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सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड: ग्रोथ MSME के लिए ₹50,000 करोड़ का इक्विटी फंड

September 5, 2026 · Prashant Mankar
सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड: ग्रोथ MSME के लिए ₹50,000 करोड़ का इक्विटी फंड

सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड भारत सरकार की एक फंड ऑफ फंड्स (Fund of Funds) योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रोथ-स्टेज MSME को इक्विटी व क्वासी-इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराकर उनके विस्तार में मदद करना है। यह फंड कर्ज पर निर्भरता कम कर MSME को स्वामित्व-आधारित (equity) पूंजी की ओर ले जाने के लिए बनाया गया है।

फंड की संरचना

मुख्य लाभ

पात्रता

आवेदन कैसे करें

MSME को सीधे सरकार को आवेदन नहीं करना होता, बल्कि SRI Fund के तहत गठित डॉटर फंड्स (जैसे SBI Ventures द्वारा प्रबंधित फंड) से सीधे संपर्क कर निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत करना होता है। विस्तृत जानकारी NVCFL की वेबसाइट nvcfl.co.in पर उपलब्ध है।

अधिकृत स्रोत

NSIC वेंचर कैपिटल फंड लिमिटेड (NVCFL), MSME मंत्रालय – nvcfl.co.in

अधिक जानकारी व सेवाओं के लिए संपर्क करें

इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या संबंधित सेवाओं (जैसे आवेदन प्रक्रिया में सहायता, दस्तावेज तैयार करना, पात्रता जांच आदि) के लिए RINSON COMMERCE AND TRADE PRIVATE LIMITED से संपर्क करें।
फोन/मोबाइल: +91 7798186956
ईमेल: rinsonbusiness@gmail.com
वेबसाइट: rinsonbusiness.com

SRI फंड की संरचना

सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड एक फंड ऑफ फंड्स (FoF) मॉडल पर काम करता है, जिसका मतलब है कि सरकार सीधे MSME में निवेश नहीं करती, बल्कि विभिन्न सेबी-पंजीकृत वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी फंड्स के माध्यम से यह पूंजी ग्रोथ-स्टेज MSME तक पहुंचाई जाती है। इस मॉडल से पेशेवर फंड मैनेजरों की विशेषज्ञता का लाभ मिलता है और निवेश का जोखिम भी विभाजित होता है।

किन MSME को मिलेगा फायदा?

यह फंड विशेष रूप से उन MSME के लिए है जो अपने विकास के अगले चरण के लिए इक्विटी या क्वासी-इक्विटी पूंजी की तलाश में हैं, लेकिन पारंपरिक बैंक लोन के लिए पर्याप्त गारंटी नहीं दे पाते। मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, कृषि-प्रसंस्करण जैसे विभिन्न क्षेत्रों की उच्च-विकास क्षमता वाली MSME इकाइयां इस फंड से पूंजी प्राप्त कर सकती हैं।

आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ाव

यह फंड आत्मनिर्भर भारत अभियान के व्यापक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बनाया गया है, ताकि छोटे व मध्यम उद्यम आत्मनिर्भर बनकर घरेलू उत्पादन बढ़ा सकें और आयात पर निर्भरता कम कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इक्विटी पूंजी मिलने से MSME अपने कर्ज के बोझ को बढ़ाए बिना विस्तार कर सकते हैं, जो दीर्घकाल में उनकी वित्तीय स्थिरता के लिए फायदेमंद साबित होगा।

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