प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के 6 साल: ₹2,500 करोड़ आवंटन, मछली उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि
11 सितंबर 2026 | प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ने अपने लागू होने के 6 साल पूरे कर लिए हैं। सरकार ने 2026-27 के लिए इस योजना को अब तक का सबसे सर्वाधिक ₹2,500 करोड़ रुपये का आवंटन दिया है।
मछली उत्पादन और निर्यात में बड़ी उछाल
योजना शुरू होने के बाद देश में मछली उत्पादन 141.64 लाख टन (2019-20) से बढ़कर 197.75 लाख टन (2024-25) तक पहुंच गया है। वहीं मत्स्य निर्यात भी ₹46,663 करोड़ से बढ़कर ₹73,890 करोड़ तक पहुंच गया है, जो भारतीय मत्स्य उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
मछुआरों के संगठन और डिजिटल पहल
योजना के तहत अब तक 2,195 फिश फार्मर्स प्रोड्यूसर ओर्गनाइजेशंस (FFPOs) को समर्थन दिया जा चुका है, जिससे छोटे मछुआरों को सामूहिक रूप से बाजार से जुड़ने में मदद मिली है। इसके साथ ही एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया है, जिस पर अब तक 37 लाख से अधिक मछुआरों का पंजीकरण हो चुका है।
व्यापारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण
मत्स्य पालन, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जुड़े व्यवसायों और एमओंएमई (MSME) के लिए PMMSY के तहत सब्सिडी, DPR सहायता और इनफ्रास्ट्रक्चर संबंधी स्कीमों का लाभ उठाना आसान हो गया है।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), भारत सरकार
6 साल में क्या हासिल हुआ?
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत अब तक कुल ₹21,394.88 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा ₹9,510.89 करोड़ है। योजना का मूल परिव्यय ₹20,750 करोड़ था। इस योजना के चलते देश का मछली उत्पादन वर्ष 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है – यानी करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि। इसी तरह मत्स्य निर्यात भी ₹46,663 करोड़ (2019-20) से बढ़कर ₹73,890 करोड़ (2025-26) तक पहुंचा है, जो लगभग 58 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।
रोजगार और आजीविका पर प्रभाव
वर्तमान में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र लगभग 3 करोड़ लोगों की आजीविका को सहारा दे रहा है, जबकि PMMSY के माध्यम से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से 58 लाख लोगों को रोजगार मिला है। योजना के तहत 2,195 मत्स्य किसान उत्पादक संगठन (FFPOs) स्थापित किए गए हैं, जिनमें ₹544.86 करोड़ का निवेश किया गया है।
बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश
कोल्ड-चेन और मार्केटिंग के लिए ₹2,797 करोड़ की परियोजनाओं के तहत 28,489 मछली परिवहन इकाइयां, 775 कोल्ड स्टोरेज व आइस प्लांट, और 6,018 फिश कियोस्क स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा फिशिंग हार्बर विकास पर ₹3,741.89 करोड़ खर्च कर 28 हार्बर विकास/आधुनिकीकरण परियोजनाएं और 25 फिश लैंडिंग सेंटर मंजूर किए गए हैं। जलीय कृषि तकनीक के तहत 12,081 रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और 52,058 जलाशय केज लगाए गए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना को अब तक का सबसे बड़ा ₹2,500 करोड़ का बजट आवंटन मिला है, जो सरकार की इस क्षेत्र में निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति
मत्स्य उत्पादन में हुई इस वृद्धि के साथ भारत अब विश्व के सबसे बड़े मत्स्य उत्पादक देशों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। घरेलू खपत के साथ-साथ झींगा (Shrimp) निर्यात में भी भारत की हिस्सेदारी वैश्विक बाजार में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है, जिससे देश को महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा भी अर्जित हो रही है। तटीय राज्यों के लाखों मछुआरा परिवारों की आय में हुई वृद्धि इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है।


