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57th GST Council Meeting Decisions: गिरफ्तारी की शक्ति खत्म, अभियोजन सीमा ₹5 करोड़, रिफंड 3 दिन में

October 8, 2026 · Prashant Mankar
57th GST Council Meeting Decisions: गिरफ्तारी की शक्ति खत्म, अभियोजन सीमा ₹5 करोड़, रिफंड 3 दिन में

57th GST Council Meeting Decisions: नई दिल्ली के भारत मंडपम में 8 अक्टूबर 2026 को हुई जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों के लिए कई राहत भरे सुधारों की सिफारिश की गई। टैक्सस्कैन की रिपोर्ट के अनुसार कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने, अभियोजन की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने, रिफंड के स्वतः प्रसंस्करण और पंजीकरण संशोधन की स्वीकृति तेज करने जैसे अहम फैसले हुए। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की और इसमें कई राज्यों के मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री शामिल हुए।

सबसे बड़ा फैसला: गिरफ्तारी की शक्ति खत्म

काउंसिल ने जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त करने और अभियोजन की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की सिफारिश की। कारोबारी संगठन लंबे समय से इस शक्ति के दुरुपयोग की आशंका जताते रहे हैं। इस बदलाव से छोटे और मध्यम कारोबारियों में भय का माहौल घटने की उम्मीद है, क्योंकि अब अपेक्षाकृत छोटे मामलों में अभियोजन की नौबत नहीं आएगी। हालाँकि इन सिफारिशों को कानूनी संशोधन या अधिसूचना के जरिये लागू करना होगा।

रिफंड और पंजीकरण में राहत

रिपोर्ट के अनुसार पात्र रिफंड दावों में से 90% को पावती के बाद तीन कार्य दिवसों में स्वतः संसाधित किया जाएगा। नियमित पंजीकरण संशोधनों में से 65% को स्वतः मंजूरी मिलेगी। जीएसटी पंजीकरण में व्यावसायिक नाम और अतिरिक्त पते जैसे बदलावों की स्वचालित स्वीकृति पर भी चर्चा की खबरें हैं। इससे कारोबारियों को छोटे बदलावों के लिए विभाग के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए पंजीकरण नियम आसान किए जाने की बात कही गई है, जो प्रस्तावित नए नियम 14B से जुड़ी है। इससे अमेजन, फ्लिपकार्ट और मीशो जैसे प्लेटफॉर्मों पर बेचने वाले छोटे कारोबारियों का अनुपालन बोझ घट सकता है।

नोटिस और ITC से जुड़े फैसले

₹10,000 तक की मांग के लिए कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा और ऐसी राशि के लिए पहले जारी नोटिस वापस लिए जाएँगे। इनपुट टैक्स क्रेडिट की पात्रता पर धारा 16(2)(c) के मुद्दों को देखने के लिए अधिकारियों की स्थायी समिति बनाने की सिफारिश हुई। कर्मचारियों के स्वास्थ्य और जीवन बीमा तथा कारखाने के बाहर स्थित टेलीकॉम टावरों और पाइपलाइनों पर ITC की अनुमति दी गई है।

इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत रिफंड का दायरा इनपुट सेवाओं तक बढ़ाने का फैसला 1 नवंबर 2026 से लागू होगा, जबकि संयंत्र और मशीनरी पर क्रेडिट का रिफंड 1 अप्रैल 2027 से मिलेगा। कुछ प्रस्ताव, जैसे संचित ITC रिफंड का दायरा पूँजीगत वस्तुओं और इनपुट सेवाओं तक बढ़ाना और धारा 17(5) में संशोधन कर आउटडोर कैटरिंग तथा स्वास्थ्य व जीवन बीमा पर प्रतिबंध हटाना, रिपोर्ट में प्रस्ताव के रूप में दर्ज हैं, अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।

दरों में कोई बदलाव नहीं

रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि 57वीं बैठक में कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। यानी वस्तुओं और सेवाओं पर मौजूदा जीएसटी दरें पहले जैसी रहेंगी। यह बैठक मुख्य रूप से प्रक्रिया सुधार, अनुपालन में आसानी और जीएसटी सेवा केंद्रों को बेहतर बनाने पर केंद्रित रही, ताकि विभिन्न क्षेत्राधिकारों के सीजीएसटी करदाताओं को सहूलियत मिले।

राज्यों की चिंता

बैठक से जुड़ी रिपोर्टों में उल्लेख है कि कर्नाटक को ITC संबंधी प्रस्तावों से प्रति वर्ष लगभग ₹1,400 करोड़ का राजस्व नुकसान होने का अनुमान जताया गया है। राज्यों के राजस्व पर प्रभाव ऐसे सुधारों पर हमेशा चर्चा का विषय रहता है। बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जैसे नेता शामिल बताए गए।

अब आगे क्या

काउंसिल की सिफारिशें तभी लागू होती हैं जब केंद्र और राज्य कानून या नियमों में आवश्यक संशोधन करते हैं या अधिसूचना जारी करते हैं। इसलिए कारोबारियों को आधिकारिक अधिसूचनाओं का इंतजार करना चाहिए और तब तक वर्तमान नियमों का पालन जारी रखना चाहिए। हमारी अगली रिपोर्ट में छोटे कारोबारियों के लिए इन फैसलों का व्यावहारिक असर विस्तार से समझाया जाएगा।

जीएसटी परिषद के फैसलों का व्यावहारिक असर

कर दरों या नियमों में बदलाव का असर उपभोक्ताओं, व्यापारियों और उद्योग तीनों पर पड़ता है। दरें घटने पर आमतौर पर वस्तुएं सस्ती होने की उम्मीद रहती है, पर लाभ ग्राहकों तक पहुंचाना कंपनियों पर निर्भर करता है। व्यापारियों को चाहिए कि वे अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर और रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को नई अधिसूचना के अनुसार अद्यतन करें।

अनुपालन में क्या सावधानी रखें

परिषद के फैसले लागू होने के लिए आम तौर पर अधिसूचना जारी होना जरूरी होता है, इसलिए प्रभावी तारीख की पुष्टि सरकारी अधिसूचना से करें। इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों और एचएसएन कोड के वर्गीकरण में बदलाव पर विशेष ध्यान दें। जटिल मामलों में कर सलाहकार की मदद लेना बेहतर रहता है।

स्रोत: टैक्सस्कैन “57th GST Council: Key Highlights” और संबंधित समाचार रिपोर्ट (8 अक्टूबर 2026)। फैसले सिफारिशें हैं; अंतिम प्रभाव अधिसूचना पर निर्भर करेगा। यह लेख कर सलाह नहीं है।

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