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कॉयर विकास योजना: उपकरण खरीद पर 25% से 75% तक सब्सिडी

September 5, 2026 · Prashant Mankar
कॉयर विकास योजना: उपकरण खरीद पर 25% से 75% तक सब्सिडी

कॉयर विकास योजना (Coir Vikas Yojana – CVY) भारत सरकार के MSME मंत्रालय के अधीन कॉयर बोर्ड द्वारा संचालित केंद्रीय क्षेत्र योजना है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कॉयर (नारियल रेशा) उद्योग का आधुनिकीकरण, उत्पादकता में सुधार और कारीगरों विशेषकर महिलाओं के कौशल व आय में वृद्धि करना है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और पूर्वोत्तर राज्यों के लाखों कारीगर परिवार इस योजना से सीधे जुड़े हैं।

योजना के घटक

मुख्य आर्थिक लाभ

पात्रता

आवश्यक दस्तावेज

आवेदन कैसे करें

इच्छुक आवेदक अपने राज्य के नजदीकी कॉयर बोर्ड रीजनल/सब-रीजनल कार्यालय में निर्धारित प्रारूप में ऑफलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। फॉर्म व दिशा-निर्देश आधिकारिक वेबसाइट coirboard.gov.in पर उपलब्ध हैं। सत्यापन व स्वीकृति में सामान्यतः 30-60 दिन लगते हैं, जिसके बाद सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।

अधिकृत स्रोत

कॉयर बोर्ड, MSME मंत्रालय, भारत सरकार – coirboard.gov.in

अधिक जानकारी व सेवाओं के लिए संपर्क करें

इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी या संबंधित सेवाओं (जैसे आवेदन प्रक्रिया में सहायता, दस्तावेज तैयार करना, पात्रता जांच आदि) के लिए RINSON COMMERCE AND TRADE PRIVATE LIMITED से संपर्क करें।
फोन/मोबाइल: +91 7798186956
ईमेल: rinsonbusiness@gmail.com
वेबसाइट: rinsonbusiness.com

कॉयर विकास योजना क्या है?

कॉयर विकास योजना कॉयर बोर्ड (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत) द्वारा नारियल के रेशे (कॉयर) उद्योग से जुड़े उत्पादकों और उद्यमियों को आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए सब्सिडी प्रदान करने हेतु चलाई जा रही है। इसके तहत रेशा निष्कर्षण मशीन, कताई मशीन, बुनाई उपकरण जैसी आधुनिक तकनीक अपनाने पर 25% से लेकर 75% तक की सब्सिडी दी जाती है।

किसे मिलता है अधिक लाभ?

व्यक्तिगत उद्यमियों और छोटे उत्पादकों की तुलना में स्वयं सहायता समूहों (SHGs), उत्पादक सहकारी समितियों और महिला-नेतृत्व वाले समूहों को अधिक सब्सिडी दर (75% तक) का लाभ मिलता है, ताकि सामूहिक उद्यमिता को बढ़ावा मिल सके। यह योजना विशेष रूप से केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और अन्य तटीय राज्यों में महत्वपूर्ण है जहां कॉयर उद्योग परंपरागत रूप से फल-फूल रहा है।

ग्रामीण रोजगार पर प्रभाव

कॉयर उद्योग भारत के तटीय ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों लोगों, विशेष रूप से महिलाओं को रोजगार प्रदान करता है। आधुनिक मशीनरी अपनाने से उत्पादकता और उत्पाद गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे कॉयर उत्पाद (मैट, रस्सी, गद्दे आदि) घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन पाते हैं। यह योजना पारंपरिक उद्योग को आधुनिक बनाकर उसकी आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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