FII Selling October 2026: 5 अक्टूबर को ₹4,699 करोड़ की बिकवाली, रुपया और बाजार पर असर
FII Selling October 2026: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली अक्टूबर की शुरुआत में भी जारी रही। बाद की रिपोर्टों के अनुसार 5 अक्टूबर को उन्होंने ₹4,699 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि उसी दिन बाजार में आठ दिन की गिरावट थमकर तेजी लौटी थी। यह स्थिति बताती है कि घरेलू निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही है, पर विदेशी निकासी का दबाव कायम है।
FII कौन होते हैं और उनकी बिकवाली क्यों मायने रखती है
विदेशी संस्थागत निवेशक वे बड़े संस्थान हैं, जैसे पेंशन फंड, संपदा कोष और म्यूचुअल फंड, जो भारत के बाहर से यहाँ के शेयर और बॉन्ड में पैसा लगाते हैं। इनकी खरीद-बिक्री की मात्रा बड़ी होने के कारण बाजार की दिशा और रुपये की चाल पर असर पड़ता है। जब वे बेचते हैं तो डॉलर पाने के लिए रुपये बेचकर डॉलर खरीदते हैं, जिससे रुपये पर दबाव आता है और बाजार में गिरावट का रुख बन सकता है।
वर्तमान माहौल में बिकवाली के कारण
पहला कारण अमेरिकी ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड का ऊँचा स्तर है। जब अमेरिका में सुरक्षित निवेश पर अच्छा रिटर्न मिलता है तो निवेशक जोखिम वाले उभरते बाजारों से पैसा निकालकर वहाँ लगा सकते हैं। दूसरा कारण रुपये की कमजोरी है, क्योंकि रुपया गिरने से डॉलर में रिटर्न घट जाता है। तीसरा कारण पश्चिम एशिया का तनाव और ऊँचा कच्चा तेल है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ाता है।
इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में ऊँचे मूल्यांकन, खासकर आईटी में कमजोर मांग की चिंता और तिमाही नतीजों की अनिश्चितता भी विदेशी निवेशकों को सतर्क बनाती है। इस साल आईटी शेयरों में आई भारी गिरावट इसी चिंता को दर्शाती है। इन सभी कारणों के मिश्रण से बिकवाली लंबे समय तक चलने का जोखिम रहता है।
घरेलू निवेशकों की भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में म्यूचुअल फंड एसआईपी के जरिये हर महीने आने वाला घरेलू निवेश बाजार का बड़ा सहारा बना है। जब विदेशी संस्थान बेचते हैं तो घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) और खुदरा निवेशक खरीदारी कर बाजार को संभालते हैं। यही कारण है कि आज सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी दिखी, भले ही FII ने भारी बिकवाली की। फिर भी अगर विदेशी निकासी लंबे समय तक जारी रही, तो घरेलू प्रवाह को भी इसकी भरपाई में मुश्किल हो सकती है।
रुपये पर इसका असर
रुपया 1 अक्टूबर को डॉलर के मुकाबले 95.95 पर खुला था, जबकि पिछला बंद 95.82 था। लगातार विदेशी निकासी और महँगे तेल के कारण रुपये में कमजोरी का रुझान बना हुआ है। कमजोर रुपये का प्रभाव आयात आधारित वस्तुओं, जैसे कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोना, की कीमतों पर पड़ता है। विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेश यात्रा करने वालों का खर्च भी बढ़ जाता है।
दूसरी ओर, निर्यातकों, आईटी सेवा कंपनियों और विदेश से पैसा भेजने वाले अनिवासी भारतीयों को रुपये की कमजोरी से फायदा होता है, क्योंकि उन्हें डॉलर के बदले अधिक रुपये मिलते हैं। रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार और बाजार हस्तक्षेप के जरिये रुपये की अत्यधिक अस्थिरता को सीमित करने की कोशिश करता है।
आम निवेशक क्या करें
विदेशी निवेशकों की बिकवाली की खबर देखकर घबराकर निवेश बेचना उचित नहीं होता। इतिहास में कई बार देखा गया है कि FII की बिकवाली अस्थायी रही और बाद में खरीदारी लौट आई। जिनका निवेश लंबी अवधि का है, वे अपने पोर्टफोलियो की गुणवत्ता और कंपनियों की कमाई पर ध्यान दें।
अगर आप नए निवेशक हैं तो एसआईपी के जरिये अनुशासित निवेश जारी रखना अच्छा तरीका है, क्योंकि गिरावट के दौर में आप कम कीमत पर अधिक यूनिट खरीदते हैं। लीवरेज या उधार लेकर निवेश करने से बचें और अपनी आपात निधि अलग रखें। विश्वसनीय वित्तीय स्रोतों से जानकारी लें और अफवाह-आधारित सलाह से दूर रहें।
विदेशी निवेश के आँकड़े कैसे पढ़ें
एनएसडीएल और एक्सचेंज रोजाना FII/DII की खरीद-बिक्री के आँकड़े जारी करते हैं। इन आँकड़ों में कैश सेगमेंट, डेरिवेटिव्स और बॉन्ड बाजार की गतिविधि अलग-अलग दिखाई जाती है। सिर्फ एक दिन की बिकवाली या खरीदारी से निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं; कम से कम एक हफ्ते या एक महीने के कुल प्रवाह को देखना बेहतर रहता है। साथ ही यह भी देखें कि बिकवाली कैश बाजार में है या वायदा में, क्योंकि दोनों के संकेत अलग होते हैं।
जब FII शुद्ध विक्रेता हों और साथ ही डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा हो, तब आम तौर पर रुपये में कमजोरी देखी जाती है। इसके उलट, जब FII खरीदार बनते हैं, रुपया और बाजार दोनों को सहारा मिलता है। इसीलिए अनुभवी निवेशक FII प्रवाह को बाजार की धारणा के संकेतक के तौर पर देखते हैं, न कि अकेले निवेश का आधार।
संभावित आगे की राह
आने वाले सप्ताह में रिजर्व बैंक की नीति, अमेरिकी आर्थिक आँकड़े और कंपनियों के तिमाही नतीजे विदेशी निवेशकों के रुख को तय करेंगे। अगर भारत की वृद्धि और कमाई के संकेत मजबूत रहे, तो गिरावट के बाद विदेशी निवेशक फिर खरीदारी की ओर लौट सकते हैं। फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है और बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
स्रोत: बाजार रिपोर्ट (5-6 अक्टूबर 2026) और कोटक नियो का रुपये संबंधी डेटा। आँकड़े रिपोर्टों पर आधारित हैं। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।


