SEBI का नया प्रस्ताव: डेरिवेटिव्स सेटलमेंट फॉर्मूला और क्लोजिंग ऑक्शन टाइमिंग में बड़ा बदलाव
भारतीय शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने डेरिवेटिव्स मार्केट में एक्सपायरी डे सेटलमेंट को लेकर नया प्रस्ताव जारी किया है। यह प्रस्ताव अगस्त 2026 में शुरू हुए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद उठे सवालों के जवाब में लाया गया है, और इसका मकसद बाजार बंद होने के आखिरी मिनटों में कीमतों में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है।
अभी सेटलमेंट कैसे होता है
CAS लागू होने से पहले, एक्सपायरी डे पर डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट कीमत आखिरी 30 मिनट के कारोबार के वॉल्यूम-वेटेड औसत भाव (VWAP) के आधार पर तय होती थी। लेकिन CAS शुरू होने के बाद बाजार में यह चिंता बढ़ी कि क्लोजिंग प्राइस असली कारोबार के बजाय एक अनुमानित इक्विलिब्रियम प्राइस (IEP) पर निर्भर हो रहा है, जो वास्तव में execute नहीं होता।
सेबी के दो विकल्प
सेबी ने दो अलग-अलग सेटलमेंट फॉर्मूले सुझाए हैं। पहला विकल्प है “ब्लेंडेड VWAP” जिसमें आखिरी 30 मिनट के सामान्य कारोबार और 10 मिनट के CAS विंडो, दोनों के ट्रेड्स को शामिल किया जाएगा और इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए कोई तय अनुपात नहीं होगा बल्कि असली ट्रेडेड वैल्यू के हिसाब से वेटेज मिलेगी। दूसरा विकल्प है “CTS VWAP”, जिसमें कम से कम एक साल तक पुराना तरीका ही जारी रहेगा यानी सिर्फ आखिरी 30 मिनट के सामान्य कारोबार को गिना जाएगा और CAS के ट्रेड्स को बाहर रखा जाएगा।
टाइमिंग में भी बदलाव के प्रस्ताव
सेबी ने कारोबार के समय को लेकर भी दो विकल्प रखे हैं। पहले विकल्प में सामान्य कारोबार दोपहर 3:30 बजे तक चलेगा, उसके बाद 3:31 से 3:40 बजे तक CAS विंडो रहेगी और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:45 बजे बंद होगी। दूसरे विकल्प में मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी, यानी CAS वाले शेयरों के लिए 3:15 बजे कट-ऑफ रहेगा और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:30 बजे बंद होगी।
अतिरिक्त प्रस्तावित बदलाव
इसके अलावा सेबी ने रेफरेंस प्राइस से 1% से ज्यादा दूर रखे गए ऑर्डर को कैंसिल करने पर रोक, अनएक्जिक्यूटेड आइसबर्ग ऑर्डर को पूरी मात्रा दिखाने वाले सामान्य लिमिट ऑर्डर में बदलने, और ट्रांजिशन पीरियड व पोस्ट-CAS ट्रेडिंग विंडो को छोटा करने का भी प्रस्ताव रखा है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह खबर
यह बदलाव डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स, म्यूचुअल फंड्स और इंडेक्स-लिंक्ड प्रोडक्ट्स में निवेश करने वाले आम निवेशकों, सभी को प्रभावित करेगा क्योंकि एक्सपायरी डे सेटलमेंट प्राइस का सीधा असर F&O पोजीशन के फाइनल मुनाफे-नुकसान पर पड़ता है। सेबी ने इस प्रस्ताव पर जनता से 3 अक्टूबर 2026 तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद मार्केट पार्टिसिपेंट्स, एक्सचेंज और इंडस्ट्री बॉडीज़ की राय के आधार पर अंतिम फॉर्मूला तय किया जाएगा। ट्रेडर्स और निवेशकों को सलाह है कि वे सेबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरा कंसल्टेशन पेपर पढ़ें और जरूरत पड़ने पर अपनी राय दर्ज कराएं।
प्रस्तावित बदलावों की तह में
SEBI ने डेरिवेटिव्स सेटलमेंट फॉर्मूला और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की समयसीमा में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, ताकि डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के निपटान से जुड़ी परिचालन संबंधी चुनौतियों को दूर किया जा सके। यह प्रस्ताव CAS के एक महीने के परिचालन अनुभव और बाजार भागीदारों से मिले फीडबैक के आधार पर तैयार किया गया है।
बाजार सहभागियों पर प्रभाव
यह बदलाव लागू होने पर ब्रोकर्स, म्यूचुअल फंड और संस्थागत निवेशकों को अपनी ट्रेडिंग और रिस्क मैनेजमेंट प्रणालियों में समायोजन करना पड़ सकता है। SEBI इस पर एक सार्वजनिक परामर्श पत्र (consultation paper) जारी कर बाजार से सुझाव मंगाएगा, जिसके आधार पर अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।


