₹3 लाख तक के Export पर अब RCMC जरूरी नहीं! DGFT का बड़ा फैसला
छोटे निर्यातकों, कारीगरों और नए उद्यमियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत भरा फैसला लिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 15 सितंबर 2026 को अधिसूचना संख्या 36/2026-27 जारी करते हुए ₹3 लाख तक के FOB (Free on Board) मूल्य वाले निर्यात कंसाइनमेंट को RCMC यानी Registration-cum-Membership Certificate (पंजीकरण-सह-सदस्यता प्रमाणपत्र) की अनिवार्यता से पूरी तरह छूट दे दी है। यह अधिसूचना विदेश व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 5 के तहत जारी की गई है और तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। इस फैसले से लाखों छोटे व्यापारी, कारीगर, MSME इकाइयां और पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमी बिना RCMC लिए सीधे विदेशी बाजार में अपना सामान भेज सकेंगे।
RCMC क्या है और अब तक क्यों जरूरी था?
RCMC यानी Registration-cum-Membership Certificate एक ऐसा प्रमाणपत्र है जो संबंधित एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EPC) या कमोडिटी बोर्ड से जारी किया जाता है। विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) 2023 के पैराग्राफ 2.57 के तहत अब तक यह प्रमाणपत्र लगभग हर निर्यातक के लिए अनिवार्य था, चाहे उसकी शिपमेंट का मूल्य कितना भी छोटा क्यों न हो। RCMC के जरिए ही निर्यातकों को सरकार की विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं (export incentive schemes) का लाभ मिलता है, और यह किसी भी निर्यातक की औपचारिक पहचान का दस्तावेज भी माना जाता है। लेकिन छोटे और कभी-कभार निर्यात करने वाले व्यापारियों के लिए यह प्रक्रिया एक बड़ी बाधा बन गई थी, क्योंकि RCMC बनवाने में समय, कागजी कार्यवाही और शुल्क तीनों लगते हैं।
नई छूट का नियम — किसे और कैसे मिलेगा फायदा
DGFT की नई अधिसूचना के मुताबिक, Foreign Trade Policy 2023 के पैराग्राफ 2.57 के उप-पैराग्राफ (a) और (b) में जो भी प्रावधान हों, उनके बावजूद (notwithstanding) अब ₹3 लाख तक FOB मूल्य के निर्यात कंसाइनमेंट के लिए RCMC या Certificate of Registration की जरूरत नहीं होगी। इसे “de minimis” यानी न्यूनतम-सीमा छूट कहा जा रहा है। साफ शब्दों में कहें तो अगर किसी एक शिपमेंट का FOB मूल्य ₹3,00,000 से कम या बराबर है, तो निर्यातक बिना RCMC के भी वह सामान विदेश भेज सकता है। हालांकि ₹3 लाख से अधिक मूल्य वाले निर्यात के लिए पहले की तरह ही RCMC या Certificate of Registration अनिवार्य बना रहेगा — यानी बड़े निर्यातकों पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा।
यह छूट खासतौर पर डाक (Postal), कूरियर (Courier) और ई-कॉमर्स जैसे उभरते हुए निर्यात माध्यमों से भेजी जाने वाली छोटी खेपों को ध्यान में रखकर लाई गई है। यानी अब कोई छोटा दुकानदार, कारीगर या ऑनलाइन सेलर भी सीधे इंटरनेशनल कोरियर या पोस्ट के जरिए अपना उत्पाद विदेश भेज सकता है, बिना किसी काउंसिल में पंजीकरण की लंबी प्रक्रिया से गुजरे।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया? आंकड़े क्या कहते हैं
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच के आंकड़ों पर गौर करें तो 3,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹2.5-3 लाख) तक मूल्य वाले निर्यात कंसाइनमेंट देश के कुल शिपिंग बिल का करीब 43 प्रतिशत हिस्सा हैं। यानी संख्या के लिहाज से यह बहुत बड़ा हिस्सा है। लेकिन इसके बावजूद इन छोटी खेपों की हिस्सेदारी भारत के कुल वस्तु निर्यात मूल्य (merchandise export value) में सिर्फ 0.86 प्रतिशत ही है। इसका सीधा मतलब है कि ऐसे लाखों छोटे निर्यातक हैं जो बार-बार छोटी मात्रा में सामान भेजते हैं, लेकिन उनके ऊपर RCMC जैसी भारी-भरकम प्रक्रिया का बोझ, कुल निर्यात पर पड़ने वाले असर के मुकाबले कहीं ज्यादा था। सरकार ने इसी असंतुलन को दूर करने के लिए यह कदम उठाया है।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का मकसद है कि “नए और कभी-कभार निर्यात करने वाले व्यापारियों को विदेशी बाजार आजमाने का एक आसान रास्ता मिले और वे बिना पहले से RCMC लिए ही अपना निर्यात ट्रैक रिकॉर्ड बना सकें।” यानी अब कोई भी छोटा उद्यमी बिना किसी शुरुआती बाधा के यह परख सकता है कि उसका उत्पाद विदेशी बाजार में चलेगा या नहीं, और अनुभव मिलने के बाद जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर निर्यात के लिए औपचारिक पंजीकरण भी करा सकता है।
किन-किन को मिलेगा सीधा फायदा
इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा निम्नलिखित वर्गों को मिलने की उम्मीद है:
MSME और छोटे उद्योग: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र की वे इकाइयां जो अब तक कागजी प्रक्रिया की वजह से निर्यात से दूर रहती थीं, अब सीधे विदेशी ग्राहकों तक पहुंच सकेंगी।
कारीगर और हस्तशिल्प व्यापारी: हैंडीक्राफ्ट, हथकरघा और पारंपरिक उत्पाद बनाने वाले कारीगर, जो सीमित मात्रा में उत्पाद बेचते हैं, उन्हें अब बड़ी राहत मिलेगी।
पहली बार निर्यात करने वाले (First-time exporters): नए उद्यमी अब बिना पहले से पंजीकरण कराए, आजमाइश के तौर पर अपने उत्पाद विदेश भेज सकते हैं।
ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेलर: Amazon Global, Etsy जैसे प्लेटफॉर्म या सीधे कूरियर के जरिए अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को सामान बेचने वाले ऑनलाइन विक्रेताओं को भी सीधा फायदा मिलेगा।
डाक व कूरियर के जरिए निर्यात करने वाले: Postal और Courier चैनल से जुड़े छोटे व्यापारियों के लिए यह छूट खास तौर पर बनाई गई है।
क्या बड़े निर्यातकों पर कोई असर पड़ेगा?
नहीं। यह छूट सिर्फ ₹3 लाख तक के FOB मूल्य वाले कंसाइनमेंट के लिए है। इससे ऊपर के किसी भी निर्यात के लिए RCMC या Certificate of Registration पहले की तरह ही अनिवार्य रहेगा। यानी स्थापित और बड़े स्तर पर काम कर रहे निर्यातकों की मौजूदा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। सरकार का मकसद बड़े निर्यात ढांचे को कमजोर करना नहीं, बल्कि छोटे स्तर के, कम मूल्य वाले निर्यात के लिए अनावश्यक बाधा हटाना है।
निर्यातकों को अब क्या करना चाहिए
अगर आप एक छोटे व्यापारी, कारीगर या MSME संचालक हैं और अभी तक RCMC न होने की वजह से निर्यात से बचते रहे हैं, तो अब आप ₹3 लाख तक के ऑर्डर सीधे कूरियर या पोस्ट के जरिए भेज सकते हैं। हालांकि ध्यान रहे कि GST रजिस्ट्रेशन, IEC (Import Export Code) जैसे बुनियादी दस्तावेज अब भी जरूरी होंगे — यह छूट सिर्फ RCMC की अनिवार्यता पर है। जैसे-जैसे आपका निर्यात कारोबार बढ़े और आप नियमित रूप से बड़ी मात्रा में सामान भेजने लगें, तब संबंधित एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल से RCMC बनवाना फायदेमंद रहेगा, क्योंकि इससे सरकार की विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ भी मिलता है।
निष्कर्ष
DGFT की यह अधिसूचना भारत के निर्यात तंत्र को छोटे और नए व्यापारियों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। कागजी कार्यवाही और अनुपालन का बोझ कम करके सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह ग्रासरूट स्तर पर उद्यमिता और “मेड इन इंडिया” उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने को प्राथमिकता दे रही है। आने वाले समय में इससे छोटे शहरों और गांवों के कारीगरों तथा MSME इकाइयों की सीधी अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।


