प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट (PMS) स्कीम: ट्रेड फेयर और मार्केटिंग के लिए ₹15 लाख तक सहायता
प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट (PMS) स्कीम राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) द्वारा MSME मंत्रालय की ओर से संचालित की जाती है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म व लघु उद्यमों (MSE) को बाजार तक पहुंच बढ़ाने, ब्रांड प्रचार व सरकारी/निजी खरीद प्रक्रियाओं में भागीदारी बढ़ाने में सहायता देना है।
मुख्य घटक व लाभ
- घरेलू व्यापार मेलों व प्रदर्शनियों में स्टॉल/भागीदारी शुल्क में सहायता (बड़े मेगा इवेंट के लिए संयुक्त भागीदारी पर कुल सहायता ₹15 लाख तक हो सकती है)
- बार कोड पंजीकरण शुल्क की एकमुश्त प्रतिपूर्ति
- Government e-Marketplace (GeM) पर पंजीकरण व विक्रेता बनने में सहायता
- वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम – बड़ी कंपनियों/PSU के साथ MSE की बायर-सेलर मीट आयोजित करना
- जागरूकता कार्यक्रमों व सेमिनार के माध्यम से सरकारी खरीद नीति की जानकारी
पात्रता
- Udyam पोर्टल पर पंजीकृत सूक्ष्म व लघु उद्यम
- निर्यात/घरेलू बाजार विस्तार के इच्छुक इकाइयां
आवेदन कैसे करें
इच्छुक MSE नजदीकी NSIC कार्यालय या nsic.co.in पोर्टल के माध्यम से आगामी ट्रेड फेयर, बायर-सेलर मीट व अन्य मार्केटिंग गतिविधियों के लिए पंजीकरण व आवेदन कर सकते हैं।
अधिकृत स्रोत
राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC), MSME मंत्रालय – nsic.co.in
अधिक जानकारी व सेवाओं के लिए संपर्क करें
इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या संबंधित सेवाओं (जैसे आवेदन प्रक्रिया में सहायता, दस्तावेज तैयार करना, पात्रता जांच आदि) के लिए RINSON COMMERCE AND TRADE PRIVATE LIMITED से संपर्क करें।
फोन/मोबाइल: +91 7798186956
ईमेल: rinsonbusiness@gmail.com
वेबसाइट: rinsonbusiness.com
सहायता की सीमा और प्रमुख घटक
घरेलू व्यापार मेलों और राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए मेट्रो/A-श्रेणी शहरों में प्रति प्रदर्शक अधिकतम ₹1.50 लाख, B-श्रेणी शहरों में ₹1 लाख और अन्य शहरों में ₹0.80 लाख तक की सहायता मिलती है; कुछ स्वीकृत आयोजनों में यह सहायता 100% तक भी हो सकती है। वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम के जरिए सूक्ष्म व लघु उद्यमों को केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) व सरकारी खरीदारों से सीधे जोड़ा जाता है। खुदरा विस्तार के लिए भौतिक रिटेल आउटलेट स्थापित करने पर ₹30 लाख तक की सहायता उपलब्ध है, तथा बारकोड पंजीकरण व MSME ग्लोबल मार्ट पर उत्पाद लिस्टिंग के लिए भी सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त निर्यात नीति, पैकेजिंग, खरीद रणनीति, GST और GeM पोर्टल पर कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। यह योजना केवल सूक्ष्म व लघु उद्यमों (मध्यम उद्यम पात्र नहीं) के लिए है, वैध उद्यम रजिस्ट्रेशन आवश्यक है, तथा महिला उद्यमियों, SC/ST-स्वामित्व वाले उद्यमों व पूर्वोत्तर क्षेत्र की इकाइयों को प्राथमिकता दी जाती है। इच्छुक उद्यम अपने संबंधित MSME-DI कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
व्यावहारिक लाभ के उदाहरण
PMS योजना के अंतर्गत मिलने वाली सहायता से छोटे उद्यम अक्सर पहली बार किसी बड़े राष्ट्रीय व्यापार मेले में हिस्सा ले पाते हैं, जहां सीधे बड़े खरीदारों व वितरकों से संपर्क होने से नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ती है। रिटेल आउटलेट सहायता विशेष रूप से हस्तशिल्प, खादी व खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हुई है, जहां ग्राहक को उत्पाद प्रत्यक्ष रूप से देखकर खरीदने की आवश्यकता होती है। आवेदन के लिए संबंधित राज्य के MSME-DI कार्यालय से संपर्क करना सबसे सरल तरीका माना जाता है, जो आवेदन प्रक्रिया में मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।
PMS योजना किन खर्चों को कवर करती है?
प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट (PMS) योजना के तहत MSME उद्यमियों को व्यापार मेलों में भागीदारी, विपणन गतिविधियों, वेंडर डेवलपमेंट कार्यक्रमों और खरीद-बिक्री संबंधी अन्य गतिविधियों के लिए ₹15 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जाती है।
MSME की बाजार पहुंच बढ़ाने में मदद
यह योजना विशेष रूप से उन छोटे उद्यमियों के लिए उपयोगी है जिनके पास विपणन के लिए पर्याप्त बजट नहीं होता। सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की खरीद प्रक्रियाओं में MSME की भागीदारी बढ़ाने पर भी इस योजना का विशेष ध्यान केंद्रित है, जिससे छोटे उद्यमों को बड़े खरीदारों (सरकारी विभाग, PSU, बड़ी कंपनियां) तक पहुंचने का अवसर मिलता है और उनकी बिक्री व स्थिरता दोनों में सुधार होता है।


