चंद्रपुर: घोडाझरी तालाब का जलस्तर 15 दिन में घटकर करीब 5 फीट, सिंचाई और पेयजल पर चिंता
चंद्रपुर जिले में कमजोर बारिश का असर अब जलाशयों पर साफ दिखने लगा है। पुढारी की 13 अक्टूबर की खबर के अनुसार घोडाझरी तालाब का जलस्तर महज 15 दिनों में घटकर करीब पांच फीट रह गया है। इससे आसपास के किसानों और गांवों में चिंता बढ़ी है।
क्यों बढ़ी चिंता?
घोडाझरी तालाब का पानी इलाके में सिंचाई और भूजल स्तर के लिए अहम माना जाता है। रबी सीजन की बुवाई से पहले जलस्तर का इतना कम हो जाना किसानों के लिए खतरे की घंटी है। जब तालाब में पानी कम होता है तो नहरों से सिंचाई मुश्किल होती है और आसपास के कुओं व बोरवेल का स्तर भी गिरता है।
राज्य में सूखे की स्थिति
महाराष्ट्र सरकार पहले ही राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुकी है और जल स्तर गिरने से कई जिलों में टैंकरों की मांग बढ़ रही है। चंद्रपुर जिले में भी प्रशासन सूखा राहत कार्यों की योजना बना रहा है, ताकि मजदूरों को रोजगार मिल सके।
किसानों और नागरिकों के लिए सुझाव
पानी के उपयोग में किफायत बरतें, घरेलू और सिंचाई उपयोग के लिए उपलब्ध पानी की प्राथमिकता तय करें और अपने तहसील कार्यालय या कृषि विभाग से राहत योजनाओं की जानकारी लें। सूखे में फसल नुकसान की सूचना समय पर संबंधित कार्यालय को देना जरूरी है, ताकि पंचनामा और मुआवजे की प्रक्रिया में देरी न हो।
घोडाझरी तालाब का महत्व
चंद्रपुर जिले के नागभीड़ क्षेत्र में स्थित घोडाझरी तालाब इस इलाके की सिंचाई और भूजल के लिए प्रमुख स्रोत माना जाता है। इसके पानी पर खेती, पशुपालन और आसपास के गांवों की जलापूर्ति काफी हद तक निर्भर करती है। इसलिए जब पुढारी की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट में बताया गया कि जलस्तर 15 दिनों में गिरकर करीब पांच फीट रह गया है, तो यह स्थानीय किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया।
जलस्तर घटने के कारण
किसी भी तालाब का जलस्तर कम होने के पीछे आमतौर पर कई कारण होते हैं: मानसून में अपेक्षा से कम बारिश, तेज गर्मी में वाष्पीकरण, सिंचाई के लिए पानी की निकासी और भूजल में कमी। इस साल महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में बारिश कम रही है। राज्य सरकार पहले 358 में से 265 तालुकों को और अब 305 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुकी है। इसलिए जलाशयों का तेजी से घटना इसी बड़ी तस्वीर का हिस्सा है।
रबी सीजन पर असर
अक्टूबर के बाद रबी की बुवाई का समय शुरू होता है, जिसमें गेहूं, चना और अन्य फसलों के लिए सिंचाई की जरूरत पड़ती है। अगर तालाब में पानी कम रहा तो नहरों से पानी छोड़ने की मात्रा और अवधि सीमित होगी। इससे किसान रबी की बुवाई घटा सकते हैं या कम पानी वाली फसलें चुनने को मजबूर होंगे। जिन किसानों के पास अपने कुएं या बोरवेल हैं, उनका जलस्तर भी तालाब के पानी पर निर्भर रहता है, इसलिए वहां भी दिक्कत आ सकती है।
कम पानी में खेती के सुझाव
कृषि विशेषज्ञ आमतौर पर सलाह देते हैं कि कम पानी वाली फसलों जैसे चना, ज्वार और कुछ दलहन पर ध्यान दें। ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई से पानी की बचत होती है। मल्चिंग से मिट्टी की नमी बनी रहती है। पानी का उपयोग सुबह या शाम को करें ताकि वाष्पीकरण कम हो। फसल बीमा लिया हो तो बीमा कंपनी और बैंक को समय पर सूचना दें।
पेयजल की चिंता और प्रशासन की तैयारी
राज्य सरकार के अनुसार भूजल स्तर तीन मीटर से नीचे गया है, टैंकरों की संख्या बढ़ाई जा रही है और उन्हें GPS से ट्रैक किया जाएगा। 16,000 अवैध जल कनेक्शन भी काटे गए हैं। चंद्रपुर प्रशासन ने भी सूखा राहत कार्यों की योजना बनाई है, ताकि मजदूरों को रोजगार मिले। नागरिकों से अपील है कि पीने के पानी का दुरुपयोग न करें और घरों में पानी बचाने के उपाय अपनाएं।
सरकारी राहत और किसान क्या करें
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पात्र किसानों को दिवाली से पहले ₹5,000 की सहायता देने की घोषणा की है। किसान तहसील और कृषि कार्यालय से पात्रता की जानकारी लें, बैंक खाते की आधार लिंकिंग पूरी रखें और फसल नुकसान की सूचना लिखित में दें। पंचनामा और फोटो साक्ष्य मुआवजा प्रक्रिया में सहायक होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पूरा जिला सूखाग्रस्त घोषित है? राज्य सरकार ने तालुका स्तर पर घोषणा की है। अपने तालुके की स्थिति तहसील कार्यालय से जानें।
टैंकर की मांग कैसे करें? ग्राम पंचायत के माध्यम से तहसील कार्यालय में लिखित मांग दें।
तालाब का पानी कितने दिन चलेगा? यह बारिश और उपयोग पर निर्भर है। रिपोर्ट में केवल जलस्तर के घटने का उल्लेख है, कोई अनुमानित अवधि नहीं दी गई।
स्रोत: पुढारी न्यूज़ चंद्रपुर (13 अक्टूबर 2026)।


