भारत-न्यूजीलैंड FTA को संसद की मंजूरी, अक्टूबर से लागू होगा ऐतिहासिक व्यापार समझौता
न्यूजीलैंड संसद ने दी FTA को मंजूरी
भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बड़ा ऐतिहासिक कदम सामने आया है। न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर 2026 को भारत के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को 93-29 वोटों के भारी बहुमत से मंजूरी दे दी। खास बात यह रही कि इस बिल को सत्तारूढ़ और विपक्षी, दोनों तरह की पार्टियों का समर्थन मिला, जो दिखाता है कि न्यूजीलैंड में इस डील को लेकर व्यापक राजनीतिक सहमति है। भारत सरकार ने इस मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और लोगों के आपसी आवागमन को नई ऊंचाई देने वाला कदम बताया है।
भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा तोहफा
इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले सभी उत्पादों को 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, यानी न्यूजीलैंड अपने सभी टैरिफ लाइन्स पर भारतीय सामान को शुल्क-मुक्त प्रवेश देगा। यह भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी राहत की बात है, खासकर टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स और प्रोसेस्ड फूड जैसे सेक्टरों के लिए, जिन्हें इस डील में प्राथमिकता वाले क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किया गया है। इन सेक्टरों में काम करने वाले भारतीय MSME और निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार अब पहले से कहीं ज्यादा आकर्षक हो जाएगा।
भारत ने भी दिया बाजार एक्सेस, पर कुछ सेक्टर बचाए
दूसरी तरफ भारत ने न्यूजीलैंड को अपने कुल टैरिफ लाइन्स के 70.03% हिस्से पर बाजार पहुंच दी है, जो दोनों देशों के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार का करीब 95% हिस्सा कवर करता है। हालांकि भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों को बचाते हुए 29.97% टैरिफ लाइन्स को इस डील से बाहर रखा है, जिनमें डेयरी, कृषि उत्पाद, चीनी और कुछ धातुएं शामिल हैं। यह भारत के घरेलू किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों की रक्षा के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है।
टैरिफ खत्म होने की समयसीमा
इस डील के तहत टैरिफ हटाने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से होगी:
तुरंत असर
करीब 30% टैरिफ लाइन्स पर ड्यूटी तुरंत खत्म हो जाएगी, जिनमें लकड़ी, ऊन और भेड़ के मांस जैसे उत्पाद शामिल हैं।
धीरे-धीरे खत्म होने वाली ड्यूटी
करीब 35.60% टैरिफ लाइन्स पर ड्यूटी अगले 3, 5, 7 या 10 साल में चरणबद्ध तरीके से खत्म होगी। इसमें वाइन, फार्मास्युटिकल्स, पॉलिमर, एल्युमिनियम, आयरन और स्टील जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा मानुका शहद, सेब, कीवी और एल्बुमिन जैसे कुछ खास उत्पादों के लिए टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था लागू होगी।
USD 20 अरब का निवेश वादा
इस डील का एक बेहद अहम पहलू यह है कि न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में करीब USD 20 अरब (लगभग ₹1.6-1.7 लाख करोड़) निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह निवेश भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में आ सकता है, जिससे रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए वीजा सुविधाएं
यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लोगों की आवाजाही को आसान बनाने वाले कई प्रावधान भी शामिल हैं:
टेम्पररी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा
हर साल 5,000 कुशल भारतीय पेशेवरों को 3 साल तक के लिए न्यूजीलैंड में काम करने का मौका मिलेगा। इसमें आयुष, IT, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, कंस्ट्रक्शन, कलिनरी (खानपान) और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
वर्किंग हॉलिडे वीजा
हर साल 1,000 युवा भारतीयों को 12 महीने तक न्यूजीलैंड में रहकर काम करने और घूमने का मौका मिलेगा।
छात्रों के लिए सुविधाएं
भारतीय छात्रों को पढ़ाई के दौरान हफ्ते में 20 घंटे काम करने की अनुमति (स्टडी वर्क अलाउंस) और पढ़ाई पूरी होने के बाद ज्यादा लंबी अवधि का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा भी मिलेगा, जिससे भारतीय छात्रों के लिए न्यूजीलैंड एक और आकर्षक स्टडी डेस्टिनेशन बन सकता है।
कब से लागू होगा यह समझौता?
अब जब न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिल चुकी है, दोनों देशों में बाकी बची प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद यह समझौता अक्टूबर 2026 तक पूरी तरह लागू हो जाने की उम्मीद है।
MSME और निर्यातकों के लिए सलाह
रिन्सन बिजनेस न्यूज़ की सलाह है कि टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी और प्रोसेस्ड फूड सेक्टर से जुड़े भारतीय MSME अभी से न्यूजीलैंड मार्केट में एक्सपोर्ट की संभावनाएं तलाशना शुरू कर दें, क्योंकि अक्टूबर से ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने के बाद प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने का यह सुनहरा मौका हो सकता है। इसके लिए DGFT और संबंधित एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल से जुड़ी जानकारी लेना फायदेमंद रहेगा।
द्विपक्षीय व्यापार का मौजूदा हाल
भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहले से मौजूद व्यापारिक रिश्ते अपेक्षाकृत छोटे रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच कृषि प्रौद्योगिकी, डेयरी तकनीक, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। यह FTA दोनों देशों के बीच व्यापार को कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है, खासकर जब भारत अपने एक्सपोर्ट बास्केट को अमेरिका और यूरोप से आगे बढ़ाकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नए बाजारों तक फैलाने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भारत ऑस्ट्रेलिया, यूएई और कई अन्य देशों के साथ भी इसी तरह के FTA साइन कर चुका है, और न्यूजीलैंड के साथ यह डील उसी बड़ी रणनीति की अगली कड़ी मानी जा रही है।
वार्ता की लंबी प्रक्रिया
भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह मुक्त व्यापार समझौता कई वर्षों की गहन बातचीत के बाद तैयार हुआ है। दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ताओं में टैरिफ लाइन्स, संवेदनशील सेक्टरों की सुरक्षा, निवेश सुरक्षा और वीजा जैसे मुद्दों पर सहमति बनाने में समय लगा। अब जब न्यूजीलैंड की संसद ने इसे मंजूरी दे दी है, भारत की तरफ से भी जरूरी घरेलू प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है ताकि यह समझौता तय समय पर लागू हो सके।
निष्कर्ष
भारत-न्यूजीलैंड FTA को मिली संसदीय मंजूरी दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत है। ड्यूटी-फ्री एक्सेस, बड़ा निवेश वादा, और आसान वीजा व्यवस्था — यह तीनों मिलकर भारतीय व्यापार, निवेश और शिक्षा जगत के लिए नए दरवाजे खोलने वाले साबित हो सकते हैं। रिन्सन बिजनेस न्यूज़ इस डील के औपचारिक क्रियान्वयन से जुड़े हर अपडेट पर नजर बनाए रखेगा।


