Home / Business News
Business News

चंद्रपुर में सूखे की मार: खड़ी धान की फसल में बैल बांधकर किसान ने जताया दर्द

October 13, 2026 · Prashant Mankar
चंद्रपुर में सूखे की मार: खड़ी धान की फसल में बैल बांधकर किसान ने जताया दर्द

चंद्रपुर जिले से सूखे की गंभीरता बताने वाली एक तस्वीर सामने आई है। पुढारी की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, पानी के अभाव में फसल सूखने पर एक किसान ने अपनी खड़ी धान की फसल में बैल बांध दिए, ताकि पशु उसे चर लें। यह घटना किसानों की बेबसी को दर्शाती है।

धान उत्पादक जिलों में संकट

चंद्रपुर और पूर्वी विदर्भ को धान का क्षेत्र माना जाता है। धान की फसल को दाना भरने के समय पर्याप्त पानी चाहिए। बारिश कम होने और तालाबों में पानी घटने से कई जगह फसल पक नहीं पाई, जिससे लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है।

सरकार की राहत घोषणा

महाराष्ट्र सरकार ने सूखे के बीच किसानों को तत्काल राहत देने की घोषणा की है। 14 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने 305 तालुकों में सूखा घोषित करने और पात्र किसानों को ₹5,000 की दिवाली से पहले की मदद की बात कही। इस योजना की पूरी जानकारी हमारी अलग खबर में दी गई है।

किसान क्या करें?

फसल नुकसान की सूचना तुरंत तलाठी, कृषि सहायक या तहसील कार्यालय को दें। पीक इंश्योरेंस वाले किसान संबंधित कंपनी या बैंक को लिखित सूचना दें। बैंक खाता आधार से जुड़ा रखें और ई-केवाईसी पूरी रखें, ताकि सरकारी सहायता सीधे खाते में आ सके।

धान की फसल को पानी की जरूरत कब सबसे ज्यादा होती है

धान एक ऐसी फसल है जिसे बाकी अनाजों की तुलना में अधिक पानी चाहिए। रोपाई के बाद कल्ले फूटने, बालियां निकलने और दाना भरने की अवस्थाओं में नमी की कमी सबसे ज्यादा नुकसान करती है। यदि इन महत्वपूर्ण चरणों में बारिश न हो या सिंचाई का साधन उपलब्ध न हो, तो बालियों में दाने पूरी तरह नहीं भरते और उपज घट जाती है। चंद्रपुर और पूर्वी विदर्भ में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है और यहां की सिंचाई काफी हद तक तालाबों और मालगुजारी जलाशयों पर निर्भर रहती है।

पुढारी की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार एक किसान ने सूखती हुई खड़ी धान की फसल में अपने बैल बांध दिए। ग्रामीण भाषा में इसे किसान की निराशा का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि जब फसल से लागत भी निकलने की उम्मीद न रहे तो किसान पशुओं से ही उसे चरा देना बेहतर समझता है।

खेती की लागत और घाटे का गणित

एक एकड़ धान की खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, ट्रैक्टर या बैल से जुताई और रोपाई में हजारों रुपये खर्च होते हैं। जब उपज बहुत कम हो जाए तो न केवल मुनाफा खत्म होता है, बल्कि कर्ज चुकाने की समस्या भी खड़ी हो जाती है। कई किसान बीज और खाद के लिए सहकारी बैंक या साहूकार से कर्ज लेते हैं। ऐसे में फसल बर्बाद होना परिवार की पूरी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है।

सरकार की घोषणाएं और उनकी सीमाएं

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 305 तालुकों में सूखा घोषित किया है और पात्र किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की सहायता देने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि यह रकम पूरे नुकसान की भरपाई नहीं करती, लेकिन तत्काल सहारा देने का प्रयास है। शेष मुआवजा बाद में दिया जाएगा। कुछ नेताओं ने रकम को कम बताया है। किसान संगठनों की मांग रहती है कि पंचनामा तेजी से हो और मुआवजे की राशि प्रति हेक्टेयर वास्तविक नुकसान के अनुसार तय की जाए।

सूखा घोषित होने पर किसानों को आमतौर पर मिलने वाली सुविधाएं

सूखा घोषित तालुकों में राज्य के सूखा प्रबंधन नियमों के तहत आमतौर पर कुछ राहत उपाय लागू किए जाते हैं। इनमें भू-राजस्व में छूट, सहकारी कर्ज के पुनर्गठन, कृषि पंपों के बिजली बिल में रियायत, पेयजल के लिए टैंकर और मनरेगा के माध्यम से रोजगार जैसी सुविधाएं शामिल रहती हैं। किस तालुके में कौन सी सुविधा लागू होगी, इसका निर्णय सरकारी आदेश से होता है। किसान अपने तहसील कार्यालय से आदेश की प्रति और जानकारी लें।

किसान तुरंत क्या करें

पहला, फसल नुकसान की सूचना तलाठी, कृषि सहायक और ग्राम पंचायत को लिखित रूप में दें और रसीद लें। दूसरा, खेत की स्थिति के फोटो और वीडियो तारीख के साथ सुरक्षित रखें। तीसरा, अगर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पंजीकरण है तो निर्धारित समय में बीमा कंपनी, बैंक या टोल-फ्री नंबर पर सूचना दें। चौथा, 7/12 उतारा, 8-अ, बैंक पासबुक और आधार की प्रतियां तैयार रखें। पांचवां, मनरेगा के लिए जॉब कार्ड अपडेट रखें और काम की मांग का आवेदन दें।

मानसिक स्वास्थ्य और परिवार का सहारा

लगातार आर्थिक तनाव का असर किसानों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। परिवार, पड़ोस और ग्राम स्तर की संस्थाओं को ऐसे समय में एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए। यदि कोई अत्यधिक चिंता या निराशा महसूस करे तो अपनों से बात करें और प्रशिक्षित परामर्शदाता या स्वास्थ्य केंद्र की मदद लें। कठिन समय में मदद मांगना कमजोरी नहीं है।

आगे की योजना: रबी की तैयारी

कृषि विभाग के अधिकारी आमतौर पर किसानों को कम अवधि और कम पानी वाली फसलों के बीज, मृदा नमी संरक्षण और बीज उपचार की सलाह देते हैं। किसान अपने कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि कार्यालय से सलाह ले सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सभी किसानों को ₹5,000 मिलेंगे? घोषणा के अनुसार पात्र किसानों को। पात्रता का अंतिम निर्धारण GR के अनुसार होगा।

पंचनामा कब होता है? सूचना मिलने के बाद राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम खेतों का निरीक्षण करती है।

क्या बीमा का दावा किया जा सकता है? यदि फसल बीमा लिया है तो शर्तों और समय सीमा के भीतर दावा किया जा सकता है।

स्रोत: पुढारी न्यूज़ चंद्रपुर (13 अक्टूबर 2026)।

📲
रोजच्या सरकारी योजना व बिझनेस अपडेट्स मोफत मिळवा!
आमच्या "उद्योग मार्गदर्शन" WhatsApp चॅनेलला जॉईन करा
चॅनेल जॉईन करा
MIDC Industrial Plot Complete Guide E-Book Mahilansathi Pramukh Sarkari Yojana E-Book