Share Market Outlook 5-9 अक्टूबर: RBI नीति, TCS नतीजे और GST काउंसिल पर रहेगी बाजार की नजर
Week Ahead Market Outlook 5-9 October 2026: भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला सप्ताह घटनाओं से भरा है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चलेगी और फैसला 7 अक्टूबर को सुनाया जाएगा। इसके अलावा टीसीएस के दूसरी तिमाही के नतीजे, जीएसटी काउंसिल की बैठक, कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को इन सभी कारकों पर नजर रखनी होगी।
सबसे बड़ी घटना: RBI नीति 7 अक्टूबर को
रेपो दर अगस्त की समीक्षा के बाद 5.25% पर है। अपस्टॉक्स की रिपोर्ट के मुताबिक एसबीआई रिसर्च ने 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना जताई है, हालाँकि यह केवल पूर्वानुमान है, आरबीआई का फैसला नहीं। अगर महँगाई के जोखिम, महँगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये को देखते हुए केंद्रीय बैंक सख्त रुख अपनाता है, तो बैंक, रियल्टी और ऑटो जैसे ब्याज-संवेदी क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
नीति में केवल दर ही नहीं, बल्कि रिजर्व बैंक का रुख (तटस्थ या सख्ती की ओर), वृद्धि और महँगाई के अनुमान तथा तरलता से जुड़े कदम भी महत्वपूर्ण होंगे। बाजार इन सभी संकेतों को पढ़कर अपनी रणनीति तय करेगा। इसीलिए नीति के दिन बाजार में तेज झटके देखने को मिल सकते हैं और निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।
कंपनियों के नतीजे: आईटी से शुरुआत
दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के नतीजों का सिलसिला आईटी दिग्गज टीसीएस से शुरू होता है, जिसके नतीजे इस सप्ताह 8 अक्टूबर को आने हैं। उसके बाद एचसीएलटेक (12 अक्टूबर), विप्रो (15 अक्टूबर) और अन्य कंपनियाँ अपने आँकड़े जारी करेंगी। आईटी कंपनियों के नतीजे अमेरिकी मांग, एआई पर खर्च, सौदों की पाइपलाइन और रुपये के प्रभाव का संकेत देते हैं। इस साल आईटी शेयरों में काफी दबाव रहा है, इसलिए नतीजों और अगली तिमाही के अनुमान पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।
इसके साथ ही कई कंपनियाँ तिमाही कारोबार अपडेट भी जारी करती हैं। बैंक अपनी जमा और ऋण वृद्धि के प्रारंभिक आँकड़े देते हैं, जबकि खुदरा कंपनियाँ राजस्व और स्टोर विस्तार की जानकारी साझा करती हैं। ये आँकड़े पूरे नतीजों से पहले कंपनी की दिशा का अंदाजा देते हैं।
जीएसटी काउंसिल की बैठक
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक 7 अक्टूबर को प्रस्तावित है, जबकि अधिकारियों की बैठक 5-6 अक्टूबर को होने की जानकारी है। रिपोर्टों के अनुसार इसमें कर दरों में बड़े बदलाव की बजाय ई-इनवॉइसिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट और अनुपालन जैसे प्रक्रियागत सुधारों पर चर्चा हो सकती है। कारोबारियों के लिए ये फैसले कर बोझ से ज्यादा रोजमर्रा के अनुपालन को आसान या कठिन बनाने के लिहाज से अहम होंगे।
वैश्विक कारक: तेल, डॉलर और बॉन्ड यील्ड
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति कच्चे तेल की कीमत पर असर डाल रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महँगा होने से चालू खाते का घाटा, महँगाई और रुपये पर दबाव बढ़ता है। इसके साथ अमेरिका में ऊँची बॉन्ड यील्ड और रोजगार आँकड़े भी वैश्विक बाजारों की दिशा तय कर रहे हैं। जब अमेरिकी यील्ड बढ़ती है तो उभरते बाजारों से पूँजी बाहर जाने का जोखिम बढ़ता है।
रुपया 95 से 96 प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार कर रहा है, जो ऐतिहासिक कमजोर स्तरों के करीब है। रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति पर भी बाजार की निगाह रहेगी। रुपये में अचानक तेज गिरावट आयातकों, विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेशी कर्ज वाली कंपनियों की चिंता बढ़ाती है।
तकनीकी स्तर और निवेशक रणनीति
विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,400 और 22,217 के आसपास समर्थन तथा 22,650, 22,800 और 23,000 पर प्रतिरोध के स्तर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बैंक निफ्टी में 54,000 के आसपास समर्थन और 55,135-55,200 के क्षेत्र में प्रतिरोध बताया गया है। ये स्तर संभावनाओं का मार्गदर्शन हैं, गारंटी नहीं, और वैश्विक घटनाओं से अचानक बदल सकते हैं।
खुदरा निवेशकों के लिए सुझाव है कि घटनाओं वाले सप्ताह में अनावश्यक जोखिम और बहुत अधिक लीवरेज से बचें, अपनी निवेश अवधि के अनुसार चरणबद्ध खरीद करें और सिर्फ चर्चा में आए शेयरों के पीछे न भागें। नीति और नतीजों के दिन बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है, इसलिए स्टॉप-लॉस और पोजीशन साइज का अनुशासन रखें। जिनका निवेश लंबी अवधि का है, वे दैनिक उतार-चढ़ाव से घबराने की बजाय कंपनियों के मूल आधार पर ध्यान दें।
पिछले दिनों का संदर्भ: बाजार यहाँ तक कैसे पहुँचा
1 अक्टूबर को सेंसेक्स 71,909.70 और निफ्टी 22,421.95 पर बंद हुए थे और बाजार में लगातार गिरावट का दौर चल रहा था। 30 सितंबर को सेंसेक्स 72,480 के आसपास था। यानी एक दिन में लगभग 570 अंकों की गिरावट आई। इस पृष्ठभूमि में निवेशक पहले से सतर्क हैं, इसलिए अगले सप्ताह की हर बड़ी घटना का असर सामान्य से अधिक तीखा हो सकता है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली, महँगा कच्चा तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल इस गिरावट के प्रमुख कारण बताए जाते रहे हैं। अगर रिजर्व बैंक की नीति और कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे तो राहत की तेजी संभव है, पर नकारात्मक संकेत मिलने पर गिरावट भी बढ़ सकती है। इसलिए हफ्ते की शुरुआत में ही अपनी निवेश योजना और जोखिम सीमा तय कर लेना समझदारी होगी।
सबसे अच्छी रणनीति यह है कि आप अपने पोर्टफोलियो में कुछ नकद राशि सुरक्षित रखें ताकि गिरावट आने पर अच्छे शेयरों में चरणबद्ध खरीद का विकल्प बना रहे। साथ ही, अपने निवेश का उद्देश्य और समय-सीमा लिखकर रखें ताकि खबरों के शोर में भावनात्मक फैसले न हों।
स्रोत: अपस्टॉक्स, कोटक नियो और अन्य बाजार रिपोर्ट। तारीखें कंपनियों और संस्थाओं की घोषणाओं पर आधारित हैं और बदल सकती हैं। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।


