प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना 2026: कारीगरों को ₹3 लाख तक लोन, टूलकिट और ट्रेनिंग
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सितंबर 2023 में शुरू की गई केंद्र सरकार की योजना है, जो पारंपरिक हस्तशिल्प व दस्तकारी से जुड़े 18 व्यवसायों के कारीगरों (बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मोची, दर्जी, राजमिस्त्री, नाई, धोबी, मालाकार आदि) को आर्थिक व तकनीकी सहायता देने के लिए बनाई गई है।
मुख्य लाभ
- प्रधानमंत्री विश्वकर्मा प्रमाणपत्र व पहचान पत्र (मान्यता के रूप में)
- बेसिक (5-7 दिन) व एडवांस (15 दिन) कौशल प्रशिक्षण, जिसमें प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिदिन ₹500 का स्टाइपेंड
- आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए ₹15,000 का टूलकिट प्रोत्साहन (ई-वाउचर के रूप में)
- बिना गारंटी (collateral-free) ऋण – पहली किस्त ₹1 लाख (18 महीने की अवधि) और दूसरी किस्त ₹2 लाख (30 महीने की अवधि), दोनों मात्र 5% रियायती ब्याज दर पर, कुल मिलाकर ₹3 लाख तक
- डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने हेतु प्रति लेनदेन ₹1 का प्रोत्साहन (प्रति माह अधिकतम 100 लेनदेन तक)
- ब्रांडिंग, मार्केटिंग व ONDC/GeM जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ाव में सहायता
पात्रता
- योजना में सूचीबद्ध 18 पारंपरिक व्यवसायों में से किसी एक में हाथ के औजार से काम करने वाला कारीगर/शिल्पकार
- आवेदन की तिथि पर न्यूनतम आयु 18 वर्ष
- पिछले 5 वर्षों में इसी प्रकार के व्यवसाय हेतु PMEGP, PM-SVANidhi या मुद्रा जैसी योजनाओं के तहत ऋण न लिया हो (कुछ अपवादों सहित)
आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड, मोबाइल नंबर व बैंक खाता विवरण
- व्यवसाय से संबंधित प्रमाण (यदि उपलब्ध हो)
- राशन कार्ड/परिवार पहचान पत्र
आवेदन कैसे करें
आवेदन नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से pmvishwakarma.gov.in पोर्टल पर किया जा सकता है। पंजीकरण के बाद ग्राम पंचायत/ULB स्तर पर सत्यापन, फिर जिला स्तरीय कमेटी से अनुमोदन के बाद लाभ जारी किए जाते हैं।
अधिकृत स्रोत
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय व कौशल विकास मंत्रालय, भारत सरकार – pmvishwakarma.gov.in
अधिक जानकारी व सेवाओं के लिए संपर्क करें
इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या संबंधित सेवाओं (जैसे आवेदन प्रक्रिया में सहायता, दस्तावेज तैयार करना, पात्रता जांच आदि) के लिए RINSON COMMERCE AND TRADE PRIVATE LIMITED से संपर्क करें।
फोन/मोबाइल: +91 7798186956
ईमेल: rinsonbusiness@gmail.com
वेबसाइट: rinsonbusiness.com
योजना के तहत मिलने वाला सहयोग
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को दो चरणों में लोन दिया जाता है – पहले चरण में बिना गारंटी ₹1 लाख तक और सफल पुनर्भुगतान के बाद दूसरे चरण में ₹2 लाख तक, यानी कुल मिलाकर ₹3 लाख तक की सहायता मिल सकती है। इसके अलावा लाभार्थियों को आधुनिक टूलकिट खरीदने के लिए ₹15,000 तक का ई-वाउचर, कौशल विकास प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन ₹500 का भत्ता (स्टाइपेंड), और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
किन 18 व्यवसायों को मिलता है लाभ?
इस योजना के दायरे में बढ़ई, नाव बनाने वाले, लोहार, ताला बनाने वाले, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी/झाड़ू बनाने वाले, गुड़िया व खिलौना निर्माता, नाई, माला बनाने वाले, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले जैसे पारंपरिक व्यवसाय शामिल हैं। ये सभी व्यवसाय भारत की सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा का हिस्सा हैं, जिन्हें आधुनिक बाजार से जोड़ने का प्रयास इस योजना के माध्यम से किया जा रहा है।
आवेदन प्रक्रिया और प्रभाव
इच्छुक कारीगर pmvishwakarma.gov.in पोर्टल पर या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के बाद लाभार्थी को PM विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र दिया जाता है, जो उसे योजना के सभी घटकों का लाभ लेने के लिए मान्य होता है। इस योजना से लाखों पारंपरिक कारीगरों को अपने कौशल को आधुनिक बनाने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।


