चंद्रपुर के 50 ग्राम पंचायतों में स्वस्तिक पैटर्न में वृक्षारोपण अभियान शुरू
चंद्रपुर जिले में 15 अक्टूबर को 50 ग्राम पंचायतों में स्वस्तिक पैटर्न में वृक्षारोपण अभियान शुरू हुआ। पुढारी की रिपोर्ट के अनुसार इस पहल का उद्देश्य गांवों में हरियाली बढ़ाना और पौधों की देखभाल को सामुदायिक अभियान बनाना है।
क्या है स्वस्तिक पैटर्न?
इस तरीके में पौधे स्वस्तिक के आकार में लगाए जाते हैं, जिससे जगह का सुनियोजित उपयोग होता है और ग्रामीणों में अभियान के प्रति आकर्षण भी बढ़ता है। इस तरह की पहल से गांव में सार्वजनिक भूमि पर हरित क्षेत्र विकसित करने में मदद मिलती है।
सूखे के बीच क्यों जरूरी?
चंद्रपुर जिले में कम बारिश और घटते जलस्तर के बीच पेड़ लगाने के साथ पानी की उपलब्धता और देखभाल भी चुनौती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि देशी प्रजातियों के पौधे लगाएं, जो कम पानी में टिक सकें, और शुरुआती महीनों में जीवित रहने की दर पर ध्यान दें।
ग्रामीण कैसे जुड़ें?
अपनी ग्राम पंचायत या पंचायत समिति कार्यालय से अभियान की जानकारी लें। स्कूल, महिला बचत गट और युवा मंडल इसमें भाग ले सकते हैं।
वृक्षारोपण अभियान की रूपरेखा
पुढारी के अनुसार चंद्रपुर जिले की 50 ग्राम पंचायतों में स्वस्तिक पैटर्न में पौधे लगाने का अभियान शुरू हुआ है। इस तरह की पहल में गांव की किसी सार्वजनिक भूमि, जैसे स्कूल परिसर, गौरान, श्मशान भूमि या तालाब के किनारे को चुना जाता है। पौधे एक विशेष आकार में लगाने से गांव में अभियान के प्रति रुचि बढ़ती है और लोग उसे दूर से भी पहचान लेते हैं। स्वस्तिक भारतीय संस्कृति में शुभ का प्रतीक माना जाता है, इसलिए यह पहल सांस्कृतिक जुड़ाव भी बनाती है।
पौधे लगाने से अधिक जरूरी: पौधे बचाना
वृक्षारोपण अभियानों की सबसे बड़ी चुनौती पौधों की जीवित रहने की दर होती है। कई बार पौधे लगा दिए जाते हैं, पर पानी और सुरक्षा के अभाव में कुछ महीनों में सूख जाते हैं। इसलिए ग्राम पंचायत को हर पौधे की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, जैसे किसी परिवार, स्कूल या बचत गट को एक-एक क्षेत्र सौंपना। नियमित सिंचाई, बाड़ और निगरानी के बिना अभियान का असर सीमित रह जाता है।
सूखे के वर्ष में किन बातों का ध्यान
इस साल पानी की कमी है, इसलिए देशी और सूखा-सहनशील प्रजातियों को प्राथमिकता देना बेहतर होता है, जैसे नीम, करंज, बबूल की कुछ किस्में, इमली और जामुन। पौधों को जड़ में पानी देना, मल्चिंग से नमी बचाना और गड्ढे में खाद मिलाना उपयोगी है। सिंचाई के लिए घरेलू इस्तेमाल का साफ पानी या ड्रिप जैसी बचत वाली विधि अपनाई जा सकती है।
मनरेगा और वृक्षारोपण
सरकारी योजनाओं में मनरेगा के तहत वृक्षारोपण, बाग विकास और जल संधारण के कार्य कराए जाते हैं। इससे ग्रामीण मजदूरों को रोजगार भी मिलता है। चंद्रपुर प्रशासन सूखा राहत कार्यों की योजना बना रहा है, इसलिए ऐसे कार्य रोजगार और पर्यावरण दोनों में योगदान दे सकते हैं। जॉब कार्ड धारक ग्राम पंचायत में काम की मांग कर सकते हैं।
चंद्रपुर के पर्यावरण का संदर्भ
चंद्रपुर जिले में उद्योग, कोयला खनन और बिजली उत्पादन के कारण वायु और जल प्रदूषण की चुनौतियां रही हैं। इसलिए हरित आवरण बढ़ाना जिले के लिए खास महत्व रखता है। पेड़ धूल और प्रदूषण को कम करने में मदद करते हैं, तापमान घटाते हैं और भूजल संधारण में सहायक होते हैं।
ग्रामीण कैसे योगदान दें
अपने ग्राम पंचायत कार्यालय से अभियान की तारीख और स्थल जानें। परिवार के साथ पौधारोपण में भाग लें और अपने लगाए पौधे का नाम पट्टिका के साथ चिह्नित करें। स्कूल के बच्चे पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी ले सकते हैं। पशुओं से सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड या कांटेदार बाड़ का उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कितनी ग्राम पंचायतों में अभियान है? रिपोर्ट के अनुसार 50 में।
स्वस्तिक पैटर्न से क्या लाभ? सुनियोजित और आकर्षक रोपण, तथा अभियान के प्रति जुड़ाव।
सबसे बड़ी चुनौती? पौधों को पानी और सुरक्षा देना।
स्रोत: पुढारी न्यूज़ चंद्रपुर (15 अक्टूबर 2026)।


