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राज्यों का Tax Revenue 13.7% बढ़ा: GST और Stamp Duty ने भरी तिजोरी

September 19, 2026 · Prashant Mankar
राज्यों का Tax Revenue 13.7% बढ़ा: GST और Stamp Duty ने भरी तिजोरी

राज्यों की तिजोरी में जोरदार बढ़त

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) के आंकड़े राज्यों की माली हालत के लिए अच्छी खबर लेकर आए हैं। इस दौरान देश के राज्यों का अपना टैक्स रेवेन्यू (Own Tax Revenue) सालाना आधार पर 13.7% बढ़कर ₹7.93 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹6.98 लाख करोड़ था। इस मजबूत ग्रोथ के पीछे मुख्य वजह रही GST कलेक्शन और स्टाम्प व रजिस्ट्रेशन ड्यूटी में आई तेज बढ़ोतरी।

GST सबसे बड़ा योगदानकर्ता

राज्यों के कुल टैक्स रेवेन्यू में GST कलेक्शन का हिस्सा सबसे बड़ा बना हुआ है। अप्रैल-जुलाई FY27 के दौरान GST कलेक्शन 12.7% बढ़कर ₹3.67 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹3.26 लाख करोड़ था। यह लगातार बढ़ता आंकड़ा दिखाता है कि GST सिस्टम अब स्थिर होकर राज्यों के लिए रेवेन्यू का सबसे भरोसेमंद जरिया बन चुका है, और फॉर्मलाइजेशन (organised economy में ज्यादा कारोबार आने) की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है।

स्टाम्प ड्यूटी ने मारी सबसे तेज छलांग

दिलचस्प बात यह है कि प्रतिशत के हिसाब से सबसे तेज ग्रोथ GST में नहीं बल्कि स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन ड्यूटी में दर्ज हुई। यह कलेक्शन 16.9% बढ़कर ₹98,000 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹83,800 करोड़ था। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी बड़ी वजह देशभर में बढ़ते रियल एस्टेट सौदे और प्रॉपर्टी की बढ़ती वैल्यूएशन है — यानी घर, दुकान और जमीन की खरीद-बिक्री में आई तेजी सीधे राज्यों के खजाने में झलक रही है।

अन्य टैक्स कैटेगरी का हाल

बाकी टैक्स कैटेगरी में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला:

सेल्स टैक्स (VAT)

पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों पर लगने वाला सेल्स टैक्स/VAT कलेक्शन 11.4% बढ़कर ₹1.46 लाख करोड़ रहा।

राज्य आबकारी (State Excise)

राज्यों का एक्साइज रेवेन्यू 13.5% बढ़कर ₹1.07 लाख करोड़ पर पहुंच गया।

अन्य टैक्स व ड्यूटी

बाकी छोटी टैक्स कैटेगरी में सबसे तेज उछाल दर्ज हुआ — 21.1% की बढ़त के साथ यह आंकड़ा ₹68,900 करोड़ रहा।

केंद्र से मिलने वाली राशि में आई कमी

हालांकि एक चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। एक्सिस बैंक रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अवधि में राज्यों को केंद्र से मिलने वाला हिस्सा (Union taxes में states का share) 4.7% घट गया, जबकि केंद्र से मिलने वाले ग्रांट्स-इन-एड में तो 26.8% की भारी गिरावट दर्ज हुई। यानी अगर राज्यों का अपना टैक्स कलेक्शन इतनी तेजी से न बढ़ता, तो केंद्रीय ट्रांसफर में आई कमी की भरपाई करना मुश्किल हो जाता। कुल मिलाकर राज्यों का कुल रेवेन्यू रिसीट्स (सभी स्रोतों को मिलाकर) 7.6% बढ़कर ₹12.30 लाख करोड़ रहा — जो अपने टैक्स कलेक्शन की ग्रोथ रेट (13.7%) से काफी धीमा है।

फिस्कल डेफिसिट पर क्या असर?

अच्छी खबर यह है कि मजबूत अपने टैक्स रेवेन्यू के दम पर एक्सिस बैंक रिसर्च का अनुमान है कि राज्य अपने बजट में तय किए गए 3.1% के फिस्कल डेफिसिट टारगेट को वित्त वर्ष 2026-27 में हासिल कर सकते हैं। इसका मतलब है कि राज्यों की सरकारें कर्ज पर निर्भरता बढ़ाए बिना भी अपनी विकास योजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए जरूरी खर्च कर पाने की स्थिति में रहेंगी।

व्यापारियों और MSME के लिए इसका मतलब

रिन्सन बिजनेस न्यूज़ के पाठकों, खासकर छोटे व्यापारियों और उद्यमियों के लिए यह आंकड़े इस बात के संकेत हैं कि GST कंप्लायंस अब पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होता जा रहा है, क्योंकि राज्यों का बड़ा हिस्सा रेवेन्यू अब इसी पर निर्भर है। साथ ही, रियल एस्टेट सेक्टर में आई तेजी (जो स्टाम्प ड्यूटी के आंकड़ों से झलकती है) MIDC प्लॉट्स, कमर्शियल प्रॉपर्टी और नए इंडस्ट्रियल सेटअप में निवेश करने वालों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। मजबूत राज्य वित्त का मतलब अक्सर इंफ्रास्ट्रक्चर, सब्सिडी और औद्योगिक प्रोत्साहन योजनाओं पर ज्यादा खर्च होने की संभावना भी होता है।

पिछले वर्षों के रुझान से तुलना

पिछले कुछ वित्त वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्यों का GST कलेक्शन धीरे-धीरे स्थिर होकर दहाई अंकों में ग्रोथ दिखा रहा है, जो जुलाई FY27 में राष्ट्रीय स्तर पर देखे गए 15.4% के मासिक GST कलेक्शन ग्रोथ के आंकड़ों से भी मेल खाता है। इससे यह भी पता चलता है कि GST सिस्टम में कंप्लायंस बढ़ने और टैक्स चोरी पर लगाम कसने के लगातार प्रयासों का असर अब आंकड़ों में साफ दिख रहा है। इंपोर्ट टैक्स रेवेन्यू में भी करीब 29% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो विदेशी व्यापार में आई तेजी का संकेत है।

राज्यों के बीच योगदान का फर्क

हालांकि इस रिपोर्ट में हर राज्य का अलग-अलग ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन आमतौर पर देखा गया है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक राज्य मिलकर देश के कुल GST रेवेन्यू का करीब 40% हिस्सा जुटाते हैं। ऐसे में इन राज्यों में होने वाली आर्थिक गतिविधि का राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों पर सीधा और बड़ा असर पड़ता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, अप्रैल-जुलाई FY27 के आंकड़े दिखाते हैं कि राज्यों की अर्थव्यवस्था GST और रियल एस्टेट सेक्टर की मजबूती के दम पर स्थिर गति से आगे बढ़ रही है, भले ही केंद्र से मिलने वाले ट्रांसफर में कुछ कमी आई हो। आने वाले महीनों में अगर यह रुझान बना रहता है, तो राज्यों के पास अपनी विकास योजनाओं और नई सब्सिडी/इंसेंटिव स्कीम्स के लिए ज्यादा वित्तीय गुंजाइश होगी। रिन्सन बिजनेस न्यूज़ इस विषय पर आगे भी राज्यवार आंकड़ों की जानकारी देता रहेगा।

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