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RBI Repo Rate Hike October 2026: रेपो दर 5.50% हुई, 4 साल बाद पहली बढ़ोतरी, रुख “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग”

October 7, 2026 · Prashant Mankar
RBI Repo Rate Hike October 2026: रेपो दर 5.50% हुई, 4 साल बाद पहली बढ़ोतरी, रुख “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग”

RBI Repo Rate Hike October 2026: रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25% से 5.50% कर दी। जीके टुडे की रिपोर्ट के अनुसार गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने यह फैसला सर्वसम्मति से लिया। साथ ही नीति का रुख “तटस्थ” से बदलकर “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” यानी चरणबद्ध सख्ती की ओर कर दिया गया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि है, यानी करीब साढ़े तीन से चार साल बाद रिजर्व बैंक ने दरें बढ़ाई हैं।

फैसले की मुख्य बातें

रेपो दर 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गई है और समिति के सभी सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया। रिजर्व बैंक ने 2025 में दरों में कटौती की थी और उसके बाद लंबे समय तक उन्हें स्थिर रखा था। अब बदलते आर्थिक हालात, खासकर महँगाई के बढ़ते जोखिम, पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े खतरे, महँगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये के कारण केंद्रीय बैंक ने रुख बदला है।

समिति ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया और खुदरा महँगाई का अनुमान 5.0% से बढ़ाकर 5.2% किया। अगस्त 2026 में खुदरा महँगाई 4.82% रही थी। नीति में भविष्य की कार्रवाई को लेकर कहा गया है कि आगे का फैसला आर्थिक हालात के आधार पर “दर वृद्धि या ठहराव” तक सीमित रह सकता है, यानी निकट भविष्य में कटौती की संभावना नहीं दिखती।

रुख में बदलाव का मतलब

“कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” का अर्थ है कि रिजर्व बैंक महँगाई को काबू में रखने के लिए जरूरत के अनुसार सोच-समझकर और चरणबद्ध तरीके से मौद्रिक नीति को सख्त करेगा। यह संकेत देता है कि आने वाली बैठकों में और दर वृद्धि की संभावना खुली है। बाजार के लिए यह रुख परिवर्तन दर वृद्धि जितना ही अहम था, क्योंकि इससे दरों की भावी दिशा तय होती है।

कुछ विश्लेषकों ने इस कदम को चौंकाने वाला बताया, जबकि अन्य ने इसे अपेक्षित माना था। एसबीआई रिसर्च ने पहले ही 25 आधार अंकों की वृद्धि की संभावना जताई थी। बाजार रिपोर्टों में उल्लेख है कि जेफरीज को इस चक्र में कुल लगभग 100 आधार अंकों की बढ़ोतरी की अपेक्षा है, जबकि नोमुरा ने इसे आश्चर्य के रूप में देखा। ये ब्रोकरेज के अनुमान हैं, रिजर्व बैंक की घोषणा नहीं।

कर्ज और जमा पर असर

रेपो दर वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। इसके बढ़ने से बैंकों की उधार लागत बढ़ती है और वे अपनी रेपो-लिंक्ड ऋण दरें बढ़ा सकते हैं। होम लोन, ऑटो लोन और कारोबारी ऋण जैसे फ्लोटिंग रेट कर्ज की ईएमआई या अवधि बढ़ सकती है। दूसरी ओर, बैंक जमा आकर्षित करने के लिए एफडी की दरें भी बढ़ा सकते हैं, जिससे बचतकर्ताओं को लाभ मिल सकता है।

बैंकों ने तेजी से प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है। कुछ सरकारी बैंकों ने अपनी रेपो-आधारित ऋण दरें 8 अक्टूबर से बढ़ाने की घोषणा की है, जिसका विस्तृत ब्यौरा हमारे अगले लेख में दिया गया है। जिन उपभोक्ताओं के कर्ज मौजूदा दर पर चल रहे हैं, वे अपने बैंक से रीसेट की तारीख की जानकारी जरूर लें।

शेयर बाजार की प्रतिक्रिया

नीति के बाद बाजार में दबाव दिखा। 7 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने ₹6,121 करोड़ के शेयर बेचे, और अगले दिन बाजार में बिकवाली बढ़ी, जिसका विवरण हमारी अलग रिपोर्ट में है। ब्याज दर बढ़ने से बैंक, रियल्टी और ऑटो जैसे क्षेत्रों पर दबाव आम तौर पर बढ़ता है। इसके साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की चिंता ने भी बाजार पर असर डाला।

अर्थव्यवस्था के लिए संकेत

रिजर्व बैंक का वृद्धि अनुमान बढ़ाकर 7.1% करना यह दिखाता है कि केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती को लेकर आश्वस्त है, भले ही उसे महँगाई की चिंता है। उच्च वृद्धि के बीच महँगाई नियंत्रण का यह संतुलन नीति की चुनौती है। अगर महँगाई 5.2% के अनुमान के आसपास रही तो सख्ती सीमित रह सकती है, पर तेल या रुपये में और कमजोरी आने पर कड़ा रुख बना रह सकता है।

आम लोगों के लिए सुझाव

कर्जदारों को चाहिए कि वे ईएमआई बढ़ोतरी के लिए बजट में जगह रखें, संभव हो तो कर्ज का कुछ हिस्सा पहले चुका दें और नई दरों के लिए विभिन्न बैंकों की तुलना करें। बचतकर्ता सावधि जमा की नई दरों पर नजर रखें और एफडी लैडर अपनाने पर विचार करें। निवेशक घबराहट में बिकवाली से बचें और अपनी निवेश योजना की समीक्षा करें।

ब्याज दर बढ़ने का आम आदमी पर असर

रेपो दर में बढ़ोतरी का सीधा असर बैंकों की उधारी दरों पर पड़ता है। फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ सकती है या कर्ज की अवधि लंबी हो सकती है। दूसरी ओर, बचत खातों और सावधि जमा पर मिलने वाला ब्याज बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे बचतकर्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि बैंक इसे लागू करने में अलग-अलग समय लेते हैं।

कारोबार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

ऊंची ब्याज दरें कंपनियों के लिए कर्ज महंगा करती हैं, जिससे निवेश और विस्तार की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। रियल एस्टेट, वाहन और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं जैसे क्षेत्र ब्याज दरों के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य महंगाई को काबू में रखते हुए विकास को सहारा देना होता है, इसलिए हर कदम इन दोनों लक्ष्यों के संतुलन पर आधारित होता है। कर्जदारों को चाहिए कि वे अपने बैंक से दर और ईएमआई की ताजा जानकारी लें।

स्रोत: जीके टुडे (7 अक्टूबर 2026), बाजार रिपोर्ट। ब्रोकरेज अनुमान संबंधित संस्थाओं के हैं। यह लेख वित्तीय सलाह नहीं है; अंतिम जानकारी के लिए रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति देखें।

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