अदाणी पोर्ट्स को पारादीप में दो बर्थ का आवंटन; 1.8 करोड़ टन सालाना क्षमता जोड़ने की योजना
11 सितंबर 2026 | उद्योग डेस्क
ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड को दो ड्राई बल्क बर्थ के विकास और संचालन का आवंटन पत्र मिला है। कंपनी ने 9 सितंबर की आधिकारिक घोषणा में इसकी जानकारी दी। परियोजना CQ-I और CQ-II बर्थ से संबंधित है और इसकी रियायत अवधि 30 वर्ष बताई गई है।
परियोजना में क्या शामिल है?
कंपनी के अनुसार, सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत मशीनीकृत माल संचालन और भंडारण सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्रस्तावित अतिरिक्त क्षमता 18 मिलियन मीट्रिक टन, यानी 1.8 करोड़ टन सालाना है। इसे शामिल करने पर कंपनी के पोर्टफोलियो की क्षमता 653 से 671 मिलियन टन सालाना होगी। यह प्रस्तावित क्षमता विस्तार है, पूरा हो चुका नया माल कारोबार नहीं।
पारादीप का औद्योगिक महत्व
घोषणा में कोयला, चूना पत्थर और अन्य सूखे थोक माल के संचालन तथा पूर्वी और मध्य भारत के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच को महत्व दिया गया है। कंपनी का कहना है कि इससे पूर्वी तट पर उसका नेटवर्क मजबूत होगा। ये कंपनी द्वारा बताए गए अपेक्षित लाभ हैं।
क्षमता बढ़ना और कारोबार बढ़ना अलग बातें हैं
इसे गोदाम के उदाहरण से समझें: अधिक जगह तैयार होने से ज्यादा माल रखने की संभावना बनती है, लेकिन वह जगह वास्तव में कितनी भरेगी, यह मांग और संचालन पर निर्भर होता है। बंदरगाह की वार्षिक क्षमता भी संभावित संचालन का माप है; वास्तविक माल की मात्रा अलग आंकड़ा होती है।
संपादकीय विश्लेषण के अनुसार, आगे परियोजना का निर्माण, सुविधाओं का चालू होना और उनका उपयोग देखने योग्य पड़ाव होंगे। आवंटन पत्र मिलने की खबर को तत्काल आय या लाभ बढ़ने की गारंटी के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए। इसी तरह इस घोषणा के आधार पर रोजगार की कोई निश्चित संख्या बताना उचित नहीं होगा।
स्रोत: APSEZ की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, 9 सितंबर 2026। व्याख्या: Rinson Business News.
करार का विवरण
अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर दो ड्राई बल्क बर्थ के विकास और 30 वर्षों तक संचालन का अधिकार मिला है, जिसके लिए कंपनी ने सबसे ऊंची बोली लगाई थी। इस परियोजना से बंदरगाह की वार्षिक हैंडलिंग क्षमता में लगभग 1.8 करोड़ टन की वृद्धि होने की उम्मीद है।
अदाणी पोर्ट्स के लिए रणनीतिक महत्व
पारादीप बंदरगाह पूर्वी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक द्वार है, विशेष रूप से कोयला, लौह अयस्क और अन्य थोक (bulk) वस्तुओं के आयात-निर्यात के लिए। इस नई परियोजना से APSEZ अपने पोर्ट पोर्टफोलियो का और विस्तार कर पाएगी, जिससे कंपनी की पूर्वी तट पर पकड़ मजबूत होगी और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों में इसका फायदा मिलेगा।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर असर
बंदरगाह क्षमता बढ़ने से ओडिशा राज्य में औद्योगिक गतिविधियों, खासकर इस्पात, बिजली और खनन क्षेत्र से जुड़े व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही निर्माण कार्य और बाद में बंदरगाह संचालन के दौरान स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
निवेश और भविष्य की योजनाएं
अदाणी पोर्ट्स इस परियोजना के तहत आधुनिक कार्गो हैंडलिंग उपकरण, यांत्रिक कन्वेयर सिस्टम और पर्यावरण अनुकूल डस्ट-कंट्रोल तकनीक में निवेश करेगी, ताकि बंदरगाह संचालन दक्षता के साथ-साथ पर्यावरण मानकों का भी पालन हो सके। कंपनी की योजना आने वाले वर्षों में देश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटों पर अपनी बंदरगाह क्षमता को और विस्तारित करने की है, जिससे भारत के समुद्री व्यापार बुनियादी ढांचे को समग्र रूप से मजबूती मिलेगी।


