताकि युवा सिर्फ टेक्निकल तौर पर ही नहीं बल्कि वर्कप्लेस पर व्यवहारिक रूप से भी तैयार होकर निकलें।
महिलाओं और वंचित वर्गों पर खास फोकस
DDU-GKY योजना में शुरू से ही यह प्रावधान रहा है कि कुल लाभार्थियों में से एक तय हिस्सा महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं के लिए आरक्षित रखा जाए। 2.0 वर्जन में भी इस सामाजिक समावेशन (social inclusion) के पहलू को बरकरार रखा गया है, ताकि योजना का फायदा समाज के सबसे कमजोर तबकों तक भी पहुंच सके। नक्सल प्रभावित और आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) में इस योजना को विशेष प्राथमिकता दी जाती है, जहां रोजगार के औपचारिक अवसर अपेक्षाकृत कम होते हैं।
निष्कर्ष
DDU-GKY 2.0 के जरिए सरकार ग्रामीण भारत में कौशल विकास और रोजगार सृजन को नई गति देने की कोशिश कर रही है। अक्टूबर से शुरू हो रहे बैचेज इस बड़े कार्यक्रम की पहली सीढ़ी हैं, और अगले डेढ़ साल में लाखों युवाओं तक इसका फायदा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जो युवा अभी बेरोजगार हैं या अपने हुनर को बेहतर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक सुनहरा मौका साबित हो सकता है। रिन्सन बिजनेस न्यूज़ इस योजना से जुड़े राज्यवार अपडेट्स आगे भी लगातार लाता रहेगा।


